पटाखें से करें परहेज, मीठी दीवाली मनाने का लें संकल्प

Updated at :01 Nov 2015 6:46 PM
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पटाखें से करें परहेज, मीठी दीवाली मनाने का लें संकल्प

पटाखें से करें परहेज, मीठी दीवाली मनाने का लें संकल्प फोटो संख्या:09-रविशंकर सिंह अशोकफोटो संख्या:10-अनिल वर्माप्रतिनिधि, लखीसरायरोशनी का पर्व दीपावली की तैयारी की जा रही है. लोग घरों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई को अंतिम रूप दे रहे हैं. इस मौके पर लोग खासकर युवा जमकर आतिशबाजी भी करते हैं, जो अक्सर घातक साबित होता है. […]

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पटाखें से करें परहेज, मीठी दीवाली मनाने का लें संकल्प फोटो संख्या:09-रविशंकर सिंह अशोकफोटो संख्या:10-अनिल वर्माप्रतिनिधि, लखीसरायरोशनी का पर्व दीपावली की तैयारी की जा रही है. लोग घरों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई को अंतिम रूप दे रहे हैं. इस मौके पर लोग खासकर युवा जमकर आतिशबाजी भी करते हैं, जो अक्सर घातक साबित होता है. इससे प्रदूषण भी काफी बढ़ता है. पटाखा मानव से अधिक बेजुवान जानवरों के लिये घातक होता है. पटाखों की तेज आवाज हमारे आसपास रहने वाले पशु-पक्षी सहम जाते हैं. दीवाली के दिन पक्षी तेज आवाज के कारण अपने घोंसले से निकलकर सुरक्षित ठिकाने तलाशते नजर आते हैं. आतिशबाजी के दौरान कई बार गंभीर हादसा भी हो जाते हैं. इसलिए दीपावली में हमें सावधानी बरतनी चाहिए. आवश्यकता है हम तेज आवाज व प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से परहेज करें ताकि दीपावली की रात उत्साह की जगह मातम न ला सके.खुशी का हो इजहार पर प्रदूषण फैला कर नहीं मुंगेर चेंबर ऑफ कॉमर्स सूर्यगढ़ा इकाई के अध्यक्ष रविशंकर सिंह अशोक ने बताया कि पटाखे बजा कर हमें अपनी खुशी का इजहार तो करना चाहिए लेकिन वैसे पटाखे जिसमें प्रदूषण कम हो. उन्होंने बताया कि प्रदूषण एक दिन की समस्या नहीं है. ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए यह आवश्यक है. दीपावली में सभी को दीपक का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए. दीया में सरसों या तीसी का तेल ही जलाये. हमें पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित रहने की आवश्यकता है.सामाजिक कार्यकर्ता व चेंबर के वरीय सदस्य अनिल वर्मा ने बताया कि हम लोगों को पटाखे वाली दीपावली नहीं , दीपक वाली दीपावली मनाना चाहिए. इस दिन सभी को दीपक जला कर खुशी का इजहार करना चाहिए और रोशनी फैलानी चाहिए. उन्होंने बताया कि कार्बन के उत्सर्जन को रोकने व पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिल कर प्रयास करने की जरूरत है.बाजार में शुरू हुई पटाखों की बिक्री दीपावली नजदीक आते ही बाजारों में पटाखों की बिक्री शुरू हो गयी है. खास कर थोक कारोबारी की दुकानों पर दुकानदारों की भीड़ देखी जा रही है. प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस पर लगाम लगाना मुश्किल है. ऐसे में हमारी जिम्मेवारी है कि आतिशबाजी का बहिष्कार कर धन की बरबादी रोकने का काम करें. प्रभात खबर द्वारा ग्लोबल वार्मिंग से देश को बचाने के लिए मीठी दीपावली मनाने का आह्वान किया जा रहा है जो बगैर आपके सहयोग से पूरा नहीं हो सकता. क्या बिना पटाखे की दीपावली नहीं मनायी जा सकती. ग्लोबल वार्मिंग रोकने में इस दीपावली के मौके पर आपकी क्या भूमिका होगी, आप हमें फोन या व्हाट्स एप के जरिये 8271436556 पर मैसेज व इससे जुड़ी तसवीर भेज सकते हैं.चाइना लाइटों के कारण कुम्हार के पारंपरिक व्यवसाय पर मंडरा रहा खतरा फोटो संख्या:11चित्र परिचय-मिट्टी का बरतन तैयार करता कुम्हार प्रतिनिधि, लखीसरायरोशनी का पर्व दीपावली को चंद ही दिन शेष बचे हैं. पर्व में दीपों के महत्व को देखते हुए कुम्हार भी दीप बनाने में जुट गये हैं. दीपावली मे दीया के अलावा बड़े पैमाने पर कलश, गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा के अलावे मिट्टी के बरतनों की विशेष उपयोगिता है. ऐसे में कुम्हार भी इन सामानों की तैयारी में महीने भर पहले से जुट जाते हैं. जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आ रही है. कुम्हार के चाक तेजी से घूमने लगे हैं. हालांकि अब दीया व अन्य मिट्टी के समान की खरीदारी कम होती है. इस कारण कुम्हार के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न होने लगा है. कुम्हार राजेंद्र पंडित ने बताया कि एक चाक पर दिनभर में अधिक से अधिक पांच सौ दीये बनाये जा सकते हैं. कड़ी मेहनत कर भी मजदूरी नहीं मिल पाता. अब चाइनीज बल्ब के बाजार में आ जाने से मिट्टी के दीये की बिक्री पहले की अपेक्षा बहुत कम हो गयी है. लेकिन परिवार का भरण-पोषण करने के लिए इस व्यवसाय के अलावे कोई अन्य रोजगार नहीं होने की वजह से मजबूरन यह रोजगार करना पड़ रहा है.पारंपरिक व्यवसाय पर मंडरा रहा खतराराजू पंडित ने बताया कि बाजार चाइनीज सामानों से पटा हुआ है. चाइनीज लाइटों की चकाचौंध के आगे मिट्टी का दीया नहीं बिक पाता है. दीपावली के समय रंग-बिरंगे मिट्टी के खिलौने बच्चों का पसंदीदा रहता है. आज मिट्टी का खिलौना और दीया की खरीदारी कम हो गयी है. जिस कारण इस पेशा से जुड़े लोगों के पारंपरिक व्यवसाय पर खतरा मंडराने लगा है. पीढ़ी दर पीढ़ी इस पेशा से जुड़े होने के बावजूद आज कल चाइना लाइटों का प्रचलन बढ़ने से रोजी-रोटी पर प्रभाव पड़ने लगा है. अगर यही परिस्थिति रही तो पुरखों के इस व्यवसाय को छोड़ना पड़ेगा.

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