बोरी के पैसे के लिए टकटकी लगाये किसान

Updated at : 01 Jul 2019 7:37 AM (IST)
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बोरी के पैसे के लिए टकटकी लगाये किसान

प्रभात कुमार, मुजफ्फरपुर : किसानों को धान बेचे छह महीने बीत गये. लेकिन, बाेरी के पैसे का भुगतान नहीं हुआ है. इसके लिए किसान पैक्स अध्यक्ष के पास दौड़ लगाने को मजबूर हैं. सरकारी दर पर धान क्रय की निर्धारित तिथि 15 नवंबर से 31 मार्च तक होती है. इस अवधि में इस वर्ष भी […]

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प्रभात कुमार, मुजफ्फरपुर : किसानों को धान बेचे छह महीने बीत गये. लेकिन, बाेरी के पैसे का भुगतान नहीं हुआ है. इसके लिए किसान पैक्स अध्यक्ष के पास दौड़ लगाने को मजबूर हैं. सरकारी दर पर धान क्रय की निर्धारित तिथि 15 नवंबर से 31 मार्च तक होती है. इस अवधि में इस वर्ष भी धान खरीदे गये. लेकिन, किसानों को बोरी के रुपये नहीं मिले.

सरकार किसानों को प्रति क्विंटल धान की खरीद पर 25 रुपये बोरी की राशि तय की थीं. 1750 रुपये प्रति क्विंटल धान कै पैसे किसानों को मिल चुका है. हर वर्ष पैक्स अध्यक्ष किसानों से ही बोरी खरीदवाते हैं, जिसमें किसानों को एक बड़ी राशि खर्च होती है. एक क्विंटल धान करीब ढाई बोरी में रखा जाता है. ऐ
से बोरी की कीमत बाजार में 19-20 रुपये होते हैं. किसानों को एक क्विंटल धान देने में 50 रुपये खर्च होते हैं. अगर सरकार 25 रुपये देती है, तो इससे किसानों का आधा भरपायी होती है. लेकिन, कोई भी पैक्स अध्यक्ष अभी तक यह राशि किसानों के खाते में नहीं ट्रांसफार्मर करवाया है. बोचहां लोहसरी के किसान शत्रुध्न मिश्र, कामेश्वर मिश्र व अविनाश प्रियदर्शी का कहना है कि बोरा के पैसा के लिए किसानों को काफी परेशान होना पड़ रहा है.
धान खरीद में गोलमाल
जब धान बिक्री करने की जरूरत होती है. उस समय तक सरकारी स्तर पर धान की खरीदारी नहीं हो पाती है. ऐसे में किसानों को दलाल के माध्यम से धान बेचना मजबूरी हो जाती है. जिस कारण किसानों के रकम का तौल कम तो होता ही है. साथ ही औने-पौने दाम में धान बेचना मजबूरी होता है. इस बार सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1750 रुपये निर्धारित की गयी थी. बावजूद निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सका था. हैरत की बात तो तब होती है. जब कई पैक्स अध्यक्ष अधिकारी का हीला हवाली देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते है.
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