रिलायबल, रेमेल करोड़ों रुपये लेकर फरार

Published at :09 Dec 2014 11:33 AM (IST)
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रिलायबल, रेमेल करोड़ों रुपये लेकर फरार

मधुबनी : शहर में कई लोग दो नन बैंकिंग कंपनियों की तलाश में भटक रहे हैं. पर पिछले कई महीनों से इन नन बैंकिंग कंपनियों का ऑफिस नहीं मिल रहा है. ये कंपनियां हैं रिलायबल ज्वेल (इंडिया) व रेमेल इंडस्ट्रीज. ये ग्राहकों का करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गयी हैं. जहां इन कंपनियों का कार्यालय […]

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मधुबनी : शहर में कई लोग दो नन बैंकिंग कंपनियों की तलाश में भटक रहे हैं. पर पिछले कई महीनों से इन नन बैंकिंग कंपनियों का ऑफिस नहीं मिल रहा है. ये कंपनियां हैं रिलायबल ज्वेल (इंडिया) व रेमेल इंडस्ट्रीज.
ये ग्राहकों का करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गयी हैं. जहां इन कंपनियों का कार्यालय था, वहां अब ताला लटक रहा है. अब तक किसी ने इसकी लिखित शिकायत प्रशासन सेनहीं की है. पर एसपी के जनता दरबार में यह मामला आया है. उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कही है.
अचानक हुआ बंद. गोबरौरा गांव की शांति देवी एक निजी विद्यालय में सहायिका के पद पर काम करती हैं.पिछले तीन माह से महिला कॉलेज के सामने स्थित मुहल्ले का रोज चक्कर लगाती हैं. पूछने पर आंख से आंसू लिये बताती हैं कि यहां एक प्राइवेट बैंक रिलायबल का ऑफिस था. इसमें बगल गांव के एक एजेंट ने खाता खुलवा दिया. दो साल से हर माह 1500 रुपये जमा करती थी. बैंक में खाता बेटी निशा के नाम खुलवाया था ताकि उसकी शादी के समय यह काम आ सके. अब शादी कर दी तो बैंक ही नहीं मिल रहा है. हर दो तीन दिन पर यहां आती हूं. पर किसी का अतापता नहीं है.
यहीं हाल दुर्गीपट्टी के संतोष राय का है. उन्होंने रेमेल इंडस्ट्रीज नामक कंपनी में अपने एक परिचित के माध्यम से खाता खुलवाया था. मासिक खाता था. एक साल तक करीब 20 हजार जमा किया. पर अब कार्यालय नहीं मिल रहा है. जहां पहले ऑफिस था, अब वहां टय़ूशन सेंटर चल रहा है. पिछले छह महीने से कंपनी की तालाश में रोज मधुबनी आता हूं. उसके गांव के कई लोगों ने उसमें खाता खुलवाया था.
पहले बोर्ड बदला. महिला कॉलेज रोड स्थित रिलायवल ज्वेल नामक कंपनी ने छह माह पहले कंपनी के पूर्व के नाम को बदल दिया था. पहले रिलायबल इंडिया के नाम का बोर्ड लगाया हुआ था. फिर अचानक बोर्ड को बदल दिया और इसका नाम रिलायबल इंडिया से रिलायबल ज्वेल नाम रखा गया. उस समय कुछ खाताधारकों ने इस पर सवाल किया था. तब कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीण एजेंटों को यह कह कर समझा दिया था कि कंपनी का काम नहीं सिर्फ नाम बदला है.
पहले भी भाग चुकी हैं कई कंपनियां. पिछले दो साल में जिले से करीब एक दर्जन से ज्यादा नन बैंकिंग कंपनियां अपना झोला समेट चुकी हैं. इनमें सबसे ज्यादा जयनगर अनुमंडल मुख्यालय में मामला हुआ है. यहां से अब छह कंपनियां अपना ऑफिस समेट कर रातो रात भाग चुकी हैं. इसमें जीवन ज्योति, डॉल्फिन, राइमंड, राइट लिंक कंपनी, जाग्रतो भारत व पीआर म्यूचुअल फंड शामिल हैं. जाग्रतो भारत कंपनी के प्रबंधक वीरेंद्र साह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई और पिछले दिनों वह जेल गये. वहीं पीआर मिचुअल फंड के खिलाफ भी जयनगर थाना में मामला दर्ज कराया गया है. पर किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. वहीं इन कंपनियों पर करीब तीन करोड़ से अधिक का हेराफेरी करने का आरोप है.
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