पटना : स्वच्छता का बढ़ेगा दायरा, गांवों में स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट से रुकेगा प्रदूषण

Published at :23 Dec 2018 7:36 AM (IST)
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पटना : स्वच्छता का बढ़ेगा दायरा, गांवों में स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट से रुकेगा प्रदूषण

बिहार विकास मिशन की बैठक में मुख्यमंत्री कर चुके हैं चर्चा, कवायद शुरू पटना : शहरी क्षेत्र की तर्ज पर ग्रामीण इलाकों में भी ‘स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट’ सरकार बनायेगी. इससे ग्रामीण इलाकों में शौचालयों के उपयोग के बाद टैंक में भरने वाले वेस्ट का ट्रीटमेंट किया जायेगा. इससे पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सकेगा और […]

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बिहार विकास मिशन की बैठक में मुख्यमंत्री कर चुके हैं चर्चा, कवायद शुरू
पटना : शहरी क्षेत्र की तर्ज पर ग्रामीण इलाकों में भी ‘स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट’ सरकार बनायेगी. इससे ग्रामीण इलाकों में शौचालयों के उपयोग के बाद टैंक में भरने वाले वेस्ट का ट्रीटमेंट किया जायेगा. इससे पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सकेगा और आबोहवा अच्छी होगी. बिहार विकास मिशन की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर चर्चा कर चुके हैं. इसके बाद इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए ग्रामीण विकास विभाग तैयारियों में जुट गया है.
सूत्रों ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालय का गड्ढा कच्चा होता है. इसलिए उसमें इकट्ठा होने वाले वेस्ट उसी गड्ढे में खत्म होता रहता है. जिन घरों में पहले से लोगों ने अपने खर्च पर शौचालय बनवाये हैं, उनके टैंक पक्के बने हुए हैं. एक समय अंतराल पर वह टैंक भर जाते हैं.
ऐसे में समस्या उत्पन्न होती है. दरअसल, गांवों में टैंक भरने के बाद उसमें जमा वेस्ट को उसी के पास खुले में निकाल दिया जाता है. यह पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है. एक अनुमान के मुताबिक बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 30 प्रतिशत शौचालयों के टैंक पक्के बने हैं. ऐसे में सरकार नये सिरे से सोचने पर मजबूर हो गयी है.
पिछले दिनों हुई बिहार विकास मिशन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसको लेकर अधिकारियों से बात की. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शहर की तर्ज पर स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने को कहा है. शहरों में ट्रीटमेंट प्लांट होने की वजह से काफी हद तक प्रदूषण को रोका जाता है. शहर में गाड़ी आती है और वेस्ट को टैंक में भरकर ले जाती है. इसके बाद ट्रीटमेंट प्लांट में टैंक को खाली किया जाता है. यहां ट्रीटमेंट किया जाता है. इसी तर्ज पर गांवों में भी व्यवस्था बनाने को लेकर ग्रामीण विकास विभाग के स्तर से कवायद शुरू हो गयी है.
योजना को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारी जुटे तैयारियों में शहर की तर्ज पर स्मॉल ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने को सीएम ने दिया था निर्देश 44.47 फीसदी गांव ओडीएफ घोषित बिहार के 93.36 प्रतिशत ग्रामीण घरों में शौचालय का निर्माण कराया जा चुका है. इसको सौ फीसदी करने को लेकर सरकारी मशीनरी जुटी हुई है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार 44.47 फीसदी गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है. खुले में शौच से मुक्ति के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है….बता दें कि झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित दर्जन भर से अधिक राज्य पहले ही 100 फीसदी ओडीएफ घोषित हो चुके हैं.
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