दानापुर : कूड़ा चुनने वाले बच्चों को शिक्षा देने का बीड़ा उठाया तीन छात्राओं ने

Updated at : 11 Feb 2019 9:37 AM (IST)
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दानापुर : कूड़ा चुनने वाले बच्चों को शिक्षा देने का बीड़ा उठाया तीन छात्राओं ने

दानापुर : नगर के बीबीगंज मोहल्ले में गरीब कूड़े चुनने वाले बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का बीड़ा तीन छात्राओं ने उठा रखा है. इनके लिए एक विशेष पाठशाला महादलित सामुदायिक भवन विकास मंच की ओर से बीबीगंज आंबेडकर भवन में चलती है. इसमें जितने भी सदस्य हैं, वे स्वयं गरीब होने के बावजूद भी […]

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दानापुर : नगर के बीबीगंज मोहल्ले में गरीब कूड़े चुनने वाले बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का बीड़ा तीन छात्राओं ने उठा रखा है. इनके लिए एक विशेष पाठशाला महादलित सामुदायिक भवन विकास मंच की ओर से बीबीगंज आंबेडकर भवन में चलती है.
इसमें जितने भी सदस्य हैं, वे स्वयं गरीब होने के बावजूद भी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं. साथ ही बच्चों के पास कॉपी-किताबें नहीं होने पर उसकी व्यवस्था करते हैं. पढ़ने वाले बच्चे स्लम इलाकों के वाशिंदे हैं. जो नन्हे हाथ कभी कूड़े चुनते थे आज वे पेन और पेंसिल से अपने सपनों को उड़ान भर रहे हैं. यहां कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है.
बच्चों को मुख्य रूप से अलका कुमारी, वर्षा कुमारी व सुमन कुमारी शिक्षा दे रही हैं. 20 बच्चों से शुरू हुई पाठशाला में अभी 200 बच्चे पढ़ने आते हैं. अलका कहती हैं कि 2017 में जब बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत की थी, तो केवल 20 बच्चे आते थे. अब यह संख्या बढ़कर 200 तक पहुंच गयी है. स्नातक की पढ़ाई पूरी कर खुद प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही है .
छात्राओं ने कहा- शुरू में हुई थोड़ी परेशानी, फिर जुड़ने लगे लोग
अलका ने बताया कि शुरुआत में थोड़ी परेशानी होती थी. लोग बच्चों को यहां भेजना नहीं चाहते थे, परंतु जब बच्चे पढ़ने लगे तो अभिभावक खुद ही बच्चों को यहां पढ़ाने के लिए पहुंचाने लगे. उसने कहा कि जब कभी लगा कि पाठशाला बंद करनी पड़ेगी, तो बच्चों के अभिभावकों ने हौसला आफजाई की. अलका ने कहा कि छह बहनों और एक भाई के भरण-पोषण का जिम्मा पिताजी के कंधे पर है.
उनकी आय भी सीमित है. अलका के पिता छावनी परिषद में सफाईकर्मी हैं. मां के जिम्मे भी काफी काम रहता है. ऐसे में मां के कामों में हाथ बंटाने के बाद पाठशाला में आती है. अलका की सहेली वर्षा व सुमन ने बताया कि हर दिन निर्धारित समय पर तीन बजे बच्चे पढ़ने पहुंच जाते हैं. मंच अध्यक्ष सुजीत कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा आज तक कोई सहायता राशि मुहैया नहीं करायी गयी है.
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