केमिकलयुक्त सब्जियां बनी नासूर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Jul 2016 8:00 AM (IST)
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हरी सब्जी और फल ये दोनों आहार मानव शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व से भरपूर माने जाते हैं. लेकिन सच इसके विपरीत है. रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, आकार और वजन वृद्धि के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्रोथ एक्टिवेटर और नकली खाद के इस्तेमाल आदि के कारण फल और सब्जियां सेहत के लिए काफी नुकसानदेह साबित […]
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हरी सब्जी और फल ये दोनों आहार मानव शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व से भरपूर माने जाते हैं. लेकिन सच इसके विपरीत है. रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, आकार और वजन वृद्धि के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्रोथ एक्टिवेटर और नकली खाद के इस्तेमाल आदि के कारण फल और सब्जियां सेहत के लिए काफी नुकसानदेह साबित होने लगी हैं.
मधेपुरा : रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक के अत्यधिक प्रयोग वाली सब्जियों का सीधा असर लीवर, अग्नाशय के साथ-साथ शरीर के अन्य भागों पर पड़ रहा है. इन तत्वों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण फल और सब्जी लोगों को न केवल बीमार बना रही हैं, बल्कि धीरे-धीरे उन्हें मौत की ओर धकेल रहे हैं. लीवर सिरोसिस, गॉल ब्लाडर कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही है.
वहीं डायबिटीज, गैस सहित अन्य बीमारियां भी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है. दरअसल हार्मोन का प्रयोग से शरीर का नर्वस सिस्टम भ्रमित हो जाता है. ऐसे में कभी किसी हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है तो किसी हार्मोन का स्राव बंद हो जाता है. यही बीमारियों के अनियंत्रित हो जाने में मुख्य भूमिका अदा कर रही है. वहीं इसका असर पशुओं में बांझपन समेत अन्य बीमारी के तौर पर भी सामने आ रहा है. इसलिए इन दिनों आर्गेनिक खेती तथा किचन गार्डन जैसी अवधारणाएं सामने आ रही है.
ग्रोथ एक्टिवेटर से जादुई उत्पादन
किसानों की मानें तो ग्रोथ एक्टिवेटर ने उनकी उपज में जादू कर दिया है. केले की खेती करने वाले एक किसान ने बताया कि सामान्य तौर पर केले का आकार छह इंच होने में दो महीने का वक्त लगता है.
वहीं प्लानोफिक्स का उपयोग करने पर दस से पंद्रह दिनों के भीतर केले का आकार नौ से बारह इंच तक हो जाता है. वहीं दूसरे किसान कहते हैं कि सामान्य तौर पर दस कट्ठे की सब्जी के पौधों से पांच दिन में दस किलो उत्पादन होता है. वहीं ग्रोथ एक्टवेटर में इतनी ताकत है कि पांच दिन में एक क्वींटल तक उत्पादन बढ़ा सकता है. तीन महीने तक फलने वाले सब्जी के पौधे एक महीने बाद ही खराब हो जाते हैं.
बाजार में धड़ल्ले से बिक रही दवाइयां
बाजार में धड़ल्ले से कीटनाशक और सब्जी व फलों के आकार और वजन को बढ़ाने वाली दवाएं धड़ल्ले से बिक रही है. इन दवाओं में किन रासायनिक अवयवों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसे देखने वाला कोई नहीं है. किसान भी भरपूर फसल की चाहत में इन दवाओं का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.
जानकार बताते हैं कि एक वर्ष पहले तक एक नेटवर्क मार्केटिंग करने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी की एक दवा काफी लोकप्रिय हुई थी. उसका स्थान इन दिनों अन्य दवा ने ले लिया है. तीन कट्ठा में लगे केले की फसल के लिए पंद्रह लीटर में केवल चार एमएल दवा का प्रयोग किया जाता है और हैरतअंगेज तरीके से इसमें वृद्धि होती है.
कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक अलग राय रखते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र के परियोजना समन्वयक डा मिथलेश राय कहते हैं कि दवाओं का इस्तेमाल होते होते अब कीटों में प्रतिरोधक क्षमताओं का विकास हो गया है.
इसलिए इन कीटों पर नियंत्रण के लिए ज्यादा क्षमता वाले रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना ही होगा. इस वर्ष आम की फसल में यही देखने में आया. अब तक ऐसी कोई जैविक दवा नहीं आयी है जिनसे ये कीट निष्प्रभावी हो सकें. हालांकि प्लानोफिक्स दवा के बारे में उन्होंने कहा कि यह सुरक्षित दवा है. इसका इस्तेमाल फूलों को झड़ने नहीं देता इसलिए फलन बढ़ जाता है.
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