बालू के अभाव में मुंगेर के कई प्रोजेक्ट पर लगी ब्रेक
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मुंगेर : मुंगेर पत्थर एवं बालू के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर था. लेकिन पहले पत्थर उद्योग बंद हुआ और अब बालू उत्खनन एवं ढुलाई पर रोक लगा दिया गया है. जिसमें कारण न तो सुलभ रुप से गिट्टी मिल रही और न ही बालू. फलत: मुंगेर में न सिर्फ निजी क्षेत्रों में चल […]
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मुंगेर : मुंगेर पत्थर एवं बालू के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर था. लेकिन पहले पत्थर उद्योग बंद हुआ और अब बालू उत्खनन एवं ढुलाई पर रोक लगा दिया गया है. जिसमें कारण न तो सुलभ रुप से गिट्टी मिल रही और न ही बालू. फलत: मुंगेर में न सिर्फ निजी क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्य ठप है बल्कि कई सरकारी योजना पर भी ब्रेक लग गया है. यहां तक कि मुंगेर किला परिसर में बनने वाले आयुक्त व पुलिस उपमहानिरीक्षक के आवास का निर्माण कार्य भी रूक गया है.
रूके कई सरकारी प्रोजेक्ट
बालू के अभाव में भवन निर्माण का कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गया है. शहर में ऐसे कई मकान दिख जायेंगे जो बालू के अभाव में आधा-अधूरा ही रुका हुआ है. भवन निर्माण विभाग से निर्माणाधीन डीआइजी आवास, प्रमंडलीय आयुक्त आवास, पथ निर्माण विभाग का सर्किल भवन निर्माण सहित म्यूजियम एवं सिविल कोर्ट में करोड़ों की लागत से भवन का निर्माण किया जा रहा था. बालू नहीं मिलने के कारण सभी कार्य ठप हो गये हैं. इधर आयुक्त कार्यालय परिसर में बन रहे क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार कार्यालय एवं खड़गपुर में बन रहे पॉलिटेक्निक कॉलेज के निर्माण कार्य को रोक दिया गया है.
अब बालू की हो रही कालाबाजारी
मुंगेर के असरगंज, तारापुर एवं संग्रामपुर की नदियों से बड़े पैमाने पर बालू उत्खनन व ढुलाई होती थी. जो मुंगेर एवं दूसरे जिले भेजे जाते थे. मुंगेर में उत्खनन होने कारण यहां बालू की कीमत पहले प्रति ट्रेलर 2 हजार से 24 सौ रुपये था. लेकिन बालू खनन एवं ढुलाई पर रोक लगने के कारण मुंगेर में बालू की किल्लत होने लगी. अब प्रति ट्रेलर बालू 3 से 4 हजार में उपलब्ध हो रही है. जबकि बालू की कालाबाजारी भी बड़े पैमाने पर हो रहा है.
बालू की किल्लत का साइड इफेक्ट
बालू की किल्लत के कारण इसका साइड इफेक्ट भी काफी है. भवन निर्माण काय ठप रहने से भवन निर्माण के उपयोग में आने वाले सामग्रियों की बिक्री कम हो गयी. ईंट, सरिया, सीमेंट, चिप्स, टाइल्स, मार्बल का डिमांड भी घटा है. मजदूरों के समक्ष मजदूरी की भी समस्या उत्पन्न हो गयी है. वहीं बालू उठाव व उत्खनन कार्य से जुड़े लोग बेरोजगार हो गये हैं. माना जाता है कि कृषि के बाद निर्माण सेक्टर रोजगार उपलब्ध कराने का मुख्य क्षेत्र है. जिसमें बालू व गिट्टी का उपयोग होता है. लेकिन दोनों कार्य मुंगेर में ठप है. जिसके कारण लोग बेरोजगारी की मार झेलने को विवश है.
आज हो सकता है निर्णय
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश में बालू खनन एवं उठाव पर रोक लगा दी है. ट्रिब्यूनल ने बिहार को पर्यावरण मामले में बने कानून के उल्लंघन का दोषी पाया है. ट्रिब्यूनल की कोलकाता पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बालू खनन के मामले में बिहार में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट 2010 की धारा 14 का उल्लंघन माना है. जिसके कारण उस पर रोक लगा दी गयी है. जिस पर निर्णय आज होना है. जिसका लोगों को इंतजार है.
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