मुक्त कराये गये 16 बाल मजदूर

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सफलता. जयपुर के चूड़ी कारखाने में 16 घंटे कराया जाता था काम घोसी, काको व सदर प्रखंड क्षेत्र के हैं बच्चे दो हजार महीने पर दलालों ने पहुंचाया था जयपुर जहानाबाद : राजस्थान की राजधानी जयपुर के चुड़ी कारखाने में काम करने वाले जहानाबाद जिले के 16 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है. जयपुर […]

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सफलता. जयपुर के चूड़ी कारखाने में 16 घंटे कराया जाता था काम

घोसी, काको व सदर प्रखंड क्षेत्र के हैं बच्चे
दो हजार महीने पर दलालों ने पहुंचाया था जयपुर
जहानाबाद : राजस्थान की राजधानी जयपुर के चुड़ी कारखाने में काम करने वाले जहानाबाद जिले के 16 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है. जयपुर श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा कारखाने से मुक्त कराये गये बच्चों की उम्र आठ से लेकर 16 वर्ष तक की है. सभी बच्चे काको, घोसी और सदर प्रखंड जहानाबाद के ईरकी, उंटा, जाफरगंज मुहल्ला, दाउदपुर, रसलपुर और विर्रा गांव के रहने वाले हैं, जिनमें नौ बच्चे महादलित परिवार के हैं. दलालों के माध्यम से राजस्थान भेजे गये बाल श्रमिकों को पहले बाल कल्याण समिति, गया लाया गया. इसके बाद समिति की जहानाबाद जिला इकाई के अध्यक्ष को सौंपा गया.
शुक्रवार को बाल श्रमिकों को जहानाबाद स्थित बाल कल्याण समिति के कार्यालय में रखा गया और उनके परिजनों को सूचना दी गयी. सूचना पाकर बच्चों के अभिभावक कार्यालय से संपर्क कर रहे हैं. इस संबंध में समिति के अध्यक्ष अशोक प्रसाद, सदस्य ज्योतिमणी और शशिभूषण प्रसाद ने संयुक्त रूप से बताया कि पूरी तरह जांच कर लेने के बाद ही बच्चों को उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है. बाल कल्याण समिति के कार्यालय में मुक्त कराया गया ईरकी निवासी एक मजदूर ने बताया कि उसे एक साल पूर्व हुलासगंज थाने के सरबहदा गांव का मुन्ना नामक सेठ (दलाल) ने जयपुर चूड़ी कारखाने में पहुंचाया था. दो माह पूर्व दो और बच्चों को उक्त दलाल ही ले गया था. बच्चों ने यह भी बताया कि गया जिले के अतरी थाने के बंडी गांव निवासी राजकुमार नामक दलाल के माध्यम से छह माह पूर्व छह बच्चों को ट्रेन से जयपुर ले जाया गया था. इसी तरह कुल 16 लड़कों को चूड़ी कारखाने में काम करने के लिए बाल मजदूरी की भट्ठी में झोक दिया गया था.
अभिभावकों की मर्जी से भेजे गये थे बच्चे
पढ़ाई करने और खेलने की उम्र में बाल मजदूरी के लिए विवश करने में बच्चों के अभिभावक भी जिम्मेवार माने जाते हैं. चूंकि सभी बच्चों को दलाल जबरन नहीं ले गया, बल्कि उसके माता-पिता की रजामंदी से ही बच्चों को जयपुर भेजा गया. इस बात को मुक्त करा कर लाये गये बच्चे स्वीकारते हैं. बच्चों का कहना है कि वे सभी अपनी मां-बाप की पूरी जानकारी में काम करने के लिए जयपुर गये थे.
रात 12 बजे तक कराया जाता था काम
चूड़ी कारखाने में बच्चे काम की बोझ से बेहाल थे. उनसे 16 घंटे तक काम लिया जाता था. बाल श्रमिकों ने बताया कि भोजन व नाश्ता दिया जाता था, लेकिन सुबह आठ बजे से रात 12 बजे तक उनसे चूड़ी कारखाने में काम लिया जाता था. काम की बोझ से वे लोग पूरी तरह थक जाते थे.
जयपुर के पदाधिकारियों ने छापेमारी कर कराया मुक्त
चूड़ी कारखाने में बड़ी संख्या में बाल मजदूरों से काम कराने की सूचना पाकर जयपुर श्रम विभाग के पदाधिकारियों ने तीन दिनों पूर्व छापेमारी की थी और जहानाबाद जिले के 16 बच्चों को मुक्त कराया था. नाम-पता हासिल करने के बाद राजस्थान सरकार ने बिहार सरकार को इसकी सूचना दी. मुक्त कराये गये बच्चों को पहले गया स्थित बाल कल्याण समिति को सौंपा गया और फिर सूचना पाकर समिति की जहानाबाद इकाई के पदाधिकारियों ने बच्चों को जहानाबाद लाया.
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