एमवीआइ ने समय पर उपलब्ध नहीं करायी गाड़ी

किशनगंज : राजस्थान से तस्करी पर किशनगंज लाये गये 60 ऊंट जिसे सीमा पार बांग्लादेश भेजा जाना था परंतु दिल्ली के ध्यान फाउंडेशन के सूचना के आलोक में डीएम के निर्देश पर पुलिस ने ऊंटों को खगड़ा हाट परिसर में ही जब्त कर लिया था़ जब्त ऊंट के मामले में माननीय न्यायालय के मुख्य न्यायिक […]
किशनगंज : राजस्थान से तस्करी पर किशनगंज लाये गये 60 ऊंट जिसे सीमा पार बांग्लादेश भेजा जाना था परंतु दिल्ली के ध्यान फाउंडेशन के सूचना के आलोक में डीएम के निर्देश पर पुलिस ने ऊंटों को खगड़ा हाट परिसर में ही जब्त कर लिया था़ जब्त ऊंट के मामले में माननीय न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पन्ना लाल ने सुनवाई करते हुए उंटों को वापस राजस्थान भेजने के लिए सुपूर्द किया़ जब्त सभी 60 ऊंट को राजस्थान ले जाने के लिए 30 ट्रक की आवश्यकता थी़
विभागीय सूत्रों के अनुसार डीएम पंकज दीक्षित ने एमवीआइ विवेक कुमार को निर्देश दिया कि ध्यान फाउंडेशन को वाहन उपलब्ध कराये़ लेकिन एमवीआइ ने वाहन उपलब्ध नहीं कराया़ न्यायालय ने 5 दिसंबर को ऊंट को वापस राजस्थान ले जाने का निर्देश दिया था़ लेकिन डीएम के आदेश के बावजूद एमवीआइ ने आखिरकार ऊंट को राजस्थान ले जाने के लिए 15 दिसंबर तक वाहन उपलब्ध नहीं कराया़ समय का लाभ लेते हुए पक्षकार ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश का दरवाजा खटखटाया़
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 15 दिसंबर को अगले आदेश तक के लिए ऊंट को राजस्थान ले जाने पर रोक लगा दिया़ अब सबसे गंभीर सवाल यह है कि डीएम के आदेश के बावजूद एमवीआइ ने 10 दिनों तक वाहन उपलब्ध कराने में क्यों नहीं रुचि दिखायी. आखिर किस मंशा से एमवीआइ वाहन उपलब्ध कराने में टालमटोल का रवैया अपनाये हुए थे़ उल्लेखनीय है कि एक ऊंट की कीमत कम से कम एक लाख रुपये होती है़ ऊंट राजस्थान वापस चले जाने पर पक्षकार को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा़
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