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नवादा के साइबर अपराधियों का देश भर में मचा आतंक, बिहार सहित कई राज्यों के लोग हो रहे शिकार

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
साइबर अपराध
साइबर अपराध
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नवादा : जिले में साइबर क्राइम का गोरखधंधा चेहरा पहचानो, इनाम पाओ से शुरू होकर अब विभिन्न कंपनियों की एजेंसी व नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का धंधा वर्षों से फल-फूल रहा है. लाॅकडाउन से अनलाॅक तक ऐसे गिरोह लोगों को खूब चूना लगा रहे हैं. पिछले दिनों ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने इसरो वैज्ञानिक से ठगी के मामले में छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गयी है. इसमें 5.33 लाख रुपये व तीन बाइक, लैपटाॅप, मोबाइल, पासबुक, एटीएम, पेनड्राइव, चेकबुक व पैनकार्ड आदि बरामद कर जिले के ठग माफियाओं में हड़कंप मचा दिया. बावजूद इससे जुड़े माफिया बाज नहीं आ रहे हैं. लोगों को झांसा देकर ठगने वाले गिरोह का इन दिनों वारिसलीगंज, काशीचक, शाहपुर व पकरीबरावां थाना क्षेत्र के विभिन्न गांव सेफ जोन बन गये है. वर्तमान में वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के सोरहीपुर, चकवाय, दरियापुर, झौर, पैंगरी, बलवापर, अपसढ़, नगर पंचायत सहित पूरा थाना क्षेत्र व काषीचक के बाजीतपुर, लालबिगहा, बहरी बिगहा, नेपुरा, पार्वती सहित पकरीबरावां थाना क्षेत्र के उसरीपर, थालपोष, कोननपुर आदि गांवों में इन ठग गिरोह का अड्डा है. ठग गिरोह सक्रिय रूप से लोगों के मोबाइल पर कीमती लग्जरी वाहन का इनाम पाने की सूचना देकर ठगने का काम कर रहे हैं. इस ठग गिरोह के झांसा में आकर बिहार ही नहीं बल्कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उतर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, गुजरात व महाराष्ट्र आदि राज्यों के लोग शिकार हो रहे हैं.

2016 के बाद तेजी से सक्रिय हुए साइबर अपराधी

वर्ष 2016 में आर्थिक अपराध थाना व एसटीएफ पटना की टीम ने वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के अपसढ़ गांव में छापेमारी कर ठग गिरोह के 4 सदस्यों को नकद सहित अवैध कागजात के साथ गिरफ्तार करने में सफलता पा चुकी है. गिरफ्तार चारों साइबर क्राइमर द्वारा पुलिस के समक्ष दिये गये बयान में इसी प्रखंड के चकवाय ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया जितेंद्र कुमार उर्फ जालो को गिरोह का संचालनकर्ता के रूप में नाम बताया गया था. मुखिया का नाम आने के बाद टीम के सदस्यों ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब मुखिया शपथ लेकर कार्यालय से बाहर निकल रहा था. इस संबंध में एसटीएफ के एसआई विकास कुमार के लिखित आवेदन पर आर्थिक अपराध थाना पटना में प्राथमिकी संख्या 6/16 दर्ज करा कर मुखिया सहित 6 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. गौरतलब है कि इसके दो वर्ष पहले वारिसलीगंज पुलिस द्वारा थाना क्षेत्र के झौर ग्रामीण ठग गिरोह के सक्रिय सदस्य चंदन कुमार को एटीएम से ठग की राशि निकलते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. एसपी डाॅ मानवजीत सिंह ढिल्लो के कार्यकाल में भी वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के सोरहीपुर गांव में छापामारी कर इस धंधा में संलिप्त व ठग गिरोह के मुख्य सरगना सहित सात लोगों की गिरफ्तार किया गया था. जिसमें लाखों रुपये नकद व कई फर्जी नाम पर बैंक खाता, एटीएम कार्ड व फर्जी मतदाता परिचय पत्र के साथ कई आपत्तिजनक कागजात बरामद किया गया था.

कई प्रदेशों की पुलिस दे चुकी है दबिश

लाॅकडाउन के दौरान कई राज्यों की पुलिस स्थानीय पुलिस की सहयोग से वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों से दर्जनों ठग गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी है. कोरोना काल के दौरान पांच जून को वारिसलीगंज पुलिस ने चकवाय पंचायत की बाघी गांव से छह ठग सहित काफी संख्या में मोबाइल, एटीएम कार्ड, प्रिंटर मशीन, लैपटाप व कई बाइक को जब्त किया था. इसके ठीक एक माह बाद पांच जुलाई को यूपी के फैजाबाद पुलिस ने कोचगांव पंचायत से कांधा गांव से दो ठगों को गिरफ्तार किया था. उसके बाद हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़ व गुजरात की पुलिस ने विभिन्न गांवों से दर्जनों माफियाओं को लाखों रुपये सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद कर चुकी है.

कतरीसराय से शुरू होकर नवादा पहुंचा ठग गिरोह

वर्ष 2014 में नालंदा के तत्कालीन एसपी निशांत तिवारी कतरीसराय में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर लगभग सौ की संख्या में ठग गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजे थे. छापेमारी दल ने सैकड़ों मोबाइल व लाखों रुपये नकद के साथ-साथ कई आपत्तिजनक कागजात को भी बरामद किया गया था. नालंदा एसपी के डर से यह धंधा वारिसलीगंज व शाहपुर ओपी क्षेत्र के कई गांव में ट्रायल के रूप में शुरू किया गया था. जो आज कुकुरमुत्ते की तरह फैल गया है. ठग गिरोह के सदस्यों ने एक अजूबा तरीका निकाला है. इस नये तरीके में घर बैठे नौकरी पाओ का विभिन्न बेसकीमती पत्रिका में विज्ञापन छपवा कर ठगने का काम शुरू किया. इसमें फंसने वाले शिक्षित बेरोजगार युवकों से नौकरी का ज्वायनिंग लेटर भेजने के पहले अपने बैंक खाता में सिक्यूरिटी मनी के रूप में राशि मंगवाया जाता है.

अपना रहे कई हथकंडे, सोशल मीिडया को भी बनाया ठगी का माध्यम

नये-नये हथकंडों में अब सोशल मीडिया को भी ठगी का माध्यम बना लिया गया है. जिसे जैसा मौका मिलता है ठगी का शिकार बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा. ऐसे लोगों को पुलिस का भी अब डर नहीं रहा. ठग गिरोह के सदस्य पहले लोगों के मोबाइल पर इनाम पाने की सूचना देते हैं. इसके बाद अपना बैंक खाता का नंबर भी उन्हें देते है. जिस पर वाहन का रजिस्ट्रेशन तथा अन्य कागजात बनाने के नाम पर हजारों रुपये दिये गये खाता नंबर पर भेजने की बात कहता है. सस्ते में लग्जरी वाहन पाने की झांसा में आकर उनके खातों पर बिना समय गंवाये मांगी गयी राशि भेज देते है. जैसे ही उनके खाते में राशि पहुंचता है, वैसे ही ठग गिरोह के सदस्य वारिसलीगंज, नवादा, कादिरगंज, हिसुआ, बिहारशरीफ स्थित एसबीआई, पीएनबी व यूनियन बैंक के एटीएम से राशि निकासी कर लेते हैं. इसके बाद राशि भेजने वाले के मोबाइल पर पुनः फोन कर बताया जाता है कि आपके वाहन का सभी कागजात तैयार हो गया है. आपके घर तक वाहन भेजने के लिए पेट्रोल व रास्ते का खर्च भेजने की बात कह हजारों रुपये की मांग फिर से करता है. पुनः बैंक खाता पर राशि आते ही उसे एटीएम से निकासी कर लिया जाता है. लेकिन जिस मोबाइल नंबर से उन्हें चूना लगाया गया वह मोबाइल नंबर बंद हो जाता है. तब लोग अपने आपको ठगा महसूस करते हुए थानों का शरण लेकर प्राथमिकी दर्ज कराते हैं.

posted by ashish jha

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