इलाज होता नहीं, बढ़ जाती मुसीबत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Oct 2017 4:14 AM (IST)
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लखीसराय : स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिला मुख्यालय लखीसराय में स्थापित 100 शैय्या वाला सदर अस्पताल मरीजों को सुविधा देने में असमर्थ साबित हो रहा है. कटे-फटे, सिर फटा या फिर हाथ-पैर की टूट-फूट के मामलों में खून देखते ही चिकित्सक रेफर करने में जुट जाते हैं. हिंसक घटना हो या दुर्घटना फस्ट एड के […]
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लखीसराय : स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिला मुख्यालय लखीसराय में स्थापित 100 शैय्या वाला सदर अस्पताल मरीजों को सुविधा देने में असमर्थ साबित हो रहा है. कटे-फटे, सिर फटा या फिर हाथ-पैर की टूट-फूट के मामलों में खून देखते ही चिकित्सक रेफर करने में जुट जाते हैं. हिंसक घटना हो या दुर्घटना फस्ट एड के साथ ही मरीजों को रेफर करना चिकित्सकों का एक मात्र कार्य है. जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा रेफर किये मरीजों को भी सदर अस्पताल से सीधे पटना ही रेफर कर दिया जाता है. ऐसे में एकाएक आर्थिक बोझ को उठा पाने में असमर्थ लोगों की इलाज के अभाव में मौत हो जाती है.
कहने को तो लखीसराय जिला को सूबे तीन -तीन मंत्री के साथ एक केंद्रीय मंत्री का भी आशीर्वाद प्राप्त है. इसके बावजूद ब्लड बैंक की कमी, सिजेरियन डॉक्टरों का अभाव, एंबुलेंस को लेकर परेशानी आदि समस्याओं से सदर अस्पताल आज भी ग्रसित है. जबकि प्रतिदिन लगभग चार सौ से पांच सौ मरीजों का सदर अस्पताल में पहुंचना जारी है. अधिकांश को दो चार टिकिया थमाकर चलता कर दिया जाता है.
इनमें से अधिकांश मरीज सदर अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त एक्स-रे,ब्लड सूगर आदि जांच को लेकर पहुंचते हैं. गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड का लाभ लेने को लेकर सदर अस्पताल आती हैं. सदर अस्पताल में एजेंसी के माध्यम से एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की गयी है. जिसमें प्रशिक्षित टेक्नीशियन का अभाव है. फिर भी मुफ्त सुविधा के नाम पर प्रतिदिन एक सौ से उपर महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है.इसके अतिरिक्त गैस, बदहजमी और स्लाइन लेने को लेकर मरीज पहुंचते हैं. लेकिन घटना, दुर्घटना से पीड़ित लोगों के इलाज की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. यहां तक कि प्रशिक्षित ड्रेसर तक का अभाव बना रहता है.
बड़ी घटना में मरीजों ,पीड़ितों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय चिकित्सक की मदद लेनी पड़ती है. इस संबंध में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह एसीएमओ डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि घटना दुर्घटना में प्राय: ब्लड की आवश्यकता पड़ती है. जो यहां क्या शहर में ही कहीं उपलब्ध नहीं है. सिर में गहरी चोट या जख्म को लेकर सिटी स्कैन सुविधा का अभाव है.उपर से सिजेरियन चिकित्सक भी पदस्थापित नहीं है. ऐसे में मरीजों की स्थिति नियंत्रित करने के हर संभव प्रयास के साथ व्यवस्थित एम्बुलेंस सुविधा देकर रेफर कर दिया जाता है. सदर अस्पताल में चिकित्सीय व्यवस्था में सुधार की अत्यंत आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ब्लड बैंक की स्थापना को लेकर विभागीय प्रयास किये जा रहे हैं.
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