16 लाख की आबादी में 21 हजार लोगों ने ही कराया जीवन बीमा

Updated at : 17 Feb 2018 6:07 AM (IST)
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16 लाख की आबादी में 21 हजार लोगों ने ही कराया जीवन बीमा

खगड़िया : जिले की करीब 16 लाख आबादी में से मात्र 21 हजार लोगों ने केन्द्र सरकार की जीवन बीमा योजना कराया है. जिले की एक बड़ी आबादी यानी 98 प्रतिशत से अधिक लोगों को ये बीमा योजना अपनी ओर खींचने में नाकाम रही है. हम बात उस सस्ते व उपयोगी बीमा योजना यानी प्रधानमंत्री […]

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खगड़िया : जिले की करीब 16 लाख आबादी में से मात्र 21 हजार लोगों ने केन्द्र सरकार की जीवन बीमा योजना कराया है. जिले की एक बड़ी आबादी यानी 98 प्रतिशत से अधिक लोगों को ये बीमा योजना अपनी ओर खींचने में नाकाम रही है. हम बात उस सस्ते व उपयोगी बीमा योजना यानी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की बात कर रहे हैं.

जिसकी प्रीमियम छोटी यानी सस्ती होने के बाद भी जिले में यह योजना सफल नहीं हो पाई है. जानकारों को पूरी उम्मीद थी कि खगड़िया जैसे पिछड़े जिलों में पीएम जीवन ज्योति योजना गरीबों के लिए वरदान साबित होगी. लेकिन दो साल में जो उपलब्धि सामने आयी है वे उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. जिले की आबादी 16 लाख के करीब है. जबकि दो वर्ष पूर्व आरंभ की गयी इस बीमा योजना की उपलब्धि मात्र 21,735 है. यानी मात्र 1.30 फीसदी आबादी ने ही इस 330 रुपये सालाना प्रीमियम वाली बीमा योजना का लाभ लिया है. जबकि 98.70 प्रतिशत की आबादी उसे अनदेखी कर दिया. इस उपलब्धि से इस योजना की सफलता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.

सुरक्षा बीमा भी नहीं हुई सफल
जीवन ज्योति के साथ ही केन्द्र सरकार ने पीएम सुरक्षा बीमा योजना चलायी थी. मात्र 20 रुपये सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा वाली योजना को भी करीब 96 प्रतिशत लोगों ने नहीं अपनाया है. उम्मीद थी कि इतनी सस्ती बीमा का का लाभ लेने के लिए जन सैलाब उमड़ेगी, लोगों की भीड़ बैंकों में लगी रहेगी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. मात्र करीब 4 प्रतिशत लोगों ने उसे अपनाया है यानी बीमा कराया है. करीब 96 प्रतिशत आबादी ने इस योजना से भी तौबा कर लिया. विभागीय आंकड़े के मुताबिक दो वर्षों में 63 हजार 229 लोगों ने पीएम सुरक्षा बीमा योजना के तहत दुर्घटना बीमा कराया है.
पेंशन योजना भी कर रही संघर्ष
दो वर्षों से जिले में अटल पेंशन योजना भी लगातार संघर्ष करती नजर आ रही है. बड़ी संख्या में लोगों ने इस पेंशन योजना को भी नहीं अपनाया है. इस पेंशन योजना की उपलब्धि जिले में उक्त दोनों बीमा योजना से भी खराब है. करीब एक प्रतिशत लोगों ने ही अटल पेंशन योजना के फॉर्म भरे है. योजना की उपलब्धि मात्र 16 हजार 168 रही है. जिसे बदतर कही जा सकती है.
यहां के लिए उपयोगी हैं ये योजनाएं
खगड़िया राज्य व देश स्तर पर पिछड़ा जिला है .नीति आयोग ने देश भर में 115 आकांक्षी जिले की सूची तैयार की है. जहां विकास कम हुए है. इन जिलों का तेजी से विकास होना जरूरी है. जानकार इस 115 जिले को पिछड़ा जिला बता रहें हैं. नीति आयोग द्वारा तैयार की गई सूची में इस जिले का भी नाम शामिल है. बाढ़ प्रभावित, भौगोलिक रूप से पिछड़े, कल-कारखाने विहीन इस जिले के लोगों के लिए ये बीमा एवं पेंशन योजना बहुत जरूरी है. जानकार बताते हैं कि आर्थिक तंगी के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमा कराने में असफल रहें है. लेकिन इस सस्ती बीमा के लाभ में भी इन लोगों ने अधिक रुचि नहीं दिखाई है.
हालांकि जानकारों की माने तो बड़ी संख्या में लोग इन योजना से अब भी अनजान है. जानकारी के अभाव के कारण लोग इस पेंशन व बीमा योजना से अब तक जुड़ नहीं पाए है. इक्के दुक्के जागरूकता कार्यक्रम से 16 लाख लोगों को जानकारी नहीं दिया जा सकता है. इसके लिए पंचायत, गांव, मुहल्ला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए.
तभी लोगों को इन उपयोगी योजनाओं की जानकारी मिल पायेगी.
यह सही है कि खगड़िया जैसे पिछड़े जिले के लिए बीमा व पेंशन काफी उपयोगी व महत्वपूर्ण योजना है. लेकिन बड़ी संख्या में अब तक लोग इससे जुड़ नहीं पाए है. जिस वजह से बहुत अच्छी उपलब्धि नहीं रही है. अधिक से अधिक लोगों को इन दोनों योजनाओं को जोड़ने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए है तथा बैंक आने वाले लोगों को भी जानकारी दी जाती रही है. आगे भी इस कार्यक्रम को तेजी से चलाए जाएंगे.
एसके राय, एलडीएम
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