एमए, बीए से महंगी है क, ख, ग की पढ़ाई

Updated at : 04 Apr 2019 1:45 AM (IST)
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एमए, बीए से महंगी है क, ख, ग की पढ़ाई

जहानाबाद नगर : अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की लालसा सभी अभिभावकों की होती है. इसी लालसे को पूरा करने के लिए अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजते हैं, जहां उन्हें अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों के पढ़ाई पर खर्च करना पड़ता है. कई अभिभावक तो सक्षम न होते हुए भी […]

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जहानाबाद नगर : अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की लालसा सभी अभिभावकों की होती है. इसी लालसे को पूरा करने के लिए अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजते हैं, जहां उन्हें अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों के पढ़ाई पर खर्च करना पड़ता है.
कई अभिभावक तो सक्षम न होते हुए भी बेहतर शिक्षा बच्चों को उपलब्ध कराने की होड़ में कर्ज लेकर भी निजी विद्यालय में पढ़ाते हैं. प्राइमरी यानी क, ख, ग की पढ़ाई बीए, एम जैसे डिग्री कोर्सों से भी महंगी हो गयी है.
वहीं निजी विद्यालय संचालक भी अभिभावकों की इस होड़ को भुनाने में जुटे हुए हैं. हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी और अन्य कई सुविधाओं के नाम पर पैसे की वसूली अभिभावकों से की जा रही है.
जिले में संचालित अधिकांश निजी विद्यालयों द्वारा अप्रैल माह में री-एडमिशन के नाम पर मोटी राशि अभिभावकों से वसूल की जाती है. जानकारी के अनुसार लगभग 5 हजार रुपये री-एडमिशन के नाम पर बच्चों से लिया जा रहा है, जबकि फीस, पुस्तक व अन्य सामग्री के लिए भी अलग से राशि ली जा रही है.
वर्ग एक के बच्चों को जहां 700-800 रुपये प्रति माह फीस देनी होती है, वहीं 10वीं कक्षा तक जाते-जाते यह फीस लगभग 2000 रुपये प्रति माह हो जाती है. कई स्कूल संचालक तो विधिवत किताब दुकान की पर्ची थमाते हैं और अभिभावकों को बताया जा रहा है कि संबंधित दुकान में ही किताबें मिलेंगी.
वर्ग एक में पढ़ने वाले बच्चों के लिए जहां किताब-कॉपी खरीदने में 7-8 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं 10वीं वर्ग के छात्रों के लिए यह आंकड़ा 12-15 हजार तक पहुंच जाता है. वहीं ट्रांसपोर्टिंग के नाम पर 700-800 रुपये अभिभावकों से लिये जा रहे हैं. ऐसे में अभिभावकों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के नाम पर खर्च करना पड़ रहा है.
निजी स्कूलों से पीछे नहीं है आदर्श मध्य विद्यालय ऊंटा
आदर्श मध्य विद्यालय ऊंटा में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के नाम पर कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता है. उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ अलग से मिलता है. इसके बाद भी इस विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती है, जो किसी निजी विद्यालय से कम नहीं है.
यहां पढ़ने वाले बच्चे सभी विषयों में अच्छी जानकारी रखते हैं. भले ही निजी विद्यालय जैसा उनका पहनावा व चाल-ढाल नहीं हो, लेकिन पढ़ाई के मामले में वे किसी निजी विद्यालय के छात्र से पीछे नहीं दिखते.
यही कारण है कि जिला स्तर पर होने वाले अधिकांश कार्यक्रम और राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक टीम की विजिट इसी विद्यालय में होती है. टीम के सदस्य भी बच्चों के जानकारी से काफी उत्साहित दिखते हैं. यहां के बच्चों का रिजल्ट भी काफी अच्छा रहता है.
फीस पर नहीं है कोई नियंत्रण
कहने को तो सरकार व सीबीएसइ ने निजी स्कूलों में फीस निर्धारण और बढ़ोतरी को लेकर कई गाइडलाइन जारी कर रखी हैं, लेकिन निजी स्कूल संचालक गाइडलाइन के बीच के स्पेस का फायदा बखूबी उठा लेते हैं. हर साल फीस की बढ़ोतरी की जा रही है. वहीं नामांकन में कितनी फीस लेनी है यह भी निर्धारित नहीं है. सभी स्कूलों की अपनी-अपनी फीस है.
कई निजी स्कूलों में नामांकन फीस की जानकारी लेने पर इतना तो स्पष्ट होता है कि अगर आप पहली कक्षा में अपने बच्चे का नामांकन कराना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कम से आठ से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे. स्कूल ड्रेस, कॉपी-किताब, कलम और जूता आदि लेकर यह आंकड़ा 20 हजार रुपये तक पहुंच जाता है.
मंथली ट्यूशन फीस की बात करें तो प्राइमरी सेक्शन के लिए पांच सौ रुपये से ज्यादा की राशि निजी स्कूल संचालक वसूल रहे हैं.
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