शौचालय दिवस पर नहीं खुले कई स्कूलों के ताले

Updated at : 20 Nov 2017 12:36 AM (IST)
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शौचालय दिवस पर नहीं खुले कई स्कूलों के ताले

डीईओ ने ऐसे स्कूलों के एचएम से मांगा स्पष्टीकरण बिहारशरीफ : विश्व शौचालय दिवस के मौके पर रविवार को जिले के सभी मध्य विद्यालयों तथा माध्यमिक विद्यालयों को खुला रखने का सरकारी फरमान जिले में बेअसर साबित हुआ. विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर विद्यालयों को प्रात: आठ से 11:00 बजे तक खोलकर बच्चों के […]

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डीईओ ने ऐसे स्कूलों के एचएम से मांगा स्पष्टीकरण
बिहारशरीफ : विश्व शौचालय दिवस के मौके पर रविवार को जिले के सभी मध्य विद्यालयों तथा माध्यमिक विद्यालयों को खुला रखने का सरकारी फरमान जिले में बेअसर साबित हुआ. विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर विद्यालयों को प्रात: आठ से 11:00 बजे तक खोलकर बच्चों के बीच पेंटिंग प्रतियोगिता करायी जानी थी.
शिक्षा विभाग द्वारा आम लोगों में बच्चों के माध्यम से शौचालय के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
विभागीय निर्देशों की अवहेलना करते हुए जिले के अधिकांश विद्यालयों द्वारा सिर्फ खानापूर्ति की गयी है. कई विद्यालयों के ताले तक नहीं खुले. कुछ मध्य विद्यालयों में बच्चों के साथ-साथ शिक्षक भी मौजूद रहे, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों ने तो खानापूर्ति भी जरूरी नहीं समझी. स्थानीय नालंदा कॉलेजिएट हाईस्कूल, बड़ी पहाड़ी हाईस्कूल आदि तो 11 बजे के पूर्व ही बंद पाये गये. वहीं एसएस बालिका प्लस टू विद्यालय में मात्र चार छात्राएं पेंटिंग में शामिल हुईं. जिले के अधिकांश उच्च विद्यालयों की स्थिति कमोबेश यही रही. रविवार होने के कारण शिक्षकों ने विभागीय निर्देशों को महत्व नहीं दिया.
शहर के मध्य विद्यालय बड़ी पहाड़ी, कन्या मध्य विद्यालय छोटी पहाड़ी आदि में विद्यार्थियों की अच्छी उपस्थिति नजर आयी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश मध्य विद्यालयों के ताले तक नहीं खुले. कई शिक्षकों ने बताया कि आनन-फानन में शनिवार को कार्यक्रम आयोजित करने की सूचना मिलने के कारण बच्चों तक यह जानकारी नहीं पहुंच सकी. विद्यालय शनिवार को मध्यांतर तक ही संचालित होते हैं. ऐसे में बच्चों को रविवार की सुबह आठ बजे विद्यालय में उपस्थित करना आसान नहीं था.
शौचालय दिवस के नाम पर खानापूर्ति : विभागीय निर्देशानुसार स्कूलों को एक-एक सर्वश्रेष्ठ पेंटिंग प्रखंड शिक्षा कार्यालय में जमा कराना है. ऐसे में विद्यालयों द्वारा खानापूर्ति करने के लिए दिखा देना कोई बड़ा काम नहीं है. कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी तथा जागरूकता बढ़ाने को लेकर कोई लेखा-जोखा देने का प्रावधान नहीं होने के कारण प्रधानाध्यापकों के लिए रविवार को छुट्टी मनाना आसान साबित हुआ.
क्या कहते हैं अधिकारी
”रविवार को जिले के चार विद्यालयों का निरीक्षण किया गया जहां कार्यक्रम संचालित हो रहे थे. यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्देशों की अवहेलना की गयी है तो विद्यालय के प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण की मांग की जायेगी.”
डॉ विमल ठाकुर, जिला शिक्षा पदाधिकारी, नालंदा
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