बीएनएमयू में अब तो मुर्दा भी लगा रहे हैं झाड़ू!

Published at :15 Nov 2016 1:41 AM (IST)
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बीएनएमयू में अब तो मुर्दा भी लगा रहे हैं झाड़ू!

विवि ने मृत चतुर्थ वर्गीय कर्मी फुलेश्वर मल्लिक के नाम जारी किया पत्र विवि में कार्यरत रहने का सबूत व पांच दिनों में अभिलेख जमा करने का निर्देश विवि के अनोखे पत्र से शिक्षक, पदाधिकारी व कर्मी अचंभित मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि में जिवित तो जिवित मृत व्यक्ति भी काम करने लगा है. […]

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विवि ने मृत चतुर्थ वर्गीय कर्मी फुलेश्वर मल्लिक के नाम जारी किया पत्र

विवि में कार्यरत रहने का सबूत व पांच दिनों में अभिलेख जमा करने का निर्देश
विवि के अनोखे पत्र से शिक्षक, पदाधिकारी व कर्मी अचंभित
मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि में जिवित तो जिवित मृत व्यक्ति भी काम करने लगा है. विवि परिसर में वह मृत व्यक्ति साफ-सफाई के साथ-साथ सामान्य शाखा में झाड़ू भी लगा रहा है. लोगों का अचंभित करने वाला यह खुलासा कुलसचिव कार्यालय से 11 नवंबर को जारी पत्र संख्या जीएस (एलसी-2-2297/15)- 1124/16 से हुआ है. मृत कर्मी भी विवि में कार्य कर रहा है, यह सुनने में थोड़ा अजीबोगरीब जरूर लग रहा है, लेकिन बीएनएमयू प्रशासन ही जब ऐसा मान रही है तो आमलोगों को मानने में क्या हर्ज है?
हालांकि कुलसचिव डा कुमारेश प्रसाद सिंह ने इसे चूक तो माना है लेकिन तकनीकी कारणों से पत्र में सुधार की बात को फिलहाल दरकिनार कर गये. अब सवाल उठता है कि क्या मृत कर्मी को विवि कागज पर जिंदा रखेगी या जारी पत्र में सुधार करेगी. चुंकि एक माह पहले ही इसी तरह की हुई चुक के कारण बीएनएमयू करीब दो माह तक आंदोलन की आग में जलता रहा. वहीं आंदोलन के दौरान विवि बंद रहने के कारण लाखों छात्रों का भविष्य बरबाद हो गया था.
पचास दिन पहले ही विवि परिसर में हुई थी फुलेश्वर मल्लिक की मौत
जिस व्यक्ति को विवि आज भी जिंदा बता रहा है, उसकी मौत 21 सितंबर को विवि परिसर में धरना स्थल पर भूख के कारण हो गयी थी. पचास दिन पहले जिस फुलेश्वर मल्लिक की मौत दवा व भोजन के अभाव में हो गयी थी, उसे विवि ने अनोखा पत्र जारी कर विवि में कार्यरत रहने का सबूत मांगा है. कुलसचिव कार्यालय से 11 नवंबर को जारी पत्र में मृत फुलेश्वर मल्लिक सहित सभी अस्थायी कर्मियों से वांछित अभिलेख की मांग की गयी है.
गौरतलब है कि फुलेश्वर मल्लिक की मौत पर कर्मियों ने विवि परिसर में जम कर बवाल काटा था. तब मृतक के परिजन को अस्थायी कर्मी के रूप में बहाल करने एवं पचास हजार रुपये नगद देने का आश्वासन देकर कर्मियों को शांत किया गया.
मृत फुलेश्वर को देना है विवि में अब तक कार्यरत रहने का ब्योरा
विवि ने मृत फुलेश्वर मल्लिक सहित सभी कर्मियों से 16 नवंबर तक विवि में कार्यरत रहने का ब्यौरा मांगा है. जिसमें पदनाम के साथ नियुक्ति की तिथि, नियुक्ति पत्र, नियुक्ति में कुलपति का अनुमोदन, नियुक्ति प्राधिकार का नाम, नियुक्ति के समय धारित योग्यता, नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन, नियुक्ति के लिए चयन समिति से संबंधित अभिलेख, प्रथम भुगतान की तिथि एवं सेवा निरंतरता का सबूत पेश करना है. फिलहाल निर्धारित समय तक मृत फुलेश्वर मल्लिक के द्वारा विवि के सामने अभिलेख प्रस्तुत करना असंभव है.
विवि से जारी पत्र में खामियां ही खामियां : विवि में कार्यरत सभी 80 अस्थायी कर्मचारियों को जारी पत्र में एक नहीं कई चुक है. पत्र में जिस केस नंबर का हवाला दिया गया है कि वह सहायक राजेश्वर राय द्वारा दायर किया गया है लेकिन पत्र में राजेश्वर राय के नाम का कहीं कोई जिक्र नहीं है. जबकि राजेश्वर राय के अलावे कई कर्मियों ने उच्च न्यायालय पटना में रिट दायर किया गया है. वहीं राजेश्वर राय तीन महीने पहले ही कुलानुशासक कार्यालय से लीगल सेल स्थानांनतरित हो चुके है.
जबकि उन्हें अब तक कुलानुशासक कार्यालय में ही कार्यरत दिखाया जा रहा है. इसके अलावे आधे दर्जन कर्मी ऐसे है जो कार्यरत है दूसरे जगह और पत्र में तीसरे जगह प्रतिनियुक्त दिखाया गया है. गौरतलब है कि इससे पूर्व भी आउटसोर्सिंग बहाली को लेकर जारी पत्र में मैन पावर का जिक्र होने से विवि में दो माह तक ताला लटका रहा. हालांकि बाद में विवि ने इसे एक पदाधिकारी की चुक बता कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया.
अस्थायी कर्मियों के सेवा सामांजन को लेकर राज्य सरकार को पहले भी पत्र भेजा गया था. पुराने पत्र में संलग्न सूची को ही फिर से उतार दिया गया है. यह चुक हुई है. फिलवक्त इसमें सुधार का प्रयास किया जा रहा है.
डाॅ कुमारेश प्रसाद सिंह, कुलसचिव, भूपेंद्र नारायण मंडल विवि, मधेपुरा
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