आखिरकार नहीं हुआ कूड़े का उठाव, शहर हुआ कचरामय
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Nov 2016 3:19 AM (IST)
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नगर परिषद व सफाई कर्मियों में चल रहे गतिरोध को नहीं किया जा सका है अब तक दूर करीब एक माह से अधिक दिनों से चल रही हड़ताल नहीं टूटी, इस मामले में बैठक आज सड़कों पर चारों तरफ फैली है गंदगी, शहरवासी को हो रही है भारी परेशानी मधेपुरा : शहर में बार-बार डोर […]
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नगर परिषद व सफाई कर्मियों में चल रहे गतिरोध को नहीं किया जा सका है अब तक दूर
करीब एक माह से अधिक दिनों से चल रही हड़ताल नहीं टूटी, इस मामले में बैठक आज
सड़कों पर चारों तरफ फैली है गंदगी, शहरवासी को हो रही है
भारी परेशानी
मधेपुरा : शहर में बार-बार डोर टू डोर कचरा उठाव की बात हो रही है लेकिन जब भी इसकी घोषणा की जाती है या अमलीजामा पहनाने की शुरूआत की जाती है तब-तब इस पर कोई न कोई ग्रहण लग जाता है. न डोर टू डोर कचरा उठाव हो रहा है न सड़क से ही कचरा साफ किया जा रहा है. इसके कारण सड़क पर भी गंदगी का आलम है. शहर में सकारात्मक बदलाव की रफ्तार धीमी हो गयी है. विगत एक महीने से नगर परिषद के सफाई कर्मी हड़ताल पर हैं. ये लोग एनजीओ के तहत दैनिक भत्ते पर काम करने के लिए तैयार नहीं हैं. इन मामलों का अब तक हल नहीं निकल पाया है. हालांकि रविवार को प्रशासन एक बार फिर इस दिशा में पहल करते हुए सफाई कर्मियों के साथ बैठक आयोजित की है. अब देखना है कि इस बैठक में कोई हल निकल पाता है या बेनतीजा ही रहती है.
आखिर क्या है मामला. नगर परिषद में सफाई कर्मियों के पद स्थायी नहीं हैं लेकिन पचास से ज्यादा सफाईकर्मी नगर परिषद के अंतर्गत काम करते रहे हैं. इन सफाईकर्मियों को काम के लिये भुगतान भी किया जाता रहा है. सरकार के निर्देशानुसार नगर परिषद दैनिक मजदूरों को भुगतान नहीं दे सकता है. हालिया आदेशानुसार नप को आउटसोर्सिंग के जरिये सफाई की व्यवस्था करना है.
शहर में सफाई के लिये निविदा के जरिये दो एनजीओ को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है. लेकिन सफाई कर्मियों ने एनजीओ के तहत काम करने से इनकार कर दिया और हड़ताल पर चले गये. इसके साथ उन्होंने अन्य बाहरी मजदूरों को भी काम नहीं करने देने की बात कही थी.
लाचार हो गये हैं एनजीओ
नगर परिषद प्रशासन को लगभग एक माह पूर्व ही एनजीओ ने लिख कर दिया गया था कि उनके मजदूरों को काम नहीं करने दिया जा रहा है. उनके मजदूरों के साथ स्थानीय सफाई कर्मी दुर्व्यवहार कर रहे है. इस मामले में कार्यपालक पदाधिकारी ने वरीय अधिकारी से दिशा निर्देश मांगा तो जिलाधिकारी द्वारा पुलिस बल प्राप्त करने के लिए एसपी से अधियाचना करने का निर्देश दिया गया़ इसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी पुलिस बल की मांग भी की थी. पुलिस की तैनाती तो की गयी लेकिन बाहरी मजदूरों का लगातार विरोध होते रहने के कारण मुख्य सड़क से भी कचरे का उठाव काफी मश्किल कार्य साबित हो गया.
पहले किये गये भुगतान भी लौटाना होगा. वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार ने स्थानीय निकायों को दैनिक मजदूरी पर कार्य लगाने से प्रतिबंधित करते हुए पूर्व में मजदूरों को किया गया भुगतान लौटाने का आदेश दिया है. बिहार सरकार के पत्र संख्या 04 नसे 01-103/87-1231नविवि समेत अन्य पत्र द्वारा शहरी स्थानीय निकायों को दैनिक मजदूरी पर कार्य पर लगाने से प्रतिबंधित किया गया है. वहीं इसी पत्रांक द्वारा साफ सफाई कार्य वाह्य स्रोत से निविदा कर कराने का निर्देश है. इतना ही नहीं वर्ष 2013 – 14 एवं 2014-15 में दैनिक मजदूरी पर हुए 43 लाख 84 हजार 184 रूपये के भुगतान को अनियमितता बताया है.
कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी. इस मामले को लेकर नप के कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार पवन कहते हैं कि तमाम मुद्दो पर काफी गतिरोध हैं. लेकिन हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है. इस संबंध में रविवार को बैठक है इसमें सफाई कर्मियों को भी बुलाया गया है.
शहर में सफाई को लेकर चल रहे गतिरोध के कारण फैली है गंदगी.
मामले में फंसा है पेच
अब स्थिति यह है कि कार्यपालक पदाधिकारी साफ साफ कह चुके है कि दैनिक वेतन भुगतान करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और वे किसी भी वित्तीय अनियमितता में फंसने को तैयार नहीं है. वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मी स्थायी करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है उनलोगों ने अपनी सेवा स्थायी करण के लिए हाइकोर्ट में मामला दायर किया है.
इस मामले के निपटारा तक नगर परिषद को उनलोगों से काम लेना चाहिए. इनका यह भी कहना है कि आखिरकार 15 साल से उन्हें यह क्यों नहीं बताया गया कि उनका पद स्वीकृत नहीं है़ वहीं इन मजदूरों का कहना है कि बाहर से मजदूर लाकर इनकी रोजी रोटी छीनी जा रही है.
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