अस्पतालों का नहीं खुल रहा ताला

Published at :23 Apr 2016 8:33 AM (IST)
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अस्पतालों का नहीं खुल रहा ताला

लापरवाही. घर बैठे कागज पर हो रही स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी मोहराघाट में एपीएचसी की स्थापना इसलिए की गयी थी कि नदी पार रहने वाले लोगों को नजदीक में प्रसव सहित दूसरी स्वास्थ्य सेवा मिल सके. लेकिन अधिकारियों की उदासीनता व स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही के कारण इस इलाके के लोगों को यह सुविधा नहीं मिल पा […]

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लापरवाही. घर बैठे कागज पर हो रही स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी
मोहराघाट में एपीएचसी की स्थापना इसलिए की गयी थी कि नदी पार रहने वाले लोगों को नजदीक में प्रसव सहित दूसरी स्वास्थ्य सेवा मिल सके. लेकिन अधिकारियों की उदासीनता व स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही के कारण इस इलाके के लोगों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है.
स्थिति यह है कि दूर-दराज के ग्रामीण अस्पतालों का ताला कब खुलता है यह महीनों तक ग्रामीणों को पता भी नहीं चल पाता है. घर बैठे ड्यूटी की परंपरा से ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवा दम तोड़ने की कगार पर पहुंच गयी है.
खगड़िया :हथवन हेल्थ सब सेंटर… अलौली के सुदूर देहात के लोगों का सहारा. बीमार जिंदगी को संवारने का सपना लिये खोले गये इस अस्पताल का ताला नहीं खुल पा रहा है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं. लिहाजा… ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सेवा का काला सच अब लोगों को डराने लगा है.
कई बार अधिकारियों को आवेदन देकर इसकी शिकायत हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से दिन ब दिन स्थिति बिगड़ती चली गयी. अब तो इन इलाकों के अस्पताल को आईसीयू में भरती करने की जरूरत है. बताया जाता है कि यह हाल एक अलौली का नहीं है. अधिकांश ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में कर्मचारियों के गायब रहने व मजे से वेतन उठाने का खेल किया जा रहा है. आंकड़े बनाने में व्यस्त स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के इन अस्पतालों के दुर्दशा की ओर ध्यान देने की फुरसत नहीं है.
कभी कभी खुल रहे अस्पताल के गेट
ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों का सच जानने निकली प्रभात खबर टोली को स्वास्थ्य सेवा की बदहाली का डरावना चेहरा से देखने को मिला. इस क्रम में हथवन हेल्थ सब सेंटर पर पहुंचने पर भीड़ ने घेर लिया. कोई अपने बच्चे के बीमार होने की बात कहने लगे तो कोई घाव दिखाते हुए कहा कि दवा कब मिलेगी डॉक्टर बाबू. जब ग्रामीणों को यह पता चला कि यह स्वास्थ्य विभाग से नहीं मीडिया वाले हैं तो एक साथ कई आवाज में सिर्फ बदहाली की ही कहानी कह रही थी. ग्रामीण गिरीश कुमार, मनोज यादव, रामविलास यादव, सिकंदर सदा, हरेराम यादव, विजय कुमार, ललटू यादव, संतोष कुमार, जोगिन्द्र यादव आदि ग्रामीणों ने बताया कि पिछली बार इस स्वास्थ्य उप केंद्र का कब ताला खुला था यह ग्रामीणों को याद भी नहीं है. महीना दो महीना पर कभी गेट खुला मिलता भी है तो अंदर बैठे स्वास्थ्यकर्मी सिर्फ कागजी काम करने का बहाना बना देते हैं.
एपीएचसी मोहराघाट की बदहाली कब होगी दूर
अलौली के दूर-दराज के इलाकों के लोगों को प्रसव के लिये पीएचसी या सदर अस्पताल नहीं आना पड़े इसके लिये अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गये. लेकिन यहां पर तैनात कर्मचारियों के गायब रहने की आदत ने सब कुछ बेकार बना कर रख दिया है. स्थिति यह है कि अस्पताल में अधिकांश वक्त ताला ही लटका रहता है. बताया जाता है कि यहां पर तैनात कुछ स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी मनचाहे जगह पर लगा दी गयी है. इतना ही नहीं बंद एपीएचसी के बारे में कई बार पीएचसी प्रभारी से लेकर सिविल सर्जन को की गयी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है.
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