घोरघट पुल : पहले जमीन का लोचा, अब रुपये के कारण अटका जमीन अधिग्रहण

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुंगेर : भागलपुर व मुंगेर के बीच एनएच 80 को जोड़ने वाले घोरघट पुल के निर्माण से संकट का बादल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. 13 वर्षों से अधर में लटके इस पुल निर्माण कार्य को इस बार एनएचएआई द्वारा रुपये नहीं मिलने के कारण ब्रेक लगा है. क्योंकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुल निर्माण कार्य में एप्रोच पथ बाधक बन गया है. इसके लिए 12.3 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण होना है. लेकिन डिमांड के बावजूद एनएचएआई जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को राशि उपलब्ध नहीं करा रहा.

एनएचएआई के कारण निर्माण कार्य अटका : घोरघट बेली ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद 13 वर्षों से यहां राष्ट्रीय उच्च पथ 80 का अस्तित्व समाप्त है. जिसे अस्तित्व में लाने के लिए सरकार ने घोरघट सेतु निर्माण की योजना बनायी और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाते हुए पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ किया. पुल के निर्माण के दौरान जमीन अधिग्रहण की समस्या कई वर्षों तक न्यायालय में लंबित रहा. इस बीच कई बार काम बंद हुआ और प्रारंभ हुआ. मेटेरियल मूल्य भी दोगुना हो गया.
आखिरकार जिला प्रशासन ने एनएचएआई नीति के तहत जमीन अधिग्रहण करने का निर्णय लिया और घोरघट के एप्रोच पथ का निर्माण कराने के लिए 25 रैयतों का 12.3 डिसमिल जमीन अधिग्रहण करने के लिए एनएचएआई को 87 लाख 45 हजार 257 रुपये का डिमांड भेजा. ताकि रुपये आते ही एप्रोच पथ निर्माण में अधिगृहीत भूमि मालिकों को राशि भुगतान कर काम में तेजी लाया जा सके. लेकिन एनएचएआई द्वारा पैसा ही अब तक नहीं भेजा गया है.
एनएचएआई से जिला भू-अर्जन को पैसा उपलब्ध होते ही रैयतों के बीच मुआवजे का वितरण कर जमीन अधिग्रहण प्रारंभ कर दिया जायेगा. इस दौरान 14 रैयतों के मकानों एवं दुकानों को भी तोड़कर हटाया जायेगा. जब तक रैयतों को पैसा नहीं मिलेगा. तब तक निर्माण कार्य पर ब्रेक लगा रहेगा.
13 वर्षों से अटका है घोरघट पुल का निर्माण कार्य : क्षतिग्रस्त घोरघट पुल के समानांतर एक नये पुल के निर्माण को लेकर तेज गति से कार्य प्रारंभ हुआ. इसके लिए एनएचएआई ने 66 डिसमिल जमीन अधिग्रहण करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया था. जिला प्रशासन ने एनएचएआई को 66 डिसमिल जमीन अधिग्रहण कर सौंप दिया. इसके बाद एनएचएआई ने पुन: 12.03 डिसमिल जमीन अधिग्रहण करने के लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा.
क्योंकि एप्रोच पथ के लिए इतने जमीन का जरूरत है. जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए जमीन अधिग्रहण का प्रक्रिया शुरू किया. लेकिन नरेश चौधरी ने जमीन अधिग्रहण नहीं करने दिया और मामला हाई कोर्ट ले गया. जहां से तत्काल स्टे लगा दिया था. अब यह मामला भी न्यायालय से सॉट आउट हो गया. लेकिन निर्माण कार्य अब भी अटका हुआ है.
कहते हैं अधिकारी
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जमीन के लिए 87 लाख 45 हजार 257 रुपये का डिमांड एनएचएआई को भेजा गया है. राशि मिलते ही घोरघट पुल निर्माण एप्रोच पथ के अधिगृहीत भू-मालिकों राशि को उपलब्ध करा दी जायेगी. जमीन अधिग्रहण का अब कोई पेंच नहीं है.
12 जुलाई 2006 से बड़े वाहनों के प्रवेश पर है रोक
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 6 जुलाई 2006 को सड़क मार्ग से श्रावणी मेला का उद‍्घाटन करने सुल्तानगंज जा रहे थे. उनके काफिले से ही मनी नदी पर बना घोरघट पुल धंस गया था. राज्य सरकार ने एनएच 80 के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए 2 करोड़ 65 लाख की लागत से बेली ब्रिज का निर्माण कराया. लेकिन कुछ महीने के बाद ही वह भी क्षतिग्रस्त हो गया.
इसके बाद बेली ब्रिज से बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दिया गया. मई 2012 में नया पुल का निर्माण कार्य चड्ढा एंड चड्ढा कंपनी ने शुरू किया. जिसे अक्टूबर 2013 तक पूरा करना था. पुल निर्माण का स्टिमेट 9 करोड़ 74 लाख रुपये का था. जबकि पुल की लंबाई 55 मीटर है. जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है.
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