कटिहार : सरकार सूबे में बेहतर स्वास्थ्य का दम भले ही भरती हो, लेकिन सदर अस्पताल में पदस्थापित स्वास्थ्य कर्मियों की वजह से इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है. जब प्रसूता महिलाएं सदर अस्पताल पहुंचती हैं, तो उनके परिजन से पहले नजराने की की मांग की जाती है. जब-तक नजराना नहीं दिया जाता है, तबतक वह मरीज को हाथ तक नहीं लगाते हैं. कुछ ऐसी ही घटना शनिवार की रात को सदर अस्पताल में प्रसव कराने पहुंचे मरीज व उसके परिजनों के साथ हुई. इसके बाद मरीज के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया.
स्वास्थ्यकर्मी निभा रहे बिचौलिये की भूमिका : सदर अस्पताल में यह कोई पहला मामला नहीं है. सदर अस्पताल में नित्य ऐसे मामले सामने आते हैं, जब प्रसूता को एडमिट नहीं किया जाता है. काफी आरजू मिन्नत करने के बाद एडमिट किया भी जाता है, तो उन्हें किसी न किसी बहाने निजी नर्सिंग होम ले जाने के चक्कर में आशा, ममता, स्वास्थ्य कर्मी का दबाव प्रसूता एवं उसके परिजनों पर रहता है.
शनिवार की रात आजमनगर बलतर निवासी अमित कुमार विश्वास अपनी पत्नी खुशबू का प्रसव कराने सदर अस्पताल पहुंचे. खुशबू की गंभीर स्थिति को देख उसे प्रसव कक्ष में ले जाया गया, जहां प्रसूता का प्रसव कराया गया. प्रसव कराने के बाद जब सुबह अमित ने जच्चा-बच्चा को घर ले जाने की अनुमति मांगी, तो रात्रि ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने उनसे 5000 रुपये की मांग की. जब अमित ने राशि देने में असमर्थता जताते हुए अपनी गरीबी की दुहाई दी, तो ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी सहित आशा का मन नहीं डोला.
स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि अगर यही निजी नर्सिंग होम में डिलिवरी कराते तो 25 से 30 हजार रुपये खर्च हो जाता. हम लोगों ने मेहनत कर आपके पैसे बचाये हैं. इस बात पर अमित खुशी-खुशी अपनी मरजी से उनको मिठाई खिलाने के पांच सौ रुपये देने लगे, तो उन लोगों ने रुपये को फेंक दिया. जच्चा-बच्चा के डिस्चार्ज करने पर परिजनों को डराया जा रहा था. इस बात की शिकायत मिलते ही आप पार्टी के नेता विक्टर झा सदर अस्पताल पहुंचे तथा खुशबू को डिस्चार्ज करने की बात कहीं. बावजूद उन स्वास्थ्य कर्मियों ने उनकी नहीं सुनी,
इसके बाद विक्टर झा के नेतृत्व में मरीज के परिजनों ने सदर अस्पताल में जम कर बवाल काटा. श्री झा ने बताया कि सदर अस्पताल बिचौलियों पर डिपेंड है. प्रसूता को निजी नर्सिंग होम ले जाने के लिए यहां पहले से ही आशा कर्मी के रूप मे बिचौलिये तैयार रहते हैं. उन्होंने कहा कि एक मरीज को नर्सिंग होम भेजने पर पांच हजार रुपये उन्हें कमीशन मिल जाता है. वहीं दवा का अलग कमीशन रहता है. इस संदर्भ में पीड़ित परिवार ने सीएस को स्वास्थ्य कर्मियों के विरुद्ध लिखित शिकायत की.
पांच हजार दीजिये, नहीं तो निजी नर्सिंग होम जाइये
शहरी क्षेत्र के सिमरा बगान निवासी सोनम देवी, हाजीपुर निवासी मस्तरा खातून सहित अन्य मरीजों को लेकर शनिवार की रात उनके परिजन अस्पताल में पहुंचे, तो स्वास्थ्यकर्मी पहले तो उन्हें निजी नर्सिंग होम ले जाने की सलाह देने लगे. आशा मरीजों व उनके परिजनों को यह तक कह देती है कि जच्चा-बच्चा की स्थिति नाजुक है. इन्हें शीघ्र ही निजी नर्सिंग होम लेकर जायें. आरोप है कि सोनम देवी से 3000 हजार दवा के लिए अलग से राशि मांगी गयी.
मस्तरा खातून के पति नाजिर हुसैन ने बताया कि 3500 रुपये प्रसव कराने के व 1000 रुपये दवा के लिए अलग से स्वास्थ्यकर्मियों को दिया. प्रसव कराने पहुंचे मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रसूता कक्ष में तैनात स्वास्थ्य कर्मी मीरा कुमारी, अर्चना कुमारी ने राशि की मांग की. वे आशा के माध्यम से ही मरीजों के परिजनों पर नजराना देने के लिए दबाब डालते हैं. खुशबू देवी से लेने-देन को लेकर बात बिगड़ी और अस्पताल में मरीज व उसके परिजनों ने जमकर बवाल काटा.
पत्नी का दुख देखा नहीं गया, तो दिये तीन हजार
अजय सिंह अपनी पत्नी सुनीता देवी का प्रसव कराने सदर अस्पताल पहुंचे तो उनसे तीन हजार रुपये की मांग की गयी. जब उन्होंने रुपये देने में असमर्थता जतायी, तो स्वास्थ्य कर्मी ने उनकी पत्नी को भरती तक नहीं किया. सुनीता दर्द से चीखती रहीं, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों का दिल नहीं पसीजा. अंतत: थक हार कर अजय सिंह ने तीन हजार रुपये की व्यवस्था की, तब जाकर उनकी पत्नी को भरती किया गया.
जांच में दोषी मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई
शिकायत को लेकर जांच की गयी, तो तत्काल एक बिचौलिये को पकड़ा गया. सीएस ने अवैध राशि मांगे जाने व निजी क्लिनिक में मरीजों को भेजने पर कहा की मामले की जांच की जायेगी. इसमें जो भी दोषी होंगे उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी.
एसएन झा, सीएस
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