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चुनावी मुद्दा बन रहा है मधेपुरा का कंक्रीट स्लीपर प्लांट

Updated at : 02 Apr 2019 6:05 AM (IST)
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चुनावी मुद्दा बन रहा है मधेपुरा का कंक्रीट स्लीपर प्लांट

मधेपुरा : कोसी क्षेत्र की एक बहुप्रतीक्षित फैक्ट्री गत 14 साल से उद्धारक का बाट जोह रहा है. केंद्र व राज्य सरकार की उदासीनता व लापरवाही इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है. फैक्ट्री के कलपुर्जे व षयंत्र को जंग लग चुके हैं. परिसर भूत बंगला में तबदील हो चुका है. डेढ़ दशक से फैक्ट्री के […]

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मधेपुरा : कोसी क्षेत्र की एक बहुप्रतीक्षित फैक्ट्री गत 14 साल से उद्धारक का बाट जोह रहा है. केंद्र व राज्य सरकार की उदासीनता व लापरवाही इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है. फैक्ट्री के कलपुर्जे व षयंत्र को जंग लग चुके हैं.

परिसर भूत बंगला में तबदील हो चुका है. डेढ़ दशक से फैक्ट्री के उत्थान व विकास की तरफ आम हो या खास किसी की नजर नहीं गयी है. अब मधेपुरा की जनता इस चुनाव में कंक्रीट स्लीपर प्लांट को चुनावी मुद्दा बनाने की वकालत करने लगा है.
मालूम हो कि तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कोसीवासियों को कंक्रीट रेल स्लीपर प्लांट का तोहफा दिया था. मधेपुरा शहर के दक्षिण पूर्व दिशा में रेलवे ट्रैक के नीचे रेल की 17 एकड़ जमीन में स्थापित कंक्रीट स्लीपर फैक्ट्री अपने तारणहार का इंतजार कर रही है.
करोड़ों की लागत से बनी इस फैक्ट्री को उपयोग में नहीं लाये जाने से स्थानीय लोग हताश व मायूस है। अगर इस फैक्ट्री को चालू किया जाये तो मधेपुरा की अर्थव्यवस्था में चार चांद लग जायेगा.
14 वर्ष पूर्व शिलान्यास : वर्ष 2004 ई में मधेपुरा से सांसद बनकर रेलमंत्री बने लालू प्रसाद यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र को पहला तोहफा दिया था. जिससे कि कोसी क्षेत्र का विकास हो सके. लालू प्रसाद ने दस दिसंबर 2006 को दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर कारखाना का शिलान्यास किया था.
विडंबना यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि व रेल विभाग की उदासीनता और लापरवाही से कोसी की यह महत्वाकांक्षी, जनआकांक्षी कारखाना अबतक मूर्त रूप नहीं सका. मधेपुरा में रेल कंक्रीट स्लीपर फैक्ट्ररी वर्ष 2009 में ही बनकर तैयार हो गया था.
बताया जाता है कि वर्ष 2009 के लोक सभा चुनाव की घोषणा होने से ठीक एक दिन पहले उद्घाटन की तैयारियां की जा चुकी थी. उस समय कारखाना परिसर में कार्यक्रम को लेकर मंच भी तैयार किया गया था. मंच से तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव इसका उद्घाटन करते परंतु अचानक आचार संहिता लागू हो जाने के कारण उद्घाटन पर पानी फिर गया.
लगे हैं बड़े-बड़े संयंत्र व कल पुर्जे : कंक्रीट स्लीपर रेल कारखाना करीब सात करोड़ की राशि से बनकर तैयार हुआ था. जिसमें स्लीपर उत्पादन के लिए बड़े-बड़े संयंत्र लगाये गये. कारखाना बनाने का जिम्मा इरकॉन कंपनी को मिला. विभाग के एकरारनाम के आधार पर फैक्टरी का निर्माण करा दिया गया.
बेरोजगारों को मिलता काम
कारखाना को लेकर क्षेत्र के लोग इस बात को लेकर आशान्वित थे कि बेरोजगार मजदूरों को अब काम के लिए नहीं सोचना पड़ेगा. बाढ़ की विभीषिका से परेशान और रोजगार से महरूम कोसी क्षेत्र के सैकड़ों मजदूर वर्ग को काम मिलता. फैक्ट्री निर्माण को लेकर मजदूरों में काफी आस जगी थी.
जिले में कंक्रीट स्लीपर फैक्टरी के निर्माण हो जाने से अनेकों हाथों को काम मिल मिलता. वहीं स्थानीय छोटे व्यवसायी वर्ग भी कंक्रीट स्लीपर प्लांट के चालू होने से कई संभावनाएं पाल रखे थे. लेकिन इस फैक्ट्री के शुरू नहीं होने के कारण लोग इसे भूलने लगे हैं.
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