बिहारशरीफ : कभी नौकरी को तरसते थे, आज लाखों का है व्यवसाय, कई लोगों को दे रहे हैं रोजगार

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अरुण कुमार 10 एकड़ में मछली बीज की हैचरी लगा कर गौरी शंकर दे रहे कई लोगों को रोजगार बिहारशरीफ : पढ़ाई के बाद गौरी शंकर ने नौकरी के लिए काफी प्रयास किया. लेकिन, कभी परीक्षा में तो कभी इंटरव्यू में फेल हो जाते. काफी प्रयास किया, पर नौकरी नहीं मिली. इससे निराशा भी हुई. […]

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अरुण कुमार
10 एकड़ में मछली बीज की हैचरी लगा कर गौरी शंकर दे रहे कई लोगों को रोजगार
बिहारशरीफ : पढ़ाई के बाद गौरी शंकर ने नौकरी के लिए काफी प्रयास किया. लेकिन, कभी परीक्षा में तो कभी इंटरव्यू में फेल हो जाते. काफी प्रयास किया, पर नौकरी नहीं मिली. इससे निराशा भी हुई. इसके बाद दोस्तों की सलाह पर व्यवसाय करने की ठानी. इसमें परेशानियां भी आयीं, मगर पक्के हौसले के बलबूते बाधाओं को पार कर गौरी शंकर सिंह ने अपने गांव कुड़वापर में ही मछली बीज की हैचरी खोली. मत्स्य विभाग की सहायता से उन्होंने 10 एकड़ जमीन में हैचरी बना कर मत्स्य बीज का उत्पादन शुरू किया.
आज गौरी शंकर सिंह लाखों का व्यवसाय करने के साथ कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. गौरी शंकर की हैचरी में विदेशी लेवूस (अमेरिकन रेहू), ग्रास कार्प व सिल्वर, जबकि इंडियन मछलियों में रेहू, नैनी, कतला, बाटा आदि मछलियों के बीज तैयार किये जा रहे हैं.
10 एकड़ भूखंड में बनायी हैचरी : धान व गेहूं का उत्पादन होनेवाली जमीन पर मछली बीज का उत्पादन हो रहा है. 2015 में 15 लाख रुपये से 10 एकड़ जमीन में हैचरी का निर्माण कराया गया. इसके लिए मत्स्य विभाग से 50% का अनुदान मिला. बाद में विभाग ने इसे बढ़ा कर 22 लाख रुपये कर दिया. मछलियों के स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए उन्होंने कान्ट्रैक्ट पर डॉक्टर भी नियुक्त कर रखे हैं.
दोस्त ने दी थी सलाह
नौकरी के लिए भाग-दौड़ करने के दौरान एक दोस्त की सलाह पर मछली बीज उत्पादन के व्यवसाय से जुड़ा. मत्स्य विभाग से संपर्क किया और 10 एकड़ में हैचरी तैयार कर इस व्यवसाय को चलाने लगा. घर बैठे ही बिक्री हो जाती है, मुनाफा भी अच्छा है.
गौरी शंकर सिंह, संचालक, एसएस हैचरी
क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में मत्स्यपालन व मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए विभाग 50% अनुदान भी दे रहा है, ताकि लोग प्रोत्साहित होकर इसे व्यवसाय के रूप में अपनाएं. कई लोगों ने मत्स्यपालन व मत्स्य बीज पालन में रुचि दिखायी है.
उमेश रंजन, जिला मत्स्य पदाधिकारी, नालंदा

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