पढ़ाई की जगह परची बांटते हैं छात्र

Updated at :23 Feb 2017 1:58 AM
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पढ़ाई की जगह परची बांटते हैं छात्र

प्रलोभन. स्कूल में हाजिरी लगवा बाहर निकल जाते हैं कुछ छात्र मधुबनी : जिले में सरकारी विद्यालयों में पठन – पाठन व विधि व्यवस्था चौपट होकर रह गयी है. आलम यह है कि जिस बच्चे को अभिभावक सरकारी विद्यालयों में पढ़ने के लिये भेजते हैं उस बच्चे से निजी शिक्षण संस्थान अपने संस्था के प्रचार […]

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प्रलोभन. स्कूल में हाजिरी लगवा बाहर निकल जाते हैं कुछ छात्र

मधुबनी : जिले में सरकारी विद्यालयों में पठन – पाठन व विधि व्यवस्था चौपट होकर रह गयी है. आलम यह है कि जिस बच्चे को अभिभावक सरकारी विद्यालयों में पढ़ने के लिये भेजते हैं उस बच्चे से निजी शिक्षण संस्थान अपने संस्था के प्रचार प्रसार के लिये पर्ची बंटवाते हैं. छात्र पढ़ाई छोड़ इसलिए पर्ची बांटने लगते हैं कि शिक्षण संस्थानों के द्वारा उसे पर्ची बांटने के लिये बीस रुपये मिलता है. बाद में जानकारी होने पर विद्यालय प्रबंधन छात्रों को अलग से सजा देता है. धूप में मुर्गा बना कर छात्र को सजा दी जाती है. यह मामला आर के कॉलेज के समीप राजकीय सप्ता शहरी मध्य विद्यालय का है.
क्या है मामला . दिन के करीब 11 बज रहे थे. राजकीय सप्ता शहरी मध्य विद्यालय में बच्चे अपने अपने कक्षा में बैठे पढ़ाई कर रहे थे. पर इसी विद्यालय के पांच छात्र पढ़ाई छोड़ आर के कॉलेज गेट के सामने सड़क किनारे हाथ में पर्ची लिये आते जाते हुए लोगों को पर्ची थमा रहे थे. पर्ची एंप्लीफायर क्लासेज नामक एक निजी शिक्षण संस्थान का था. समीप ही इस संस्थान का एक कर्मी भी खड़ा था. पांचों छात्र को इस कर्मी ने पर्ची बांटने के लिये 20- 20 रुपये देने का वायदा किया था.
छात्र मो. नाजिम, मो. फैयाज, मो. शाजिद, आजाद, नौशाद बताता है कि वह विद्यालय परिसर से बाहर घूमने निकला था कि इसी दौरान उसे विकास कुमार नामक एक युवक मिला. उसने ही इन छात्रों को बीस बीस रुपये देने की बात कही थी और संस्थान का पर्ची थमा दिया. वह पर्ची बांटने लगा. इस बात की जानकारी जब विद्यालय प्रशासन को दी गयी तो पहले तो प्रधानाचार्य ने ऐसे किसी भी मामले को ही सिरे से खारिज कर दिया. पर बाद में संबंधित पांचों छात्र उसी विद्यालय के विभिन्न वर्गो के निकले, सारा दोष छात्रों के उपर देते हुए सजा मुकर्रर कर दी गयी.
नियम का उल्लंघन. श्रम अधीक्षक रिपु सूदन मिश्रा ने बताया है कि मामले की जांच कर संबंधित संस्थान के उपर प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. यह ना सिर्फ बाल श्रम अधिनियम के तहत मामला बनता है, बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भी उल्लंघन का मामला है.
मामला सामने आया, तो छात्रों को दी सजा
भले ही छात्रों की इसमें गलती थी. पर विद्यालय प्रशासन की लापरवाही भी इसमें सामने आती है. विद्यालय संचालन के समय दर्जनों छात्र आये दिन बाहर निकल जाते हैं और विद्यालय प्रशासन को भनक तक नहीं लगता. बुधवार को भी यही हुआ. पांच छात्र कक्षा से ना सिर्फ बाहर निकल गये बल्कि मजदूरी भी करने लगे,
पर विद्यालय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी. जब बात का पता चला तो सजा भी इन छात्रों को ही दी गयी. वर्ग शिक्षक ने छात्रों को परिसर में ही मुर्गा बना दिया और करीब आधे घंटे तक धूप में मुर्गा बनाये रखा. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि उन्हें मालूम नहीं था कि छात्र कहां गये है.
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