कैशलेस लेन-देन का चलन बढ़ा

Updated at :10 Dec 2016 7:35 AM
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कैशलेस लेन-देन का चलन बढ़ा

मधुबनी : नोटबंदी के ठीक एक महीना के बाद देश में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की सरकार ने डिजिटल पेमेंट पर कई तरह का छूट का एलान किया है. नोटबंदी के कारण हो रही परेशानी को लेकर जिले में व्यवसायियों में कैशलेस लेन देन पर भरोसा जताया है. हालांकि नोटबंदी से […]

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मधुबनी : नोटबंदी के ठीक एक महीना के बाद देश में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की सरकार ने डिजिटल पेमेंट पर कई तरह का छूट का एलान किया है. नोटबंदी के कारण हो रही परेशानी को लेकर जिले में व्यवसायियों में कैशलेस लेन देन पर भरोसा जताया है.
हालांकि नोटबंदी से पहले भी जिले में करीब 265 विभिन्न दुकानों में पाउस मशीन लगाया जा चुका था. पर नोटबंदी के बाद व्यवसाइयों में इस मशीन की मांग बढ़ी है. बैंक सूत्रों की माने तो पिछले पंद्रह दिनों के अंदर लगभग 125 मशीनों की डिमांड व्यवसायियों के द्वारा की गयी है. जिसमें से 50 से अधिक को यह मशीन उपलब्ध करा दी गई है. वहीं इंटरनेट बैंकिंग की ओर भी लोगों का झुकाव बढ़ा है. हालांकि अब तक सरकारी विभागों में अब तक कैश लेश लेन देन की शुरुआत नहीं हो सकी है. शुक्रवार को भी नगर परिषद, बिजली विभाग, निबंधन कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में नकद लेन देन किया गया.
पेट्रोल पंप पर हो रहा कैश लेश लेन देन
ज्यादातर लोग अब इलेक्ट्रोनिक लेनदेन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. पेट्रोल पंप पर तो इसका सबसे अधिक असर पड़ा है. नोटबंदी से पहले जहां प्रतिदिन करीब 50 ग्राहक डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लेनदेन करते थे. अब वहीं प्रत्येक पेट्रोल पंप पर दो सौ से ढाई सौ आदमी इस कार्ड का उपयोग कर रहे हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी परेशानी बरकरार है. पर अभी भी लोग बैंक खाता से सीधे लेनदेन पर सीधे विश्वास कर रहे हैं. ग्रामीणों की मानें तो हमलोग को एटीएम कार्ड उपलब्ध कराया गया पर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम मशीन ही नहीं है. जिले के टाल प्लाजा, पेट्रोल पंप एवं कुछ व्यवसायी द्वारा ही इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट ली जा रही है. अन्य विभागों में लोगों द्वारा सिर्फ चेक द्वारा या खाता में भुगतान लिया जाता है. विभागों की मानें तो अभी तक कैशलेस पेमेंट के कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. चेक द्वारा या खाता में भुगतान नोटबंदी से पहले से ही हो रहा है.
आसानी से कर सकते हैं लेनदेन
भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि जिले में व्यवसायियों द्वारा पाउस मशीन की मांग बढ़ी है. टाल प्लाजा एवं पेट्रोल पंप पर इलेक्ट्रॉनिक मशीन लगा दी गयी है. वहीं करीब 125 व्यवसायियों ने पास मशीन की मांग की है. जिसमें से 50 लोगों को मशीन उपलब्ध करा दी गई है. जबकि नेट बैंकिंग के लिए सभी शाखाओं को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं. उन्होंने बताया कि ग्राहक एसबीआई बॉडी एप्स का उपयोग कर आसानी से इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन कर सकते हैं.
बढ़ा है रुझान . जिले में इलेक्ट्रानिक भुगतान की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है. जहां-जहां पीओएस मशीन लगाएं गये है. वहां अब डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लोग भुगतान करना शुरू कर दिया है. नोट बंदी के बाद जिले में 125 पीओएस मशीन का डिमांड अब तक हुई है. 50 मशीन लगाएं जा चुके हैं.
गांव में परेशानी बरकरार. नोटबंदी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की परेशानी अब भी कम नहीं हो रही है. इन क्षेत्रों में बैंक की शाखाओं की कमी एवं एटीएम मशीन नहीं लगे रहने के कारण लोगों की परेशानी अब भी बरकरार है. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों द्वारा बैंकों में खाता खोलकर एटीएम कार्ड उपलब्ध करायी गई है. पर एटीएम कार्ड से निकासी के लिए उन्हें शहर की ओर जाना पड़ता है. दो हजार तक की निकासी के लिए उनको पूरा दिन लग जाता है.
क्या है पीओएस मशीन
प्वाईंट ऑफ सेल (पॉश)जहां आप लेन-देन करते है बैंक द्वारा वहां एक छोटी सी मशीन उपलब्ध रहती है. कोई भी व्यवसायी पीओएस मशीन लगवा सकता है. इसके लिए बैंक में उसका करेंट अकाउंट होना जरूरी है. जिसमें न्यूनतम पांच हजार खाता में रहना जरूरी है. उस व्यवसाय को पीओएस मशीन बैंक देती है. जिसके एवज में ढ़ाई सौ रुपया प्रति महीना रेंट के रूप में लिया जाता है. इस मशीन में आप अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लेन-देन कर सकते हैं. ग्राहक अपने कार्ड को मशीन में स्वाइप कर बिल का भुगतान कर सकते हैं.
एसबीआइ क्षेत्रीय प्रबंधक अजित कुमार पोद्दार ने बताया कि दो हजार तक की खरीदारी पर 0.75 प्रतिशत सरचार्ज एवं सर्विस टैक्स लिया जाता है. वहीं दो हजार की उपर के भुगतान पर एक प्रतिशत सरचार्ज प्लस सर्विस टैक्स ग्राहक को देना होता है. पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता है.
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