अंग्रेज जमाने का बना पुल जर्जर

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अंग्रेज जमाने का बना पुल जर्जर-बनेगा चुनावी मुद्दा, नेता को देना होगा जवाब फोटो: 1परिचय: अकरहरघाट स्थित लकड़ी का पुल साहरघाट . प्रखंड क्षेत्र के इंडो-नेपाल सीमा स्थित अकरहरघाट गांव से एनएच-104 मुख्य पथ को जोड़ने वाली ग्रामीण पथ में एसएसबी कैंप से करीब 100 मीटर की दूरी पर अंग्रेज जमाने का बना पुल मौत […]

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अंग्रेज जमाने का बना पुल जर्जर-बनेगा चुनावी मुद्दा, नेता को देना होगा जवाब फोटो: 1परिचय: अकरहरघाट स्थित लकड़ी का पुल साहरघाट . प्रखंड क्षेत्र के इंडो-नेपाल सीमा स्थित अकरहरघाट गांव से एनएच-104 मुख्य पथ को जोड़ने वाली ग्रामीण पथ में एसएसबी कैंप से करीब 100 मीटर की दूरी पर अंग्रेज जमाने का बना पुल मौत को आमंत्रण दे रहा है. इस पुल से होकर गुजरते वक्त लोगों व वाहन चालकों की जान सांसत में फंसी हुई प्रतीत होती है. हर क्षेत्र में कुछ न कुछ विकास हुआ, लेकिन इस महत्वपूर्ण सड़क में बना लकड़ी का पुल आज भी अपनी दुर्दशा पर अपने आंसू बहाने को विवश है. बता दें कि सीमा पर होने वाली हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखे जाने के लिए पास में एसएसबी कैंप है. इनके जवानों पर तस्करी के अलावे कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पैनी नजर बनाये रखने की खासे जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इधर, पुल क्षतिग्रस्त होने से बाइक के अलावे कोई अन्य वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हैजानकारी के अनुसार उन्नीसवीं शताब्दी में अंग्रेजों ने पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के साथ बेहतर संबंध बनाये रखने के उद्देश्य से धौंस नदी से निकले नहर पर लकड़ी का पुल बनवाया था. दशकों पूर्व मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की गयी. आस-पड़ोस के गांवों में विकास के कई काम हुए. मोहल्लों की तसवीर भी बदली, लेकिन अगर नहीं बदली तो इस पुल की हालत. यह अधिकारियों के नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी घोर उपेक्षा का शिकार रहा है. स्थानीय निवासी ईश्वरदेव महतो, किशोरी कुशवाहा, शिक्षक जगदीश महतो, श्याम यादव, मुरारी भगत नागवंशी, निर्धन मंडल और रामबाबू महतो सहित अन्य लोगों ने कहा कि पुल के वजह से परेशानी तो हर रोज होती है, लेकिन बाढ़ व बरसात के दिनों में इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से कई सप्ताह तक यातायात पूरी तरह बाधित रहता है. नेताओं से पूछे जायेंगे सवालअकरहरघाट का जर्जर पुल इस चुनाव में नेताओं के सामने रखने की तैयारी में गांव के लोग हैं. गांव के देवन महतो, मोहन यादव बताते हैं कि हर बार इस पुल को ठीक करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन यह सिर्फ नेताओं का आश्वासन ही रहता है. ऐसे में गांव के लोगों को नेताओं से अब कोई सरोकार नहीं रखना. इस चुनाव में नेताओं से इस पुल के निर्माण की बातें पूछी जायेगी. क्या कहते हैं अधिकारी एसडीओ राजेश परिमल ने बताया है कि चुनाव संपन्न होते ही इस दिशा में पहल की जायेगी.

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