वार्ड नंबर दो : तीन हजार की आबादी में सात चापाकल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मधुबनी : शहर के प्राय: सभी मुहल्लों में शुद्ध पेयजल की परेशानी बरकरार है. लोग आज भी अपने घरों से दूर जाकर घंटों लाइन में लग कर पानी लेते हैं. सबसे अधिक परेशानी शहर के महादलित मुहल्लों की है. इन मुहल्लों में लोगों को शुद्ध पानी पीना आज भी सपना भी बना हुआ है. ऐसा […]
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मधुबनी : शहर के प्राय: सभी मुहल्लों में शुद्ध पेयजल की परेशानी बरकरार है. लोग आज भी अपने घरों से दूर जाकर घंटों लाइन में लग कर पानी लेते हैं. सबसे अधिक परेशानी शहर के महादलित मुहल्लों की है.
इन मुहल्लों में लोगों को शुद्ध पानी पीना आज भी सपना भी बना हुआ है. ऐसा नहीं है कि इन मुहल्लों में पेयजल के लिये चापाकल की व्यवस्था नहीं किया गया हो . पर यह विभाग व व्यवस्था की लापरवाही कहे या फिर इन मुहल्लों के लोगों के दुर्भाग्य. चापाकल लगते ही खराब हो गये. स्थिति यह है कि जिन वाडरे में 20 से 25 चापाकल लगाये गये.
आज उन वार्डों में महज सात से दस चापाकल से ही पानी निकल रहा है. इसमें भी कई चापकल से निकल रहे पानी में आयरन की मात्र इतनी अधिक है कि लोग इसे पीने में उपयोग नहीं कर रहे हैं. इसी प्रकार की परेशानी से आज कल वार्ड तीन के निवासी दो चार हो रहे हैं.
शहर के लाखोबिंदा मुहल्ला, रहमगंज, जे एन कॉलेज, बाबू साहेब ड्य़ौढी, जानकी मंदिर,चभच्च चौक, एवं बड़ा बाजार मुहल्लों में फैले इस वार्ड की आबादी करीब तीन हजार है. इस मुहल्ले में कहने को तो 17 चापकल हैं. पर लोगों को शुद्ध पेयजल के लिये मात्र दस चापाकल ही हैं. इसमें से भी करीब तीन चापाकल से पीला पानी निकल रहा है. जिस कारण लोग इनका उपयोग पीने के लिये नहीं कर रहे हैं.
महादलित मोहल्ले के लोग परेशान
वार्ड तीन के महादलित मुहल्ला के लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. इस मुहल्ले में आवश्यकता के अनुरूप चापाकल नहीं लगे रहने के कारण लोगों को अन्य चापाकलों पर पानी के लिये जाना पड़ता है. जहां इन्हें काफी फजीहतों का सामना करना पड़ता है. कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है. पर पानी के बिना रह नहीं सकते सो अपमान सहते हुए भी ये इन चापाकलों पर पानी के लिये पहुंच ही जाते हैं.
दस साल में लाखों खर्च
विगत दस साल में वार्ड तीन में पेयजल के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो गये हैं. इसमें चापकल लगाने की योजना के तहत विधायक मद से जहां छह चापाकल लगाये गये. वहीं विधानपार्षद मद से एक भी चापकल नहीं लगाये गये. जिस कारण लोगों में विधानपार्षद के प्रति आक्रोश भी देखा जा रहा है.
क्या कहते हैं मोहल्लेवासी
तीन वार्ड के स्थानीय निवासी जितेंद्र पासवान ने कहा कि नगर परिषद के द्वारा चापाकल लगाने की खानापूरी की गयी है. कई चापाकल खराब पड़े हैं. जिसे ठीक कराने के दिशा में नप प्रशासन कोई पहल नहीं कर रहा है.
वहीं कलिया देवी ने कहा कि विधान पार्षद व अन्य नेता वोट के समय गली गली घूमते हैं पर इस वार्ड में पानी की समस्या कोई नयी बात नहीं है. इसे दूर करने के दिशा में किसी नेता ने कोई पहल नहीं किया है.
सुनील पासवान ने कहा कि विधान पार्षद जनप्रतिनिधि का जनप्रतिनिधि होता है. पर इस वार्ड में एक भी चापाकल विधान पार्षद के मद से नहीं दिया जाना यह साबित करता है कि उन्हें इस क्षेत्र की जनता से कोई सरोकार नहीं है.
गुड़िया देवी बताती है कि हर दिन करीब एक घंटा पानी लाने में बीत जाता है. दिन भर में कई बार पानी के लिये दूर जाना पड़ता है. अपने पड़ोस में लगे चापकल से पीला पानी निकलता है. जो पीने लायक नहीं है.
राधा देवी बताती है कि सबसे अधिक परेशानी बारिश के समय में होता है. पानी में भींगते हुए दूर जाकर पानी लाना पड़ता है.
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