वातावरण को स्वच्छ बनाये रखने की अपील

Published at :12 Feb 2014 5:25 AM (IST)
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वातावरण को स्वच्छ बनाये रखने की अपील

किशनगंजः राहत संस्था व बीवीएचए के द्वारा ऑक्सफेम इंडिया के सौजन्य से मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलवा व मध्य विद्यालय दामलबाड़ी में वॉश मेला का आयोजन किया गया. इस मौके पर बीवीएचए के सदस्यों ने स्थानीय लोगों को बाल विवाह, महिला अत्याचार आदि के प्रति जागरूक करते हुए वातावरण को स्वच्छ बनाये रखने की […]

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किशनगंजः राहत संस्था व बीवीएचए के द्वारा ऑक्सफेम इंडिया के सौजन्य से मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलवा व मध्य विद्यालय दामलबाड़ी में वॉश मेला का आयोजन किया गया. इस मौके पर बीवीएचए के सदस्यों ने स्थानीय लोगों को बाल विवाह, महिला अत्याचार आदि के प्रति जागरूक करते हुए वातावरण को स्वच्छ बनाये रखने की गुजारिश की.

उन्होंने कहा कि आज हर घर में मोबाइल तो है पर शौचालय नहीं है. खुले में शौच करने के कारण ग्रामीण कई प्रकार की बीमारियों से घिर जाते है. वहीं वक्ताओं ने 18 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं की शादी पर रोक लगाने की बात कही. गर्भवती माताओं को चार जांच चार बार कराने की सलाह देते हुए संस्थागत प्रसव पर जोर दिया. जिससे जच्च व बच्च दोनों स्वस्थ रह सके. इस मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने वचन दिया कि अपने अपने घरों में जल्द शौचालय निर्माण किया जायेगा. इस मौके पर राजू शर्मा, दानिश इकबाल, विक्टर, जावेद अख्तर, राजीव कुमार आदि के साथ साथ अन्य गणमान्य व्यक्त उपस्थित थे.

जिले में और भी हैं अशोक सरीखे शिक्षक

किशनगंजः स्थानीय डीइओ कार्यालय में प्रतिनियोजित सिंघिया उच्च विद्यालय के शिक्षक अशोक चौधरी द्वारा पदस्थापना के चंद वर्षो के अंदर ही अकूत संपत्ति अजिर्त करना स्थानीय शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बानगी भर है. जिले में ऐसे दर्जनों अशोक चौधरी मिल जायेंगे. जो नियोजन से पहले टूटी-फूटी साइकिल की सवारी किया करते थे. परंतु आज उनकी संपत्ति को देखकर भ्रष्टाचार की बू आती है. ऐसे शिक्षकों की आलीशान अट्टालिका के पोर्टिको में खड़ी चमचमाती गाड़ियां राह होकर गुजरने वालों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है. जबकि ईमानदारी की रोटी खाने वाले अन्य शिक्षक उनके वैभव को देख सिर्फ आहें भर कर रह जाते है.

नियोजित शिक्षकों की आर्थिक स्थिति में अचानक आया परिवर्तन कर्मचारियों और पदाधिकारियों के आपसी तालमेल से ही संभव हो सका है. गीभ एंड टेक के आसान फॉमूले पर कार्य करते हुए पदाधिकारी व शिक्षक दोनों मालामाल हो जाते है.

दरअसल सारा मामला सरकार द्वारा प्रतिवर्ष स्कूलों को दी जाने वाली लाखों की राशि के बंदरबांट से ही संभव हो पाता है. स्कूलों में चलने वाले मिड डे मील, साइकिल व पोशाक राशि, छात्रवृत्ति राशि, रख-रखाव की राशि व भवन निर्माण कामधेनु साबित हो रहा है. कई नियोजित शिक्षक फर्श से अर्श तक पहुंच गये है. जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने वाद संख्या 6724/2008 के आलोक में स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में नियोजित शिक्षकों को प्रधानाध्यापक का पद नहीं सौंपा जाना है. परंतु विभागीय अधिकारियों से तालमेल बैठा कर आज जिले के आधे से अधिक स्कूलों में नियोजित शिक्षक वर्षो से प्रधानाध्यापक के पद पर उच्च न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए काबिज है.

नतीजतन जिले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गयी है. जिले के शिक्षक अब शिक्षक कम ठेकेदार ज्यादा बन गये है. वहीं दूसरी ओर जिले के स्कूलों में तैनात सहायक शिक्षकों की स्थिति दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है. इतना ही नहीं कई शिक्षक तो इतने प्रभावशाली हो गये कि विद्यालय वे नहीं जाते वरन उपस्थिति पंजी उनके घर हाजिरी बनाने के लिए पहुंचायी जाती है. ऐसे शिक्षकों को वरीय पदाधिकारियों को वरदहस्त प्राप्त है.

सरकारी उदासीनता का दंश ङोल रहे सहायक शिक्षक जहां धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को मनवाने में व्यस्त है वहीं दूसरी ओर समकक्ष वेतनमान के प्रधानाध्यापक पद पर आसीन नियोजित शिक्षकों की संपत्ति में वृद्धि होती रही. स्थानीय प्रशासन ने पांच वर्ष पूर्व भी शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागार किया था. परंतु उस वक्त भी सिर्फ छोटी मछली ही जाल में फंसी थी. उम्मीद है इस बार पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग के रैकेट का पर्दाफाश करेगी.

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