सुहागिनों ने किया सोलह श्रृंगार का पर्व करवा चौथ

Updated at :30 Oct 2015 6:33 PM
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सुहागिनों ने किया सोलह श्रृंगार का पर्व करवा चौथ

सुहागिनों ने किया सोलह श्रृंगार का पर्व करवा चौथ प्रतिनिधि, लखीसरायअखंड सौभाग्य की कामना के साथ शुक्रवार को महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा व अपने पति के लंबी उम्र की कामना की. रात्रि में चंद्र देव के दर्शन कर पति के हाथों व्रत का पारण किया गया. ज्योतिषविद् उमांशंकर व्यास जी के मुताबिक […]

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सुहागिनों ने किया सोलह श्रृंगार का पर्व करवा चौथ प्रतिनिधि, लखीसरायअखंड सौभाग्य की कामना के साथ शुक्रवार को महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा व अपने पति के लंबी उम्र की कामना की. रात्रि में चंद्र देव के दर्शन कर पति के हाथों व्रत का पारण किया गया. ज्योतिषविद् उमांशंकर व्यास जी के मुताबिक इस बार शुक्रवार व रोहिणी नक्षत्र में करवा चौथ का व्रत होने के कारण विशेष संयोग बना है. इस विशेष संयोग में व्रत रखने वाली महिलाओं का सुहाग अटल रहेगा. उन्होंने बताया कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन व पूजन करने से ही भगवान गणेश का भी पूजन हो जाता है.सरगी के बाद शुरू हुआ व्रतसरगी के बाद शुरू हुआ करवा चौथ के व्रत में महिलाओं ने दिन भर बिना अन्न जल ग्रहण किये भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश व कार्तिक की पूजा की. मान्यता है कि इस दिन शिव परिवार की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. शाम ढलने के बाद छलनी के प्रयोग से चंद्र देव का दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देकर सुहागिनों ने अपने पति के पैर छूते हुए उनसे आशीर्वाद लिया. फिर पति देव को प्रसाद देकर उन्हें भोजन कराने के उपरांत खुद भोजन ग्रहण किया. सुबह से ही पूजा की तैयारी में जुटी रही महिलाएंसुबह से ही महिलाओं ने करवा चौथ व्रत के पूजा की तैयारी शुरू कर दी. घरों में गुझिया, हलुआ आदि बनाये गये. आठ पूरियों की अठवरी बनाया गया. इसके अलावे मिट्टी के बरतन में चीनी की चाशनी डाल कर नैवेद्य बनाया गया. पीली मिट्टी से माता पार्वती व गणेश की प्रतिमा बना कर माता पार्वती की गोद में गणेश जी को विराजमान कर संध्या में शिव परिवार की पूजा की गयी. मां गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विराज कर लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्य सुहाग, श्रृंगार सामग्री अर्पित कर पूजा की गयी. व्रती महिलाओं ने सारा दिन मां पार्वती, महादेव शिव व गणेश जी का ध्यान किया. गुझिया का हैं विशेष महत्व इस व्रत में डलिया में चढ़ाने वाले पकवानों में गुझिया का विशेष महत्व है. इस पर्व में महिलाओं द्वारा रस वाला गुझिया, खोवा गुझिया सहित कई अन्य प्रकार का गुझिया बनाया गया व इसे पूजा में चढ़ा कर प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया गया.

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