प्रधान सचिव ने सीएस से मांगी रिपोर्ट

Published at :28 Sep 2016 5:41 AM (IST)
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प्रधान सचिव ने सीएस से मांगी रिपोर्ट

संभावना . अलौली पीएचसी के पूर्व प्रभारी पर कस सकता है शिकंजा अलौली पीएचसी के पूर्व प्रभारी डॉ आरएन चौधरी के कार्यकाल में हुई गड़बड़ी की दबी फाइलें फिर से खुल सकती हैं. प्रधान सचिव से शिकायत के बाद सीएस से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगे जाने की खबर से स्वास्थ्य महकमे खलबली मच गयी […]

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संभावना . अलौली पीएचसी के पूर्व प्रभारी पर कस सकता है शिकंजा

अलौली पीएचसी के पूर्व प्रभारी डॉ आरएन चौधरी के कार्यकाल में हुई गड़बड़ी की दबी फाइलें फिर से खुल सकती हैं. प्रधान सचिव से शिकायत के बाद सीएस से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगे जाने की खबर से स्वास्थ्य महकमे खलबली मच गयी है.
खगड़िया : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अलौली के पूर्व प्रभारी डॉ आरएन चौधरी के कार्यकाल में हुई गड़बड़ी मामले में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन ने सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की है. प्रधान सचिव द्वारा मामले में संज्ञान लेने के बाद पूर्व पीएचसी प्रभारी डॉ चौधरी पर गाज गिरने की संभावना बढ़ गयी है. बता दें कि पीएचसी अलौली में प्रभारी चिकित्सा प्रभारी रहते डॉ चौधरी की मिलीभगत से कई गड़बड़ी को अंजाम दिया गया. हर बार जांच के आदेश हुए लेकिन कार्रवाई की बजाय मामले की लीपापोती होती रहा.
डीएम ने हटाया था प्रभारी के पद से
बीते दिनों डीएम जय सिंह के निरीक्षण के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर डॉ चौधरी को पीएचसी प्रभारी के पद से हटाते हुए उनके स्थान पर डॉ संजीव कुमार को प्रभारी बनाया गया, लेकिन उनके कार्यकाल में हुई गड़बड़ी मामले में जांच व कार्रवाई की रफ्तार कुंद पड़ गयी. चाहे लापरवाही के कारण लाखों की दवा एक्सपायर करने का मामला हो या फर्जी बंध्याकरण से लेकर प्रसव का. ऐसी हेराफेरी की लिस्ट लंबी होती गयी लेकिन कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाने के कारण आज भी डॉ आरएन चौधरी पीएचसी में चिकित्सा पदाधिकारी बने हुए हैं. हालांकि सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि जल्द ही पुराने मामलों की फाइलों की तहकीकात कर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
अवर सचिव का आदेश भी रहा बेअसर
एक सप्ताह में मांगी थी रिपोर्ट, चार माह में जांच भी नहीं हुई पूरी
पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग में अवर सचिव द्वारा दिये गये जांच के आदेश भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. अलौली निवासी सतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सहित अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर पीएचसी के पूर्व प्रभारी डॉ आरएन चौधरी के खिलाफ शिकायत की थी. आवेदन के आलोक में स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव ने सिविल सर्जन को जांच का आदेश पत्रांक 426(9) दिनांक 18.04.16 को दिया था. अवर सचिव के निर्देश बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ने पांच मई को अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला मलेरिया पदाधिकारी की तीन सदस्यीय टीम का गठन कर आवेदन में वर्णित बिंदुओं के आलोक में जांच कर एक सप्ताह के अंदर प्रतिवेदन तलब किया, लेकिन इस आदेश के लगभग चार महीना बीतने को हैं, कार्रवाई तो दूर जांच तक पूरी नहीं हो पायी है.
सूत्रों की मानें तो पिछले दरवाजे से खेल के सहारे पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल कर लीपापोती कर दी गयी. गड़बड़ी के पुराने मामलों में आरोप के घेरे में आये पीएचसी प्रभारी डॉ चौधरी पर कोई कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़ा कर रहा है. अब प्रधान सचिव द्वारा आदेश देने के बाद पीएचसी के पूर्व प्रभारी पर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है.
फर्जी प्रसव के आधार पर जननी बाल सुरक्षा योजना में हेराफेरी
फर्जी पैथोलॉजी संचालक से सांठगांठ
बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवा हुई बरामदगी
बीडीओ द्वारा सील कमरे के साथ छेड़छाड़
बंध्याकरण ऑपरेशन में फर्जीवाड़ा
प्रसव में उगाही की शिकायत
स्वास्थ्य कार्यक्रम के क्रियान्वयन में हेराफेरी
हटाये गये संविदाकर्मी बीएचएम की फिर से नियुक्ति
अलौली अस्पताल में केमिकल हुआ एक्सपायर
आरआइ कार्यक्रम के वाहनों का किया दुरुपयोग
पल्स पोलियो कार्यक्रम की गाड़ियों का कागज पर परिचालन
अस्पताल में किया उगाही का खेल
दोषी स्वास्थ्यकर्मी पर कार्रवाई की बजाय मामले की लीपापोती
रोगी कल्याण समिति की अनदेखी
आशा-ममता के प्रोत्साहन राशि देने में आनाकानी
स्नेहा कर रही थी कोटा में मेडिकल की तैयारी
खुदकुशी करने की सूचना मिलने के साथ ही घर में मचा कोहराम
आत्महत्या के कारण का नहीं चल सका पता
महेशखूंट : खगड़िया की छात्रा की मौत कोटा में होने के बाद महेशखूंट के पूबारी टोला में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. मृतक छात्रा के माता पिता कोटा के लिए रवाना हो चुके है.
मिली जानकारी के अनुसार कोटा के एलेन कैरियर में पढ़ रही महेशखूंट की छात्रा ने बीते सोमवार को आत्महत्या कर ली थी. घर पर सूचना मिलने के साथ ही घर में कोहराम मच गया है. महेशखूंट पूबारी टोला निवासी जवाहर चौरसिया की पुत्री बीते डेढ़ साल से कोटा में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही थी. आत्महत्या के कारण का पता नहीं चल सका. जदयू युवा अध्यक्ष प्रवीण चौरसिया ने बताया कि जवाहर चौरसिया की दोनों बेटी कोटा में पढती थी. एक बेटी की शादी दो माह पूर्व हुयी थी. छोटी बेटी कोटा में ही पढ़ रही थी. घटना के बाद से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है.
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