उपेक्षा . कोचाधामन प्रखंड की मजकुरी पंचायत के लोग विकास की दौड़ में हैं पीछे

Published at :03 Mar 2016 1:39 AM (IST)
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उपेक्षा . कोचाधामन प्रखंड की मजकुरी पंचायत के लोग विकास की दौड़ में हैं पीछे

कटाव का दंश झेल रहे पंचायतवासी मजकुरी पंचायत के आधा दर्जन गांव कनकई, रेतुआ नदी व रिक्खी धार का दंश झेल रहा है. प्रखंड को भौगोलिक दृष्टि से देखा जाये तो मजकुरी पंचायत को कनकई नदी विभक्त करती है. अगर समय रहते यहां कटाव निरोधी कार्य नहीं कराये गये, तो इस पंचायत का अस्तित्व मिट […]

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कटाव का दंश झेल रहे पंचायतवासी

मजकुरी पंचायत के आधा दर्जन गांव कनकई, रेतुआ नदी व रिक्खी धार का दंश झेल रहा है. प्रखंड को भौगोलिक दृष्टि से देखा जाये तो मजकुरी पंचायत को कनकई नदी विभक्त करती है. अगर समय रहते यहां कटाव निरोधी कार्य नहीं कराये गये, तो इस पंचायत का अस्तित्व मिट जायेगा.
कोचाधामन : समस्याओं से जूझ रहे प्रखंड के मजकुरी पंचायत के विभिन्न जाति संप्रदाय के लोग विकास की इस दौड़ में काफी पीछे हैं. मजकुरी पंचायत को अगर मजबूरी पंचायत का नाम दिया जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. इस पंचायत को भौगोलिक दृष्टि से देखा जाये तो एक दर्जन गांव में से आधा दर्जन गांव को विभक्त करने वाली कनकई नदी, पलासी क्षेत्र से जाने वाली रेतुआ नदी एवं जोकी प्रखंड से आने वाली रिक्खी धार का वर्षों से दंश झेल रहा है. विगत चार दशक से असूरा एवं मजकुरी जैसे बड़े गांव नदी की कटाव को झेल रहे हैं.
अब इसका अस्तित्व खतरे में दिख रहा है. नदी के भीषण कटाव से सुरक्षा हेतु जल नि:सरण विभाग द्वारा कई बार कटाव निरोधक कार्य किया गया. परंतु वह नाकाफी साबित हो रहा है. इस आधा दर्जन गांव को भीषण कटाव से निजात पाने के लिए कटाव पीड़ितों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विधायक, सांसद एवं जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया. परंतु इस दिशा में अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पायी.
पीड़ितों का दर्द महसूस करते हुए पंचायत की दुर्दशा पर स्थानीय युवा मुखिया राजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि इस आधा दर्जन गांव को भीषण कटाव से मुक्ति दिलाने में पंचायत अकेले सक्षम नहीं है. इसके लिए बिहार तथा केंद्रीय सरकार की योजना ही मुक्ति दिला सकता है. इस बड़े कार्य के लिए विधायक एवं सांसद को आगे आना होगा तभी संभव होगा. इस भीषण कटाव से निजात पाने के लिए हमने विधायक एवं सांसद से नदी के तटबंध निर्माण के लिए बोल्डर पीचिंग हेतु अनुशंसा भी की है.
इसके अलावा ये लोग प्रभावित गांवों का दौरा भी कर चुके हैं. मुखिया श्री यादव ने बताया कि असुरा चैनपुर, जीवनपुर-मजकुरी पूरब, गोसाईपुर-मजकुरी पश्चिम, नेंगसिया-चरघरिया पुल तक बोल्डर पीचिंग तटबंध का निर्माण नहीं कराया गया तो नदी के तेज धार में पंचायत की दिशा व दशा एवं अस्तित्व समाप्त हो जायेगा.
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