यहां नहीं पढ़ीं जाती किताबें, होता है दूध का कारोबार

Updated at : 23 Nov 2017 6:34 AM (IST)
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यहां नहीं पढ़ीं जाती किताबें, होता है दूध का कारोबार

खगड़िया : वर्ष 1947 में आजादी के बाद शहीदों के नाम पर शहीद प्रभु नारायण केंद्रीय पुस्तकालय खगड़िया के एनएसी रोड में बनाया गया था. जहां कई दुर्लभ किताबें पढने के लिये लोगों व बुद्धिजीवियों की भीड़ लगी रहती थी. 1947 से 65 तक पुस्तकालय सुचारु से चलता रहा. धीरे-धीरे पुस्तकालय के प्रति शिक्षा विभाग […]

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खगड़िया : वर्ष 1947 में आजादी के बाद शहीदों के नाम पर शहीद प्रभु नारायण केंद्रीय पुस्तकालय खगड़िया के एनएसी रोड में बनाया गया था. जहां कई दुर्लभ किताबें पढने के लिये लोगों व बुद्धिजीवियों की भीड़ लगी रहती थी. 1947 से 65 तक पुस्तकालय सुचारु से चलता रहा. धीरे-धीरे पुस्तकालय के प्रति शिक्षा विभाग की उदासीनता कारण पुस्तकालय की दशा बिगड़ती चली गयी. कई दुर्लभ किताबें दीमक के हवाले हो गयी तो कई उपयोगी व पौराणिक महत्व वाली पुस्तकें बरबाद हो गयी. पुस्तकालय के भवन में दूध का कारोबार चल रहा है.

शुक्र कहिये … डीएम की नजर पड़ गयी
खगड़िया केे डीएम एक दिन पुस्तकालय के निरीक्षण को पहुंच गयेे. निरीक्षण के दौरान किताबों की दुर्दशा व पुस्तकालय की बदहाली देख कर वह भौचक्क रह गये. उन्होंने तुरंत ही पुस्तकालय की दशा सुधारने के लिये शिक्षा विभाग सहित अन्य अधिकारियों की बैठक बुलायी. इसके बाद शहीद प्रभु नारायण केंद्रीय पुस्तकालय को बापू मध्य विद्यालय में शिफ्ट करने का आदेश दिया गया. करीब दो दर्जन अलमीरा व कुर्सी टेबल की खरीद कर पुस्तक को व्यवस्थित किया गया. हालांकि कई पुस्तकें अभी भी पुराने भवन में ही पड़ा हुआ है. जिसे बचाने के लिये प्रयास जारी हैं.
बापू की किताबों से लेकर महाभारत भी मिलेगा
अभी शहीद प्रभुनारायण केन्द्रीय पुस्तकालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, प्रथम राष्ट्रपति स्व डॉ राजेन्द्र प्रसाद, प्रथम प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरु, स्वामी विवेकानंद, प्रेमचन्द्र, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखी गयी दर्जनों पुस्तकें उपलब्ध है. इसके अलावा धार्मिक ग्रंथ में संक्षिप्त शिव पुराण, महाभारत, रामायण, संस्कृति के सूर्य उजैन, तृतीय नेत्र जैसे रींग बेदसार, अंतरराष्ट्रीय संदर्भ तथा उपन्यास, जीवनी हिन्दी, साईंस, आर्ट, शोसल एजुकेशन के अलावा छोटे छोटे बच्चों के लिए विभिन्न विद्या वाले चुटकुले, कहानी, कविता की पुस्तक हिन्दी, इंग्लिस, उर्दू में उपलब्ध है.डीएम जय सिंह के निर्देश पर अलमीरा, कुर्सी टेबल की खरीदारी कर किताबों को व्यवस्थित करने का काम चल रहा है.
कहते हैं पुस्तकालय अध्यक्ष
शहीद प्रभुनारायण केन्द्रीय पुस्तकालय के अध्यक्ष विजय भूषण निराला ने बताया कि पुस्तकालय के लिए समुचित व्यवस्था नदारद है. लोग रूचि नहीं ले रहे है. पुस्तकालय की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है. डीएम जय सिंह के निर्देश पर संस्कृत महाविद्यालय से दो शिक्षकों को पुस्तकालय की देख रेख के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है. इसके अलावा एक रात्रि प्रहरी सहित एक अन्य कर्मी कार्यरत है .उन्होंने बताया कि बीतें दो वर्षों से मानदेय के अभाव में तथा पुस्तकालय के मेंटेनेंस राशि के अभाव में पुस्तकालय के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.
1947 में बनी थी 15 सदस्यीय कमेटी
आजादी के बाद शिक्षा विभाग की पहल पर तथा स्थानीय प्रबुद्ध लोगों के सहयोग से तत्कालीन नगरपालिका पथ स्थित शहीद प्रभुनारायण केन्द्रीय पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया था. वर्ष 1947 में पुस्तकालय संचालन के लिए जिले के 15 प्रबुद्ध लोगों का संचालन कमेटी का निर्माण किया गया था. वर्ष साठ के दशक में पुस्तकालय की स्थिति बिगड़ती गयी. अधिकांश सदस्य स्वर्गवास हो गये. धीरे धीरे पुस्तकालय की जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चली गयी. रख रखाब की स्थिति खराब रहने के कारण लाखों रूपये के किताब दीमक खा गये. अभी भी सैकड़ों किताबें यत्र तत्र बिखरे पड़े है.
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