सिकुड़ती गयी हैंठीबाली सड़क

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सड़क से पैदल चलना भी हुआ दूभर झंझारपुर : एनएच-57 सड़क से हैंठीवाली गांव जाने वाली सड़क का मात्र अब अवशेष भर ही रह गया है. सड़क के उद्धार को लेकर विभाग उदासीन बैठा है. पूर्व मंत्री नीतीश मिश्र की ओर से सड़क की महत्ता को देखते हुए चार पुल के निर्माण की अनुशंसा की […]

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सड़क से पैदल चलना भी हुआ दूभर

झंझारपुर : एनएच-57 सड़क से हैंठीवाली गांव जाने वाली सड़क का मात्र अब अवशेष भर ही रह गया है. सड़क के उद्धार को लेकर विभाग उदासीन बैठा है. पूर्व मंत्री नीतीश मिश्र की ओर से सड़क की महत्ता को देखते हुए चार पुल के निर्माण की अनुशंसा की थी, लेकिन विभाग ने पुल का निर्माण का कार्य तो प्रारंभ कर दिया गया, लेकिन सड़क की स्वीकृत नहीं दी जा सकी है. इससे लोगों में निराशा छायी हुई है.

गौरतलब हैं कि यह सड़क पूर्व में झंझारपुर प्रखंड के प्रमुख गांवों को जोड़ने वाली सड़क हुआ करती थी. वर्षों पहले लोग इस सड़क से आसानी पूर्वक गुजरते थे, लेकिन अब इस सड़क पर पैदल भी चलना खतरे को मोल लेना साबित हो रहा है.

क्या है मामला

हैंठीबाली गांव से एनएच-57 तक आने वाली सड़क को वर्षो पहले ऐसी परिस्थिति नहीं थी. साल 2000 में आयी बाढ़ की त्रसदी ने इस सड़क को तहस नहस कर के रख दिया. ऐसा नहीं कि तत्कालीन मुखिया की ओर से हलका फुलका मिट्टीकरण नहीं करवाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सड़क की हालत जस की तस बन गयी. एनएच-57 सड़क निर्माण से हैंठीवाली गांव के साथ आसपास के दस गांवों के लोगों को आस जगी थी कि अब इस सड़क का उद्धार हो जायेगा.

एनएच निर्माण एजेंसी ने सड़क की महत्ता को देखते विदेश्वर स्थान पर कालीकरण वाली सड़क को छोड़ हैंठीवाली गांव जाने वाली सड़क पर ओवरब्रिज का निर्माण कराया. आसपास के गांव के लोग अत्यधिक खुश हुए, लेकिन इन लोगों की खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रही. वहीं, हैंठीवाली गांव की ओर जाने वाली सड़क की स्थित जस की तस बनी हुई है. ये बात आसपास के लोगों के लिए यक्ष प्रश्न बना हुआ है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

गांव के डॉ गजेंद्र नारायण झा, गोविंद झा, आशुतोष झा, श्याम झा, मिथिलेश झा, गोविंद झा, देवेंद्र झा ने बताया कि 2000 में बाढ़ से जर्जर हुई सड़क को चार वर्षों बाद पंचायत के तत्कालीन मुखिया द्वारा मिट्टीकरण एवं खरंजाकरण कराया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सड़क की स्थित बद से बदतर हो गयी. स्थानीय सांसद, विधायक एवं विभाग के मंत्री तक को इस सड़क के निर्माण कराने के लिए कहा गया है.

मंत्री ने पहल कर पुल की अनुशंसा भी की, लेकिन विभाग व शासन प्रशासन की लापरवाही के कारण सड़क पर चलना अभी भी सपना ही बना हुआ है. मालूम हो कि इस सड़क के बन जाने से हैंठीवाली, रूपौली, कथना, कोठिया, रैयाम, लोहना आदि गांव के लोगों को झंझारपुर आने जाने में लगभग दस किलोमीटर की दूरी कम हो जायेगी.

क्या कहते हैं अधिकारी

रामनाथ कुमार का कहना है कि बहुत जल्द इस सड़क का निर्माण कराया जायेगा. विभागीय प्रक्रिया का कार्य प्रगति पर है.

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