बड़हिया घाट से कोसों दूर गयी गंगा की धार

Published at :16 Mar 2016 6:11 AM (IST)
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बड़हिया घाट से  कोसों दूर गयी गंगा की धार

लखीसराय : जिले के बड़हिया से गंगा रूठ कर कोसों दूर जा रही है. अब गंगा स्नान करनेवालों को कोसों दूर पटना या बेगूसराय जिला जाना पड़ेगा. 1970 से 2000 तक गंगा की धारा कॉलेज घाट में बहती थी. 30 वर्षों तक गंगा की धारा कॉलेज घाट के आसपास बहती थी. इसमें स्थानीय लोग प्रतिदिन […]

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लखीसराय : जिले के बड़हिया से गंगा रूठ कर कोसों दूर जा रही है. अब गंगा स्नान करनेवालों को कोसों दूर पटना या बेगूसराय जिला जाना पड़ेगा. 1970 से 2000 तक गंगा की धारा कॉलेज घाट में बहती थी. 30 वर्षों तक गंगा की धारा कॉलेज घाट के आसपास बहती थी.

इसमें स्थानीय लोग प्रतिदिन गंगा स्नान कर स्थानीय मंदिरों में पूजा पाठ व जलाभिषेक किया करते थे. उसके अलावे प्रत्येक पूर्णिमा को देवघर, जमुई, नवादा, शेखपुरा लखीसराय के लोग यहां आकर गंगा स्नान किया करते थे व शवों का दाह संस्कार भी यहीं करते थे.

कटाव से दर्जनों गांव विलुप्त
गंगा की तेज धारा से बड़हिया प्रखंड के गंगा किनारे दर्जनों गांव कटाव से विलुप्त हो गये. जिनमें किशनपुर, खुशीयाल टोला, खुटहा गंगा के गर्भ में समा गयी. इतना ही नहीं सैकड़ों एकड़ में लगे आम का बागीचा भी इस धार में समा गया. गंगा से कटाव को देखते हुए सिंचाई विभाग ने कटाव की रोकथाम के लिये करोड़ों रुपये खर्च किये तब जाकर कटाव पर रोक लग पायी. कटाव रुकने के बाद गंगा फिर पुराने जगह पर लौट गयी. गंगा से कटाव बंद होते ही गंगा धीरे धीरे अपनी ओर मोड़ने लगी. 2013 से गंगा गांव वासियों से रूठ कर अपने पुराने स्थान पर जाने लगी.
हालांकि बरसात के दिनों में कॉलेज घाट में पानी आता है परंतु दो तीन माह के बाद फिर सूख जाती है. इस तीन महीना में गंगा स्नान करनेवालों को काफी गंगा स्नान करने में सहूलियत होती है. हालात ये है कि बड़हिया से कोसों दूर बड़ी गंगा भी सूखने की कगार पर है. गंगा के बीच बालू का टापू उग आये हैं. जेठ-बैसाख माह में बड़ी गंगा भी ढाब बन जायेगा. इसके बाद दो कोस दूर बेगूसराय जिले के मटिहानी प्रखंड के सिहमा बगडोब व शाम्हो प्रखंड के बीच से गुजरने लगी हैं. जिस कारण गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को काफी कष्ट उठाना पड़ेगा.
गंगा स्नान करने के लिये कोसों दूर जाना पड़ेगा. रामचंद्र सिंह, सत्यवान सिंह, मनोहर सिंह, संजय कुमार समेत अन्य लोगों ने बताया कि वर्षों पूर्व गंगा की मुख्य धारा इसी स्थान पर थी. परंतु गंगा के द्वारा कटाव किये जाने से बड़हिया गांव के समीप आ गये थे. लोग उस समय पैदल या बैल गाड़ी से तीन बजे रात्रि ही गंगा स्नान करने जाते थे. सुबह छह सात बजे घर लौट जाते थे. उस समय इस घाट का नाम विजय घाट था. सिहमा, बगडोब व रामदीरी गांव के लोगों का बाजार बड़हिया ही था. अब गंगा रूठ जाने से लोगों को गंगा स्नान करने में काफी कष्ट उठाना पड़ेगा.
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