बिहार : गैराज मिस्त्री जुम्मन ने बनाया स्वचालित रेल फाटक, अफसरों को पसंद आया मॉडल, भेजेंगे लखनऊ
Updated at : 30 Mar 2018 9:22 AM (IST)
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नवादा नगर : गैराज मिस्त्री अवधेश कुमार उर्फ जुम्मन मिस्त्री द्वारा बनाये गये स्वचालित रेल फाटक को देख कर ईस्ट सेंट्रल रेलवे दानापुर के वरीय मंडल संरक्षा अधिकारी एमके तिवारी, सेफ्टी काउंसेलर दानापुर मंडल अशोक कुमार व एके सिन्हा तथा किऊल-गया सेक्शन के एके सुमन के मुंह से तारीफ के शब्द निकलते रहे. अधिकारियों ने […]
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नवादा नगर : गैराज मिस्त्री अवधेश कुमार उर्फ जुम्मन मिस्त्री द्वारा बनाये गये स्वचालित रेल फाटक को देख कर ईस्ट सेंट्रल रेलवे दानापुर के वरीय मंडल संरक्षा अधिकारी एमके तिवारी, सेफ्टी काउंसेलर दानापुर मंडल अशोक कुमार व एके सिन्हा तथा किऊल-गया सेक्शन के एके सुमन के मुंह से तारीफ के शब्द निकलते रहे.
अधिकारियों ने कहा कि डिजाइन काफी प्रभावित करनेवाली है. इसका सही से प्रोजेक्ट तैयार कर पारित कराने के लिए रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्स ऑर्गेनाइजेशन, लखनऊ भेजा जायेगा. नवादा के गोनावां गांव के जुम्मन बाइक मेकैनिक हैं. वारिसलीगंज के पास सफीगंज रेल हादसे के बाद परेशान गैराज मिस्त्री जुम्मन ने रेलवे सुरक्षा के लिए मानवरहित ऑटोमेटिक रेल फाटक बनाया है. कम लागत में मानवरहित इस स्वचालित रेल फाटक का मॉडल निश्चित ही रेल विभाग के लिए लाभदायक साबित हो सकता है.
गुरुवार को रेलवे द्वारा दिये गये समय के अनुसार जुम्मन ने आईटीआई के मैदान में अपने स्वचालित रेल फाटक के मॉडल का प्रेजेंटेशन कर दिखाया. वरीय मंडल सुरक्षा अधिकारी एमके तिवारी ने कहा कि खुद के खर्च से जुम्मन ने यह मॉडल बनाया है. इसमें आम लोगों की सुरक्षा व रेलवे के हित को ध्यान में रखा गया है. मॉडल का काम करता वीडियो तथा प्रोजेक्ट तैयार करवा कर इसे लखनऊ भेजा जायेगा.
70 हजार खर्च कर बनाया मॉडल : 16 दिसंबर, 2014 को वारिसलीगंज स्टेशन के पास सफीगंज में रेलवे क्रॉसिंग के पास बरातियों से भरी गाड़ी के साथ हुए ट्रेन हादसे ने जुम्मन मिस्त्री को अंदर से तोड़ कर रख दिया था.
इस घटना में छह बरातियों की मौत हुई थी तथा छह से अधिक लोग घायल हुए थे. इस घटना के बाद इस समस्या का हल ढूंढ़ने के लिए बेचैन हो गये. बाद में मैंने अपने भांजा प्रमोद के साथ मिल कर रेलवे सुरक्षा के लिए स्वचालित रेलवे फाटक का मॉडल बनाया. जुम्मन कहते हैं कि मॉडल को बनाने में लगभग 70 हजार रुपये तथा लगभग छह महीने का समय लगा है. शुरू में बनाये गये सुरक्षा मानकों में लगातार सुधार करते हुए जुम्मन मिस्त्री ने इसका पहला प्रदर्शन दिसंबर, 2017 में किया था.
नये-नये प्रयोग करने में माहिर है अवधेश
अपनी कारीगरी से जुम्मन मिस्त्री ने सबको प्रभावित किया है. मूलत: वारिसलीगंज के सोनवर्षा गांव के रहनेवाले अवधेश उर्फ जुम्मन वर्तमान में नवादा के गोनवां में गैराज चलाते हैं. उनका यह गैराज इनकी प्रयोगशाला भी है, जहां वह अपनी रोजी-रोटी के लिए बाइक या अन्य गाड़ियों की मरम्मत करते हैं.
गैराज में जुम्मन नयी खोज के तहत पानी की टंकी भरते ही महज 500 सौ की लागत में ऑटोमेटिक मोटर बंद मशीन, ऑटो जल सुरक्षा कवच, खेत पटानेवाले मोटर से टैंपो, डीजल इंजन का प्रयोग करके बुलेट मोटरसाइकिल आदि बनाने का कारनामा पहले ही कर चुके हैं.
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