1942 की अगस्त क्रांति में सूर्यगढ़ा में धधकी थी क्रांति की ज्वाला

Published at :13 Aug 2016 8:01 AM (IST)
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1942 की अगस्त क्रांति में सूर्यगढ़ा में धधकी थी क्रांति की ज्वाला

सूर्यगढ़ा/मेदनीचौकी : भारतीय स्वधीनता आंदोलन में सूर्यगढ़ा के नौजवानों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. 1942 की अगस्त क्रांति में यहां के चार वीर शहीद हुए जबकि दर्जनों स्वतंत्रता सेनानी जेल गये. लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण सरकारी अस्पताल में उपेक्षित पड़े अधे-अधूरे शिलालेख से आजादी की खातिर अपना सब कुछ न्योछावर कर देनेवाले कई वीर […]

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सूर्यगढ़ा/मेदनीचौकी : भारतीय स्वधीनता आंदोलन में सूर्यगढ़ा के नौजवानों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. 1942 की अगस्त क्रांति में यहां के चार वीर शहीद हुए जबकि दर्जनों स्वतंत्रता सेनानी जेल गये. लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण सरकारी अस्पताल में उपेक्षित पड़े अधे-अधूरे शिलालेख से आजादी की खातिर अपना सब कुछ न्योछावर कर देनेवाले कई वीर सपूतों के नाम तक अंकित नहीं है.
प्रखंड कार्यालय परिसर में नये शिलालेख लगाये जाने की मांग वर्षों से लटकी पड़ी हुई है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सूर्यगढ़ा के कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहूति दी. 1942 के अगस्त क्रांति में सूर्यगढ़ा में क्रांतिकारियों के खून का हर बूंद बारूद बन गया. 1942 की गरमी की शुरुआत में जापानी सेना ने जब वर्मा से अंगेरेजों को खेदड़ दिया तो सूर्यगढ़ा बाजार में जश्न मनाया गया. उन्हीं दिनों गांधी जी ने अंगरेजों भारत छोड़ो जैसा निर्णायक आंदोलन शुरू कर दिया. 9 अगस्त 1942 को गांधी जी गिरफ्तार कर लिये गये.
उनकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही सूर्यगढ़ा में भी क्रांति की चिंगारी फूट पड़ी. क्रांतिकारियों का जत्था सूर्यगढ़ा में इकठ्ठा हुआ और कांग्रेस कार्यालय में आपात बैठक के बाद थाना पर हमला बोलने का निर्णय लिया गया. रूपकांत शास्त्री, तिलकधारी चौधरी के साथ दर्जनों वीर सपूतों ने 13 अगस्त 1942 को सूर्यगढ़ा थाना व सरकारी कार्यालयों पर अधिकार कर तिरंगा फहराया.
शास्त्री जी को गिरफ्तार कर लिया गया, उन्हें दो साल की सजा हुई. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शास्त्री जी ने ही सूर्यगढ़ा में क्रांतिकारियों का नेतृत्व कर आंदोलन को एक नयी दिशा दी थी़ 18 अगस्त को पेट्रालिंग ट्रेन पर जा रहे अंगरेजों ने खेत में काम कर रहे सहूर ग्रामवासी कुशेश्वर धानुक को गोली मार दी. 21 अगस्त को गोरों ने उरैन निवासी बेनी सिंह को कजरा और उरैन के बीच गोली मार दी.
26 अगस्त को एक डिप्टी मजिस्ट्रेट व एक डीएसपी रैंक के अधिकारी के साथ अंगरेजी फौज के एक पूरी पलटन जहाज से सूर्यगढ़ा पहुंचा और सीधे कांग्रेस कार्यालय पर हमला बोल दिया. वहां तिलकधारी चौधरी को बुरी तरह पीट कर हिरासत में ले लिया. 29 अगस्त को कांग्रेस कार्यालय में एक बड़ी सार्वजनिक सभा हुई जिसमें डीएसपी ने गोली चलवा दी. जिसमें सलेमपुर गांव के 14 वर्षीय युवक कार्यानंद मिश्र व निस्ता के डोमन गोप शहीद हो गये. सलेमपुर के रामकिशुन सिंह के दाहिने जांघ में गोली लगी और उनका पैर नाकाम हो गया.
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