नींद नहीं आंखों में समाया था खौफ!

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खौफ के साये में सदर अस्पताल के मरीजों ने काटी रात मधुबनी : मंगलवार के भूकंप के झटके के बाद बुधवार को सदर अस्पताल में हालांकि सब कुछ सामान्य नजर आ रहा था. कामकाज अन्य दिनों की तरह ही चल रहा था. डॉक्टर मरीज को देख रहे थे, लेकिन विभिन्न वार्डो में भरती मरीज दहशत […]

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खौफ के साये में सदर अस्पताल के मरीजों ने काटी रात
मधुबनी : मंगलवार के भूकंप के झटके के बाद बुधवार को सदर अस्पताल में हालांकि सब कुछ सामान्य नजर आ रहा था. कामकाज अन्य दिनों की तरह ही चल रहा था. डॉक्टर मरीज को देख रहे थे, लेकिन विभिन्न वार्डो में भरती मरीज दहशत में ही थे. मंगलवार की रात भी उन्होंने दहशत भरे माहौल में काटी.
भूकंप के खौफ से किसी को नींद नहीं आयी. जो सो भी रहे थे बीच-बीच में चौंक जाते थे. रही सही कसर एक बार फिर सुबह तीन बजे आये भूकंप के झटके ने पूरा कर दिया. कई मरीज रात भर नहीं सो पाये. सबसे ज्यादा दिक्कत पांव में प्लास्टर लगे मरीजों को थी. उन्हें डर सता रहा था कि भूकंप के तेज झटकों में बाहर तेजी से उन्हें कैसे ले जाया जायेगा.
सदर अस्पताल में पुरुष मेडिकल वार्ड में तीन दिनों से भरती खजाैली प्रखंड के कन्हौली गांव के अभिषेक कुमार बताते है कि मंगलवार को आये भूकंप के झटके पिछले महीने की ही तरह था. इस लिये डर बना हुआ है. रात में ठीक से सो नहीं पाये, हमेशा भूकंप की आशंका बनी हुई थी. बुधवार की सुबह तीन बजे भी भूकंप आया. हम बाहर निकल गये. आधा घंटा बाहर रहे, फिर वापस अपने बेड पर आ गये. अभिषेक के चेहरे पर खौफ स्पष्ट दिखाई पर रहा था.
पंडौल प्रखंड के तेतराहा निवासी चंदर मुखिया को सांस की बीमारी है. बताया कि रात भर भूकंप के डर से सो नहीं पाये. अपने बेड पर बैठा ही रहा. इस भूकंप ने तो चैन ही छीन लिया है. रात में डर था कि भूकंप के झटके के वक्त सोया रहा तो कोई अनहोनी न हो जाय. जगे रहेंगे तो दो कदम में ही बाहर चले जायेंगे.
राहुल नगर, मधुबनी के सुरेंद्र राउत कहते हैं कि रात भर बेड पर लेट कर छत की तरफ देखता ही रह गया. मंगलवार को दिन में भूकंप आया था तो बाहर भाग गये थे. डर था कि नींद में भूकंप आ गया तो क्या होगा. सुबह में तीन बजे झटका आया था, पर बेड पर ही रहा. उसके बाद कहीं जाकर सूरज की लालिमा आने पर सोया. अभी भी डर बना हुआ है.
भौआड़ा निवासी मौलवी नसीम बताते हैं कि पिछले महीने आये भूकंप के झटके में घायल हो गया था. भूकंप का खौफ से न हम रात में सोये और न ही हमारे परिजन पांव में प्लास्टर है. खुद भाग भी नहीं सकते.
पिरसौलिया गांव के चंदर पंडित के पांव में भी प्लास्टर है, बताया कि रात भर नींद नहीं आयी. भूकंप का झटका का डर हमेशा बना हुआ है. रात भर दहशत में रहे.
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