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डॉ जगन्नाथ मिश्र का मधुबनी व झंझारपुर से विशेष तौर पर था लगाव

Updated at : 20 Aug 2019 7:58 AM (IST)
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डॉ जगन्नाथ मिश्र का मधुबनी व झंझारपुर से विशेष तौर पर था लगाव

मधुबनी : डॉ जगन्नाथ मिश्र भले ही बिहार के सीएम रहे, पर उनका जुड़ाव व लगाव मधुबनी जिले से विशेष तौर पर रहा. झंझारपुर के अधिकतर लोगों को वे अंतिम समय तक नाम से जानते थे. जब कभी कोई उनसे मिलने जाता था तो वे नाम लेकर लोगों का हाल चाल जानते. उनकी लोकप्रियता व […]

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मधुबनी : डॉ जगन्नाथ मिश्र भले ही बिहार के सीएम रहे, पर उनका जुड़ाव व लगाव मधुबनी जिले से विशेष तौर पर रहा. झंझारपुर के अधिकतर लोगों को वे अंतिम समय तक नाम से जानते थे. जब कभी कोई उनसे मिलने जाता था तो वे नाम लेकर लोगों का हाल चाल जानते.
उनकी लोकप्रियता व आत्मीयता का आलम यह रहा कि अंधराठाढ़ी गांव का बच्चा बच्चा उन्हें मामा ही कहा करता. किसी ने उन्हें सीएम साहब नहीं पुकारा, उन्होंने भी ठाढी गांव के लोगों को तुम कहकर ही बुलाया. यह गांव उनकी बहन का ससुराल था. बचपन से लेकर बुढ़ापे तक का सफर इस गांव के लोगों ने देखा है. इस गांव के घर- घर में डाॅ जगन्नाथ मिश्रा का आना जाना लगा रहा. शिक्षाविद महेश झा बताते हैं कि इस गांव में ही डा. जगन्नाथ मिश्रा की बहन की शादी हुई थी. चंद्रनाथ झा उर्फ ठक्कन झा उनके बहनोई थे.
जिस कारण इस गांव से उनका जुड़ाव रहा. प्रारंभिक शिक्षा भी गांव के ही सदानंद झा ने ही दी थी. बात केवल अंधराठाढी के ठाढ़ी गांव की नहीं थी, बल्कि झंझारपुर व मधुबनी तक के लोगों से अपनापन से मिलना इनकी आदत थी. मधुबनी व झंझारपुर के विकास में डॉ जगन्नाथ मिश्र का योगदान अविस्मरणीय है. झंझारपुर का रेल सह सड़क पुल आज विश्व प्रसिद्ध है. पर बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि इसके निर्माण का श्रेय स्व. जगन्नाथ मिश्रा को ही जाता है.
बताया जाता है कि साल 1972 में जब वह चुनाव मैदान में उतरे और झंझारपुर आये तो उनका वाहन झंझारपुर बाजार तक नहीं जा सका. नदी के पहले ही गाड़ी को आईबी के समीप रोकना पड़ा. वह पैदल ही झंझारपुर गये. 1934 के भूकंप में कमला नदी पर बना पुल टूट चुका था और लोगोें के आने जाने का कोई रास्ता नहीं बचा था.
उस समय उन्होंने अपने भाई रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र को रेल पुल को ही रेल सह सड़क पुल बनाने का प्रपोजल दिया, जिसे बाद में धरातल पर उतारा गया. आज भी यह पुल मौजूद है. स्व. मिश्रा दूरदर्शी थे. इस जिला के लोगों को रोजगार मिले और उन्हे पलायन नहीं करना पड़े, इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ही उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद साल 1981 में पंडौल में औद्योगिक क्षेत्र बनाया.
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