बीएनएमयू के वीसी, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक को लगा 24 हजार का जुर्माना
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 Jun 2017 4:37 AM (IST)
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मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि में कुलपति प्रो डाॅ अवध किशोर राय के प्रशासनिक व शैक्षणिक बदहाली को दूर कर विवि की कार्यशैली को गति प्रदान करने की मुहिम को बड़ा झटका लगा है. पटना उच्च न्यायालय ने कुलपति, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक पर आठ-आठ हजार यानि कुल 24 हजार का जुर्माना लगा कर […]
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मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि में कुलपति प्रो डाॅ अवध किशोर राय के प्रशासनिक व शैक्षणिक बदहाली को दूर कर विवि की कार्यशैली को गति प्रदान करने की मुहिम को बड़ा झटका लगा है. पटना उच्च न्यायालय ने कुलपति, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक पर आठ-आठ हजार यानि कुल 24 हजार का जुर्माना लगा कर एक बार फिर से विवि की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया. न्यायालय ने एक महीने में कुलपति, कुलसचिव व
बीएनएएमयू के वीसी…
परीक्षा नियंत्रक को अपने जेब से जुर्माना की राशि जमा करने का निर्देश दिया है. जुर्माना की राशि आवेदनकर्ता को प्रदान की जायेगी.
जुर्माना भरने का आदेश न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने सीडब्ल्यूजेसी 4542/2017 में 19 जून को सुनवाई के दौरान दिया. हालांकि विवि का कहना है कि तय समय सीमा पर विवि वकील की ओर से शपथ पत्र दायर नहीं किया गया. इसी कारण से अब कुलपति, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक को जुर्माना की राशि भरनी पड़ेगी. गौरतलब है कि बीसीए के छात्र अरविंद कुमार महतो ने लंबित परीक्षा परिणाम को प्रकाशित करने की मांग को लेकर न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी.
पेंडिंग रिजल्ट बना जुर्माने का कारण : न्यायालय के हालिया निर्देश से कहीं न कहीं विवि की छवि धूमिल हुई है, लेकिन इसके पीछे विवि व महाविद्यालय की लापरवाह कार्यशैली कम दोषी नहीं है.
बीसीए के छात्र अरविंद कुमार महतो सत्र 2010/13 के अंतिम वर्ष की परीक्षा में शामिल तो हुआ, लेकिन उसका रिजल्ट पेंडिंग रह गया. पेंडिंग का कारण यह बताया गया कि छात्र सेकेंड सेमेस्टर में फेल था, लेकिन सवाल उठता है कि विवि रेगुलेशन के अनुसार सभी सेमेस्टर में उत्तीर्णता हासिल करने के बाद ही छात्र का नामांकन सिक्स में होगा, तभी वह परीक्षा में शामिल हो सकता है. अरविंद के मामले में न तो कॉलेज और न ही विवि ने ध्यान दिया कि वह सेकेंड सेमेस्टर में फेल है. हालांकि अरविंद ने सेकेंड सेमेस्टर में फेल पेपर की परीक्षा दो नहीं तीन बार दी.
पेंडिग रिजल्ट की लंबी है फेहरिस्त
बीएन मंडल विवि में पेंडिंग रिजल्ट की काफी लंबी फेहरिस्त है. छात्रों का रिजल्ट विवि स्तर पर क्लियर नहीं किया जाता है, तब छात्र अंतिम में न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं. पटना उच्च न्यायालय में अभी एमजीएस के 270 व सीडब्ल्यूजेसी के 505 मामले चल रहे हैं. इसमें करीब 20 प्रतिशत केस रिजल्ट क्लियर कराने को लेकर छात्रों ने न्यायालय में दायर किया है. हालांकि कई मामलों में न्यायालय का अंतिम आदेश आ चुका है.
विवि रेगुलेशन के अनुसार छात्र जिस पेपर में दो बार फेल किया हो, तीन वर्ष के अंदर दो बार में पेपर की परीक्षा पास करनी होगी, लेकिन संबंधित छात्र ने तीसरे बार में फेल पेपर की परीक्षा पास की. इसके कारण उसका रिजल्ट पेंडिंग रह गया.
डाॅ नवीन कुमार, परीक्षा नियंत्रक, बीएन मंडल विवि, मधेपुरा
डेट से पूर्व ही लीगल सेल की ओर से विवि अधिवक्ता को जवाब बना कर भेज दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत विवि वकील की ओर से शपथ पत्र दायर नहीं किया गया. इसका खामियाजा विवि प्रशासन को भुगतना पड़ा.
डाॅ सुनील कुमार यादव, उप कुलसचिव, लीगल सेल, बीएनएमयू, मधेपुरा
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