पटना : छह महीने बाद भी बिना किताबों के सरकारी स्कूलों के बच्चे, 77 लाख के पास किताबें नहीं

Updated at : 19 Sep 2018 8:22 AM (IST)
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पटना : छह महीने बाद भी बिना किताबों के सरकारी स्कूलों के बच्चे, 77 लाख के पास किताबें नहीं

पठन-पाठन की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था बहाल करने में बाधा पटना : सरकारी स्कूलों में तमाम कोशिशों के बाद भी पठन-पाठन की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था बहाल करने में कोई न कोई बाधा बनी ही रहती है. शैक्षणिक सत्र 2018-19 के शुरू हुए छह महीने हो गये, लेकिन अब तक क्लास एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में […]

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पठन-पाठन की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था बहाल करने में बाधा
पटना : सरकारी स्कूलों में तमाम कोशिशों के बाद भी पठन-पाठन की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था बहाल करने में कोई न कोई बाधा बनी ही रहती है. शैक्षणिक सत्र 2018-19 के शुरू हुए छह महीने हो गये, लेकिन अब तक क्लास एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 77 लाख बच्चों को किताबें नहीं मिल पायी हैं.
यह स्थिति कोई नयी नहीं है, इसके पिछले वर्षों में भी स्थिति ऐसी ही थी. लेकिन सत्र शुरू होने के पांच से छह महीने बाद किताबें बच्चों को मिल गयी थीं. इस समस्या से निजात पाने के लिए ही इस बार से बच्चों को किताबें के रुपये सीधे उनके बैंक खाते में भेजने की योजना शुरू की गयी. परंतु इस वर्ष की स्थिति पिछले वर्षों से भी ज्यादा खराब हो गयी है.
छह महीने बीतने के बाद भी महज 62 फीसदी छात्रों के बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर हो पाये हैं. 38-40 फीसदी छात्रों के बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर नहीं होने से बड़ी संख्या में छात्र आज भी बिना किताबों के ही स्कूल जाते हैं. किताबें नहीं होने के कारण भी छात्रों की उपस्थिति स्कूलों में नियमित नहीं है. औचक निरीक्षण में यह बात सामने आ रही है कि बड़ी संख्या में छात्र क्लासों से अनुपस्थित रहते हैं. माध्यमिक स्कूलों में तो 30 से 35 फीसदी से ज्यादा हाजिरी नहीं रह रही है.
एकाउंट में भेजी जायेगी
120 से 310 रुपये तक की राशि
पिछली योजना की तर्ज पर ही इस बार क्लास एक से आठ तक के बच्चों को इस बार उनके क्लास के अनुसार अलग-अलग राशि पुस्तक खरीद के लिए दी जा रही है. यह राशि 120 से लेकर 310 रुपये तक है.
पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी क्लास के छोटे बच्चों के बैंक खाते नहीं होने के कारण उनके अभिभावक के बैंक खाते में किताब के रुपये सीधे ट्रांसफर किये जा रहे हैं. फिर भी तमाम कोशिशों के बाद भी यह आंकड़ा 62 फीसदी से ऊपर नहीं पहुंच पाया है. रोहतास, औरंगाबाद, कैमूर, गोपालगंज समेत आधा दर्जन जिले ऐसे भी हैं, जहां पुस्तक राशि वितरण की स्थिति 50 फीसदी के आंकड़े को भी पार नहीं कर पायी है. इन जिलों में राशि भी वितरण नहीं हो पा रही है.
इसके मद्देनजर सभी जिलों को शिक्षा विभाग ने राशि ट्रांसफर करने की रफ्तार बढ़ाने की सख्त हिदायत दी है. ताकि जल्द से जल्द बच्चों को किताबों के रुपये मिल सकें. सितंबर महीने के अंत तक सभी बच्चों को किताबों के रुपये दे देने का निर्णय लिया गया है.
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