देना होगा आपराधिक ब्योरा भी

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पंचायत चुनाव. छह माह से अधिक सजा काट चुके लोग नहीं कर सकेंगे नामांकन भभुआ (नगर) : पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है. संभावित प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए लोगों से मिलना-जुलना भी शुरू कर दिये हैं. इस बार के चुनाव में छह माह से अधिक दिनों तक सजा काट चुके व्यक्ति […]

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पंचायत चुनाव. छह माह से अधिक सजा काट चुके लोग नहीं कर सकेंगे नामांकन
भभुआ (नगर) : पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है. संभावित प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए लोगों से मिलना-जुलना भी शुरू कर दिये हैं. इस बार के चुनाव में छह माह से अधिक दिनों तक सजा काट चुके व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने इसको लेकर जिला प्रशासन को दिशा निर्देश भेजा है. देश में या बाहर किसी न्यायालय द्वारा राजनीतिक अपराध से भिन्न किसी अपराध के लिए छह माह से अधिक समय तक सजा पाने वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.
पंचायत चुनाव में नामांकन के समय हर पद के अभ्यर्थी को शपथ पत्र के साथ उन पर हुए मुकदमों की जानकारी देनी होगी. उम्मीदवारों को यह बताना होगा कि उन पर किसी न्यायालय में केस तो दर्ज नहीं है.
अगर, केस दर्ज है, तो उनका पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा. साथ ही शपथ पत्र में कारावास या अर्थदंड के प्रकार व अवधि, दंडादेश के विरुद्ध अपील या पुनर्विचार का आवेदन दायर, अपराध से दोषमुक्त होने, जमानत, काराधीन रहने की अवधि व आरोप की प्रवृत्ति का उल्लेख करना है. इसमें संबंधित न्यायालय का नाम और वाद संख्या भी अंकित करनी है. किसी मामले में संज्ञान लिया गया है, तो उसका विवरण भी देना है. नामांकन दाखिल करने की तिथि के छह माह पूर्व किसी मामले में आरोप लगा है, तो उसकी भी जानकारी देनी होगी.
आदर्श आचार संहिता लगने के साथ ही विकास कार्यों पर लगेगा ब्रेक : अप्रैल माह में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर लगने वाली आचार संहिता लागू होते ही विकास कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जायेगी. सूत्रों की मानें तो चालू वित्त वर्ष 2016-17 में योजनाओं के चयन व स्वीकृति समय पर नहीं होने के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में काफी देर होगी.
चूंकि, वित्त वर्ष के अप्रैल माह में ही योजनाओं के चयन का प्रावधान है. लेकिन, जिन योजनाओं की स्वीकृति पूर्व में मिल चुकी हैं, वे आदर्श आचार संहिता में नहीं फंसे, इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी व पंचायतों के प्रतिनिधि काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. पूर्व से चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन में भी काफी तेजी देखी जा रही है. अधिकारियों की मानें तो आचार संहिता लगने पर बीआरजीएफ, चतुर्थ राज्य वित्त आयोग, 13वीं वित्त आयोग, मुख्यमंत्री योजना व 14वीं वित्त आयोग आदि योजनाएं प्रभावित होंगी.
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