रेरा की सख्ती : बिल्डरों पर कार्रवाई शुरू, ब्याज सहित मूल रकम लौटाने का आदेश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Sep 2018 8:37 AM
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तय सीमा के बाद भी फ्लैट नहीं देने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई शुरू पटना : तय सीमा के वर्षों बाद भी फ्लैट हैंडओवर नहीं करने वाले बिल्डरों पर गाज गिरनी शुरू हो गयी है. बिहार रियल इस्टेट रेगुलेशन ऑथोरिटी (रेरा) ने अपने दूसरा फैसला सुनाते हुए नेश इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर को मूल 33 लाख की रकम […]
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तय सीमा के बाद भी फ्लैट नहीं देने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई शुरू
पटना : तय सीमा के वर्षों बाद भी फ्लैट हैंडओवर नहीं करने वाले बिल्डरों पर गाज गिरनी शुरू हो गयी है. बिहार रियल इस्टेट रेगुलेशन ऑथोरिटी (रेरा) ने अपने दूसरा फैसला सुनाते हुए नेश इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर को मूल 33 लाख की रकम ब्याज के साथ ग्राहक को अदा करने का आदेश दिया है.
रेरा के दबाव पर पहले किस्त की दस लाख रुपये की राशि हाथों-हाथ मौके पर ही ग्राहक को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दे दी गयी. शेष राशि बची दो किस्तों में 27 नवंबर, 2018 तक अदा कर दी जायेगी. केस की सुनवाई रेरा सदस्य आरबी सिन्हा और एसके सिन्हा के बेंच में की गयी.
अगस्त, 2016 में करायी थी फ्लैट की बुकिंग : नेश इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर खगौल में तिरूअनंतपुरम सिटी बना रहा है. इसमें एजी इंकलेव व इलेक्ट्रिक इंकलेव नाम से करीब 1200 फ्लैट बनाये जाने हैं.
केस के आवेदक कुंदन कुमार और ज्योति कुमारी ने एजी इंकलेव के डी ब्लॉक में 48.96 लाख रुपये में फ्लैट संख्या 726 की बुकिंग करायी थी. ग्राहक ने 24 अगस्त , 2016 को 30.01 लाख जमा कर बिल्डर से एग्रीमेंट कराया. इंटरनल प्लास्टर का 90% काम पूरा हो जाने पर दो अप्रैल, 2017 को उन्होंने फिर तीन लाख का भुगतान किया. यह प्रोजेक्ट 31 जुलाई, 2017 को ही पूरा कर हैंडओवर किया जाना था, लेकिन उसके बाद बिल्डर ने आधे-अधूरे निर्माण के बीच ही पूरे पैसे देकर रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.
नहीं मिला कंपलीशन व एनओसी सर्टिफिकेट
मार्च 2018 तक बिल्डर ने खगौल नगर परिषद से कंपलीशन सर्टिफिकेट और एनओसी नहीं लिया था. इसके साथ ही टाइल्स फ्लोरिंग, किचेन और बाथरूम में मार्बल स्लैब, वॉल टाइल्स, इलेक्ट्रिक फिटिंग नहीं हुई थी. खिड़की, ग्रिल और दरवाजे नहीं लगाये गये थे.
यहां तक की सातवें तल्ले पर बुक इस फ्लैट तक पहुंचने के लिए लिफ्ट तक इंस्टॉल नहीं की गयी थी. इसको देखते हुए ग्राहक ने फ्लैट की रजिस्ट्री कराने से साफ इंकार कर दिया. बिल्डर की एग्रीमेंट रद्द करने की धमकी के बीच उसने रेरा में 11 फीसदी ब्याज के साथ मूल राशि वापसी का केस कर दिया. सुनवाई के दौरान बिल्डर शशिभूषण सिन्हा ने 30 लाख रुपये जमा लिये जाने की बात कबूल की.
ब्याज सहित राशि लौटाएं
सुनवाई करते हुए रेरा सदस्यों ने कहा कि एनओसी या कंपलीशन सर्टिफिकेट के बगैर ग्राहक को फ्लैट लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. इसलिए बिल्डर एसबीआई के मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (करीब आठ से साढ़े आठ फीसदी) की ब्याज दर से तीन किस्तों में मूल राशि का भुगतान करे. दूसरी किस्त 12 अक्तूबर और तीसरी किस्त राशि का भुगतान 27 नवंबर को होगा. आखिरी किस्त में ब्याज राशि भी सम्मिलित रहेगी.
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