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2020 पुलिस के लिए रहेगा चुनौती भरा

Updated at : 22 Jan 2020 8:28 AM (IST)
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2020 पुलिस के लिए रहेगा चुनौती भरा

लखीसराय : सन 2019 बीतने के बाद 2020 वर्ष पुलिस के लिए चुनौती भरा वर्ष होगा. 2020 में ही बिहार विधानसभा का चुनाव संपन्न कराना है. यह जिला नक्सल प्रभावित है, लखीसराय का बोर्डर जमुई जिला है और जमुई का बोर्डर झारखंड राज्य से जुड़ा है. यही कारण है कि लखीसराय जिला भी नक्सल प्रभावित […]

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लखीसराय : सन 2019 बीतने के बाद 2020 वर्ष पुलिस के लिए चुनौती भरा वर्ष होगा. 2020 में ही बिहार विधानसभा का चुनाव संपन्न कराना है. यह जिला नक्सल प्रभावित है, लखीसराय का बोर्डर जमुई जिला है और जमुई का बोर्डर झारखंड राज्य से जुड़ा है. यही कारण है कि लखीसराय जिला भी नक्सल प्रभावित जिला में सुमार है. उक्त बातें सोमवार की रात समाहरणालय स्थित अतिथिगृह में सूबे के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने प्रेस वार्ता के दौरान कही.

उन्होंने कहा कि अभी की अपेक्षा पूर्व में बिहार जल रहा था. कहीं नरसंहार तो कहीं नक्सली लैंड माइंस लगाकर वाहन व अधिकारी को उड़ा देते थे. वर्तमान समय में ऐसे वारदातों में कमी आयी है. उन्होंने कहा कि पुलिस बल की संख्या के साथ-साथ पुलिस संसाधन में भी बढ़ोत्तरी हुई है. हाल के दिनों में हजारों पुलिस वाहनों की खरीदारी हुई थी.
प्रत्येक जिला में पुलिस लाइन एवं थाना भवन का निर्माण कराया गया है और कराया भी जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष तक एक भी थाना भवहीन नहीं होगा. उन्होंने कहा कि आज की तारीख में एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक हथियार पुलिस बल के पास मौजूद हैं. पुलिस की संख्या के साथ-साथ अधिकारियों की संख्या भी बढ़ायी जा रही है. अगले साल तक 25 हजार सिपाही की भर्ती कर दी जायेगी.
वर्तमान में 12 हजार सिपाही की बहाली की प्रक्रिया जारी है. वहीं दो हजार निरीक्षक व 45 हजार अवर निरीक्षक को प्रशिक्षित किया जा रहा है. वहीं महिला पुलिस बल एवं अधिकारियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है. महिला पुलिस भी बहादुरी से अपना काम कर रही है. कहीं से महिला पुलिस की कोई शिकायत नहीं आ रही है.
अपराध नियंत्रण पर उन्होंने कहा कि होली, दशहरा, ईद, मुहर्रम जैसे पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो रहे हैं. खासकर जुलूस वाला त्योहार पुलिस के लिए काफी चुनौतीपूर्ण त्योहार होता है. उन्होंने विगत वर्ष से दंगा, नरसंहार जैसे घटनाओं पर विराम लगने की बात कही. उन्होंने कहा कि वे एसपी से लेकर डीजीपी तक का सफर किया है, इस दौरान रोपनी, कटनी में गोली चलने की बात आम होते भी देखी थी.
बेगूसराय के शाम्हो दियारा हो या बड़हिया से सूर्यगढ़ा के सूर्यपुरा तक अपराध का बोलबाला था. वह अब समाप्त हो चुका है. अपरहण की खेती बंद हो चुकी है. उन्होंने कहा कि अपराध को घटाने में समाज के लोगों की भी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है. सिर्फ पुलिस अकेले अपराध पर नियंत्रण नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि पूरे देश में तीसरा सबसे बड़ी आबादी बिहार की है, जिस पर पुलिस अकेले काफी नहीं है.
उन्होंने कहा कि मीडिया भी अपराध को बिना पुष्टि के नहीं चलावे. हाल ही के दिनों में मीडिया टीवी पर बक्सर कांड को हैदराबाद कांड से जोड़कर कई बाद दिखा रहे थे, जबकि बक्सर में लड़की के पिता एवं भाई ने गोली मारकर हत्या कर दी थी एवं शव को पुआल से जला दिया था, जिसे मीडिया के द्वारा दुष्कर्म का मामला बनाकर लड़की की दुष्कर्मी के द्वारा गोली मारकर हत्या करने की बात कही जा रही थी. उन्होंने मीडिया से आह्वान किया कि खबरों के बारे में पूरी जानकारी लेकर ही खबर चलायें. उन्होंने कहा कि समाज एवं मीडिया अपराधी तत्व के लोगों को तरजीह नहीं दें.
समाज में अपराधी को संरक्षण एवं सम्मान देना बंद होगा तभी अपराध की संस्कृति पर रोक लगेगा. अपराधियों को संरक्षण देने एवं माला पहना कर सम्मान करने से आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश जायेगा. प्रेस वार्ता के दौरान एसपी सुशील कुमार, एसडीपीओ रंजन कुमार व अन्य उपस्थित थे.
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