बीइओ को 25 हजार का अर्थदंड

Published at :10 Apr 2015 7:55 AM (IST)
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बीइओ को 25 हजार का अर्थदंड

मधवापुर : वासुकी बिहारी दक्षिणी पंचायत के दुर्गापट्टी निवासी राज कुमार दास को शिक्षा विभाग की ओर से 31 महीने बाद भी अधूरी सूचना उपलब्ध कराना और आयोग में कभी भी उपस्थित नहीं होना मधवापुर बीइओ को महंगा पड़ा. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, पटना एके सिन्हा ने मधवापुर के बीइओ सह लोक सूचना पदाधिकारी उमेश […]

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मधवापुर : वासुकी बिहारी दक्षिणी पंचायत के दुर्गापट्टी निवासी राज कुमार दास को शिक्षा विभाग की ओर से 31 महीने बाद भी अधूरी सूचना उपलब्ध कराना और आयोग में कभी भी उपस्थित नहीं होना मधवापुर बीइओ को महंगा पड़ा.
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, पटना एके सिन्हा ने मधवापुर के बीइओ सह लोक सूचना पदाधिकारी उमेश बैठा पर पच्चीस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है और डीएम मधुबनी को कोषागार से निकासी के समय दंड की राशि कटौती कर प्रतिवेदन भेजने को कहा है.
बताते चलें कि श्री दास 18 अगस्त 2012 को वासुकी बिहारी दक्षिणी पंचायत सचिव सह उक्त नियोजन इकाई के सचिव से वर्ष 2003, 05, 06 एवं 08 में पंचायत अधीन नियोजित सभी शिक्षकों की शैक्षणिक / प्रशैक्षणिक योग्यताओं से संबंधित प्रमाण पत्रों की स्व अभिप्रमाणित छाया प्रति, आरक्षण रोस्टर, मेघा सूची, पदों की श्रेणी, शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत जातीय, आवासीय प्रमाण पत्रों की छाया प्रति एवं वित्तीय वर्ष 2007 से 2012 तक छात्रवृत्ति मद में पंचायत के किस स्कूल को कितनी राशि दी गयी तथा विद्यालयवार क्रमानुसार छात्रवृत्ति से लाभान्वित छात्रों की सूची की छाया प्रति सूचना अधिकार के तहत मांगी थी.
नियोजन इकाई के सचिव मांगी गयी सूचना उपलब्ध कराने के बदले आवेदक को यह लिखा कि संबंधित कागजात तत्कालीन पंचायत सचिव मो अयूब के पास है और उनका स्थानांतरण बाबूबरही प्रखंड में हो गया है और उन्हीं से प्राप्त कर सकते हैं. इसके बाद आवेदक बीडीओ सह प्रखंड नियोजन इकाई के सचिव से उक्त सूचना की मांग की, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली. थक हारकर श्री दास राज्य सूचना आयोग का दरबाजा खटखटाया और वाद संख्या 85832/12-13 के तहत सूचना उपलब्ध कराने की अपील की.
इस पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन सूचना आयुक्त आरजेएम पिल्लै ने पूर्व के पंचायत सचिव मो अयूब को बिना कागजात प्रभार दिये ही अन्यत्र जाने को गंभीर मानते हुए बीइओ मधवापुर को लोक सूचना पदाधिकारी घोषित कर संबंधित सूचना तत्कालीन पंचायत सचिव से प्राप्त कराकर आवेदक को उपलब्ध कराने का आदेश दिया.
26 फरवरी 2015 को भी सुनवाई के दौरान अन्य तिथि की तरह लोक सूचना पदाधिकारी को आयोग से अनुपस्थित रहने, इतनी लंबी अवधि के बाद भी अधूरी सूचना देने को आयुक्त ने गंभीर माना है. 13.11.14 को इसी मामले में बीइओ पर अर्थदंड एवं स्पष्टीकरण का आदेश हुआ था. इसपर 09. 02.2015 के पत्र से यह सूचित किया गया कि कंडिका-1 के संबंध में पूर्व पंचायत सचिव के पदस्थापन की सूचना प्राप्त की जा रही है, प्राप्त होते ही यह सूचना उपलब्ध करायी जायेगी.
उनके इस लिखित दलील और स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए आयोग ने अपने फैसले में बीइओ को सूचना देने में बाधक मानते हुए उनपर सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के अंतर्गत 250 रुपये प्रतिदिन की दर से 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है और डीइओ मधुबनी को लोक सूचना पदाधिकारी बनाया है.
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