केस-मुकदमे के झंझट से बेहतर है लोक अदालत

किशनगंज : लोक अदालत मामलों के निस्तारण का एक सशक्त मंच है इससे पक्षकारों में रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं. वर्तमान समय में लोक अदालत की महत्ता काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है. ये बाते जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डीजे) रमेश कुमार रतेरिया ने कही. वे शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार […]
किशनगंज : लोक अदालत मामलों के निस्तारण का एक सशक्त मंच है इससे पक्षकारों में रिश्ते प्रगाढ़ बनते हैं. वर्तमान समय में लोक अदालत की महत्ता काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है. ये बाते जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डीजे) रमेश कुमार रतेरिया ने कही. वे शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सौजन्य से आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के उदघाटन के मौके पर बोल रहे थे.
इसके पूर्व एक बुजुर्ग पक्षकार ने डीजे व डीएम, डीबीए के अध्यक्ष व महासचिव व अन्य न्यायिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर लोक अदालत का उदघाटन किया. श्री रतेरिया ने बताया कि लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक, दीवानी, श्रम, जमीन विवाद, मनरेगा, विद्युत, वन विभाग, बैंक, टेलीफोन के अलावा अन्य विभागों से जुड़े मामलों का निपटारा किया जायेगा. जिला पदाधिकारी ने कहा कि अक्सर कई ऐसे मामलों में देखा गया है कि कई वर्षों तक मुकदमा लड़ने के बाद अंत में समझौता के माध्यम से ही वादों का निपटारा होता है. अगर यही समझौता विवाद के शुरूआती दौर में किया जाए तो मुवक्किल समय के साथ आर्थिक क्षति से भी बच सकेंगे.
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