बैठने व पानी की व्यवस्था नहीं
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :09 Dec 2016 5:16 AM
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गड़बड़ी. सरकारी कार्यालयों में लोक संवेदना अभियान की उड़ रही धज्जियां मधुबनी : जिले में लोक संवेदना अभियान की धज्जिया उड़ाई जा रही है. इसके तहत आने वाले नियमों का अनुपालन किसी भी कार्यालय में देखने को नहीं मिल रहा है. बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन द्वारा वर्ष 2012 में लोक संवेदना अभियान की शुरुआत की […]
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गड़बड़ी. सरकारी कार्यालयों में लोक संवेदना अभियान की उड़ रही धज्जियां
मधुबनी : जिले में लोक संवेदना अभियान की धज्जिया उड़ाई जा रही है. इसके तहत आने वाले नियमों का अनुपालन किसी भी कार्यालय में देखने को नहीं मिल रहा है. बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन द्वारा वर्ष 2012 में लोक संवेदना अभियान की शुरुआत की गई थी. इसके तहत सरकारी कार्यालय में आने वाले लोगों, जन प्रतिनिधियों के साथ कार्यालय कर्मियों एवं पदाधिकारी द्वारा उचित व्यवहार करने, मान सम्मान साथ उन्हें बैठाकर उनकी समस्याओं को सुनने तथा नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया गया था.
पर प्रखंड स्तरीय कार्यालय की बात तो दूर जिला स्तरीय प्रमुख कार्यालयों में भी यह सुविधा नहीं है. लोक संवेदना को लेकर गत 26 नवंबर को राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह को वीडियो कांफ्रेंसिग कर जिला पदाधिकारी को लोक संवेदना के अनुपालन के लिए आवश्यक निर्देश भी दिये थे.
शौचालय में लगा है ताला . कहने को अनुमंडल कार्यालय एवं डीआरडीए एवं समाहरणालय परिसर में शौचालय बना है. पर इसमें हमेशा ही ताला लगा होता है. जिसे आम लोग उपयोग नहीं कर सकते हैं. ऐसे में दूर दराज से आने वाले लोगो को शौच करने में भारी परेशानी होती है. खासकर महिलाओं को फजीहत का सामना करना पड़ता है. गुरुवार को दिन में करीब 12 बज रहे थे. अनुमंडल कार्यालय के बगल में नया शौचालय बना है. पर इसमें ताला लगा हुआ था. लोग कोर्ट परिसर में बने नाला में खुले में मूत्र त्याग कर रहे थे. इसी प्रकार समाहरणालय में भी आम लोगों के लिये शौचालय नहीं है.
लोगों ने बताया कि यह शौचालय तो कभी भी आम लोगों के लिये खुलता ही नहीं इसी प्रकार जिला विकास अभिकरण, शिक्षा विभाग सहित अन्य कई सरकारी कार्यालयों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है. कार्यालयों में आने वाले लोगों को प्यास लगने की स्थिति में चापाकल ही एकमात्र विकल्प है जहां जाकर लोग किसी तरह अपनी प्यास बुझाते है.
समाहरणालय में नहीं है लोगों के बैठने की सुविधा
समाहरणालय में 42 विभिन्न विभाग संचालित होते हैं. हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोगों का आना जाना होता है. पर लोगों के बैठने तक की जगह नहीं है. लोग आते हैं घंटो खड़े होकर अपने काम कराने की कोशिश करते है. दूर दराज से आने वाले लोग स्थापना कार्यालय, आरटीपीएस कार्यालय, जिला समान्य शाखा, भू – अर्जन कार्यालय, विधि शाखा सहित अन्य कई कार्यालयों में ना तो कुर्सी की व्यवस्था है और ना ही किसी अन्य प्रकार की सुविधा आंगतुक के लिए है. खड़े खड़े बात करना उनकी मजबूरी है. यहां लोगों के पेयजल की भी सुविधा नहीं है. लोग या तो सीलबंद पानी पीते हैं या फिर बाहर जाकर पानी पीते हैं. कहने को एक चापाकल है. पर इसके पास इतनी गंदगी है कि लोग यहां पानी पीने की कोशिश तक नहीं करते हैं.
पूछा जायेगा स्पष्टीकरण
प्रखंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक लोक संवेदना अभियान के लिए खास निर्देश दिया गया है कि कार्यालय में आने वाले व्यक्तियों को उचित सम्मान के साथ व्यवहार किया जाये. अनुपालन नहीं करने वाले कार्यालय के वरीय पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा जाएगा.
गिरिवर दयाल सिंह, डीएम
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