जिले में दो साल में दो इंच भी नहीं चलीं 40 लग्जरी बसें
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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जहानाबाद : जिले में 3.10 करोड़ की लागत से बने अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के बाद दो साल में 40 लग्जरी बसें दो इंच भी नहीं चल सकीं. तत्कालीन नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा ऐसे ही नेताओं के बोल में शामिल हैं. 24 नवंबर 2014 को उक्त पूर्व मंत्री ने शहर के काको मोड़ […]
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जहानाबाद : जिले में 3.10 करोड़ की लागत से बने अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के बाद दो साल में 40 लग्जरी बसें दो इंच भी नहीं चल सकीं. तत्कालीन नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा ऐसे ही नेताओं के बोल में शामिल हैं. 24 नवंबर 2014 को उक्त पूर्व मंत्री ने शहर के काको मोड़ स्थित बस स्टैंड में तीन करोड़ दस लाख की लागत से बननेवाले अंतराज्यीय बस टर्मिनल का शिलान्यास किया था. उस वक्त उन्होंने आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित जन समूह और अधिकारियों की मौजूदगी में घोषणा की थी कि बस टर्मिनल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैश होगा. लोगों को आकर्षित करने के लिए भव्य गेट का निर्माण कराया जायेगा और जहानाबाद एवं अरवल जिले के बीच एनएच 110 पर 40 यात्री बसें चलायी जायेंगी.
करोड़ों की लागत से बस टर्मिनल का निर्माण तो हुआ, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी आज तक यात्रियों को 40 बसों की सुविधा बहाल नहीं करायी गयी. बस टर्मिनल में आकर्षक गेट का भी निर्माण नहीं कराया गया. परिणाम यह है कि राजधानी पटना से महज 55 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित जहानाबाद और इससे अलग हुए अरवल जिले के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करनेवाले यात्री लग्जरी वाहनों की बात तो दूर आरामदायक यात्री बस का सुख भोगने का सपना संजोये बैठे हैं.
खटारे यात्री बसों का होता है आवागमन : जहानाबाद और अरवल के बीच सड़क मार्ग की दूरी 33 किलोमीटर है.इन दोनों जिलों के बीच सैकड़ों गांव हैं, जहां के लोगों को यात्रा करने के लिए सड़क मार्ग की ही सुविधा है. पटना से अरवल और अरवल से जहानाबाद आने-जाने के लिए रेल सेवा नहीं है. ऐसे में यात्री बसों की महत्ता है. विडंबना यह है कि उक्त दोनों जिलों के बीच करीब दो दर्जन ही यात्री बसें संचालित होती हैं जिनकी हालत अच्छी नहीं है. कई यात्री वाहन तो खटारे हैं जिन पर सवार होने में लोगों को भय महसूस होता है. प्रतिदिन जहानाबाद-अरवल मार्ग से हजारों यात्रियों का आवागमन होता है. कुर्था-करपी प्रखंड क्षेत्र से भी यात्रियों की आवाजाही होती है.
नाम का है सुविधायुक्त बस टर्मिनल : काको बस स्टैंड में तीन करोड़ दस लाख की लागत से अंतराज्यीय बस टर्मिनल का निर्माण तो कराया गया, लेकिन इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है.
टर्मिनल का आकर्षक भवन तो दिख रहा है, लेकिन उसका समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है. वहां का शौचालय बंद है, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. साथ ही गंदगी की भरमार ही इस टर्मिनल की पहचान बनी हुई है. इसके उदघाटन हुए 11 माह हो गये, लेकिन वहां बनायी गयी दुकानें और कैंटीन का लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहे हैं.
टर्मिनल परिसर में रोशनी का भी पुख्ता प्रबंध नहीं है. वहां सुरक्षा की भी व्यवस्था नहीं है. असामाजिक तत्व वहां सक्रिय रहते हैं. शाम होते ही टर्मिनल परिसर में जाने से यात्री कतराते हैं. यहां सर्वत्र चर्चा हो रही है कि यात्रियों को जिस सुविधा के ख्याल से करोड़ों रुपये व्यय किये गये उसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है.
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