कटिहार में 100 में 39 लड़कियों की कम उम्र में हो जाती है शादी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Oct 2017 4:36 AM

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कटिहार : हर वर्ष 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. पिछले पांच वर्षों से संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्देश पर वैश्विक स्तर पर इस दिवस का आयोजन किया जाता है. हर देश एवं राज्य में इस दिवस के अवसर पर किशोरियों व बालिकाओं की सुरक्षा एवं उनके सशक्तीकरण को लेकर विभिन्न तरह […]

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कटिहार : हर वर्ष 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. पिछले पांच वर्षों से संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्देश पर वैश्विक स्तर पर इस दिवस का आयोजन किया जाता है. हर देश एवं राज्य में इस दिवस के अवसर पर किशोरियों व बालिकाओं की सुरक्षा एवं उनके सशक्तीकरण को लेकर विभिन्न तरह की गतिविधियों का आयोजन होता है. बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस है. ऐसे में इस बार बिहार के लिए खुशी की बात यह है कि राज्य सरकार ने बाल विवाह की रोकथाम को अपने एजेंडे में शामिल कर लिया है.

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस को बुधवार को सेलिब्रेट करते हुए एक सुखद अनुभव भी होगा. हालांकि बिहार में बाल विवाह एवं लड़कियों से जुड़ी समस्याओं की कमी नहीं है. कई मोर्चे पर लड़कियाें को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यद्यपि हाल के वर्षों में काफी कुछ बदलाव हुआ है. इस बीच बाल विवाह के खिलाफ राज्य सरकार ने निर्णायक अभियान शुरू कर दिया है. वैसे तो अब तक गैर सरकारी संगठन व सामाजिक संस्थानों द्वारा बाल विवाह की रोकथाम को लेकर अभियान चलाया जाता रहा है. पर, अब राज्य सरकार ने इसे मुख्य एजेंडे में शामिल कर इसकी रोकथाम को लेकर पहल करनी शुरू कर दी है.

राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से बाल विवाह के खिलाफ अभियान की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती से कर दिया है. उल्लेखनीय है कि पूर्ण शराबबंदी के बाद में सरकार को मिली अभूतपूर्व सफलता से उत्साहित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाने की घोषणा की थी. अब इसको लेकर रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है. समाज कल्याण विभाग के महिला विकास निगम को बाल विवाह की रोकथाम को लेकर बने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग घोषित कर दिया गया है.

राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा वातावरण निर्माण को लेकर तैयारी शुरू की गयी है. गौरतलब है कि कटिहार जिला सहित बिहार में अन्य दूसरे राज्यों की अपेक्षा बाल विवाह के अधिक मामले होते हैं. कटिहार जिले में करीब 40 प्रतिशत लड़कियों की शादी निर्धारित उम्र यानी 18 साल से कम में हो जाती है. कमोबेश यही स्थिति बिहार की भी है.

असुरक्षा भी बड़ी वजह, ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक आते हैं मामले
बाल विवाह मामला खासकर गरीब, मजदूर व अशिक्षित परिवारों में देखने को मिलता है. अभी भी जनजाति, दलित, अल्पसंख्यक समुदाय में बाल विवाह के अधिक मामले होते हैं. समाज में सुरक्षा के कारण भी बाल विवाह को बढ़ावा मिलता है. दहेज की वजह से भी बाल विवाह होता है. जानकारों की माने, तो बाल विवाह के अधिक मामले ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं. उच्च माध्यमिक एवं उच्चतर शिक्षा की बेहतर व्यवस्था नहीं होने की वजह से बाल विवाह अधिक होते है. लोगों की मानें, तो इज्जत के डर से भी गरीब मजदूर परिवार अपनी बेटियों की शादी कम उम्र में कर देते हैं.
ड्राॅप आउट की वजह से बाल विवाह अधिक
बाल विवाह का एक बड़ा कारण लड़कियों का ड्रॉप आउट होना भी है. खासकर आठवीं कक्षा पास होने के बाद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं होने की वजह से लड़कियां ड्रॉप आउट हो जाती हैं. ऐसे में उनके अभिभावक ड्रॉप आउट होने के बाद शादी की तैयारी में जुट जाते हैं. चाइल्ड राइट्स एंड यू द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 3 व 4 के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर यह बात सामने आयी है कि बाल विवाह के मामले में कमी जरूर आयी है, पर बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करके बाल विवाह को रोका जा सकता है.
14.3 फीसदी लड़कियां 15 से 19 वर्ष की उम्र में बन जाती हैं मां
कटिहार सहित बिहार के अन्य जिलों में बाल विवाह रोकना एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है. राज्य सरकार बाल विवाह के साथ-साथ दहेज प्रथा को भी समाप्त करने की दिशा में कार्य योजना तैयार की है. बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक है. यद्यपि बाल विवाह को लेकर हर वर्ष कई तरह के अध्ययन रिपोर्ट सामने आते रहे हैं. अभी हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे- 4 का रिपोर्ट जारी हुआ है. इस रिपोर्ट पर भरोसा करें,
तो कटिहार जिले में 38.6 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है. इसी रिपोर्ट के अनुसार 14.3 प्रतिशत लड़कियां 15 से19 वर्ष के उम्र में मां बन जाती हैं. जबकि एनएफएचएस- 3 में बाल विवाह बिहार में 60.3 प्रतिशत था. कटिहार में 43.7 प्रतिशत लड़कियों की शादी एक दशक पूर्व निर्धारित उम्र से कम में कर दी जाती थी. इसी तरह का मिलती जुलती रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी सामने आयी है. कई गैर सरकारी संगठनों द्वारा भी समय- समय पर अध्ययन रिपोर्ट जारी किया जाता रहा है. साथ ही इसके कारण भी बताये जाते रहे हैं.
समेकित बाल सुरक्षा योजना के तहत बाल विवाह की रोकथाम व बच्चों की सुरक्षा को लेकर बाल संरक्षण समिति गठित की गयी है. पर, वह निष्क्रिय है. उसको सक्रिय करके इन सामाजिक कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है.
शरदेंदू बनर्जी, स्टेट हेड, क्राई, बिहार
बिहार सरकार द्वारा बाल विवाह की रोकथाम को लेकर शुरू किया गया अभियान स्वागतयोग्य है. उन्होंने कई आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को बाल विवाह की रोकथाम को लेकर अन्य गतिविधियों के अलावा शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है. विद्यालय से ड्रॉप आउट होने के बाद बच्चों की शादी समय से पहले कर दी जाती है.
महुआ चटर्जी, प्रोग्राम हेड ईस्ट जोन, क्राई
यह सही है कि बाल संरक्षण समिति के गठन के बाद एक बार ही बैठक हुई है. जल्द ही सीपीसी की सक्रियता के लिए ठोस कदम उठाये जायेंगे. बाल विवाह की रोकथाम को लेकर पहल की जा रही है.
बेबी रानी, सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई
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