काश? विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए भी होती पहल
कलेर : इन दिनों बिहार में देशी शराब पर प्रतिबंध की बात जोर शोर से सुनी जा रही है. और इसी आवाज में एक आवाज शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उठ रही है. बुद्धिजीवी शराब और शिक्षा को अलग नहीं कर पा रहे हैं. प्रबुद्ध लोगों ने बताया कि बदलाव समाज को बगैर आंदोलित किये […]
कलेर : इन दिनों बिहार में देशी शराब पर प्रतिबंध की बात जोर शोर से सुनी जा रही है. और इसी आवाज में एक आवाज शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उठ रही है. बुद्धिजीवी शराब और शिक्षा को अलग नहीं कर पा रहे हैं. प्रबुद्ध लोगों ने बताया कि बदलाव समाज को बगैर आंदोलित किये नहीं होता है. सरकार द्वारा पूर्ण शराबबंदी की बात का तो समर्थन करते हैं. विद्यालय शिक्षा का घर न होकर मध्याह्न भोजन तक सिमट गया.
सरकारी कर्मी होने के नाते शिक्षाकर्मी भी पढ़ाई की व्यवस्था के बजाय मध्याह्न भोजन की व्यवस्था दुरुस्त करने में लग गये. आज सरकारी विद्यालयों की जो स्थिति है उससे खुश नहीं दिखते हैं अभिभावक. शराबबंदी पर लोग काफी खुश नजर आ रहे हैं. लेकिन व्यंग्य में यह भी कहते नहीं चुकते की शराबबंदी के साथ ही शिक्षा पर सरकार को पूरी तत्परता से ध्यान देना चाहिए.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










