मरीज व कर्मी रहते हैं दहशत में

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परेशानी . जर्जर भवन में चल रहा जिला अस्पताल, छत का प्लास्टर अक्सर गिरता है जहानाबाद नगर : 13 जून ,1981 को स्थापित सदर अस्पताल का भवन इन दिनों काफी जर्जर हो गया है. अक्सर कहीं-न-कहीं छत का प्लास्टर तथा रेलिंग टूट कर गिरती है, जो मरीजों व कर्मियों के लिए जानलेवा साबित होती है. […]

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परेशानी . जर्जर भवन में चल रहा जिला अस्पताल, छत का प्लास्टर अक्सर गिरता है

जहानाबाद नगर : 13 जून ,1981 को स्थापित सदर अस्पताल का भवन इन दिनों काफी जर्जर हो गया है. अक्सर कहीं-न-कहीं छत का प्लास्टर तथा रेलिंग टूट कर गिरती है, जो मरीजों व कर्मियों के लिए जानलेवा साबित होती है. ऐसे में मरीज व अस्पताल कर्मी दोनों दहशत में रहते हैं. हालांकि दोनों की मजबूरी है कि उन्हें अस्पताल आना ही है.
मरीज जहां अपने मर्ज का इलाज कराने पहुंचता है, वहीं कर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन करने पहुंचते हैं. अस्पताल भवन जर्जर होने के कारण हर वर्ष मरम्मत के नाम पर अस्पताल प्रशासन द्वारा लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं, लेकिन जर्जर भवन कब बड़े हादसे का गवाह बन जाये, यह किसी को पता नहीं.1981 तत्कालीन मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह द्वारा सदर अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया था.
उस समय अस्पताल 60 बेड का संचालित होता था.
1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद द्वारा सदर अस्पताल का नाम बदल कर अमर शहीद जगदेव प्रसाद सदर अस्पताल कर दिया गया, लेकिन न तो भवन का ही विस्तार हुआ और न संसाधनों की बढ़ोतरी हुई.अस्पताल को अपग्रेड करते-करते फिलहाल 300 बेड का बना दिया गया, लेकिन भवन का विस्तार व संसाधन नहीं बढ़े. पुराने भवन में अस्पताल संचालित है . शनिवार को सदर अस्पताल में संचालित डब्ल्यूएचओ कार्यालय के समीप छत का प्लास्टर टूट कर गिर पड़ा.
गनीमत यह रही कि उस समय कोई कर्मी वहां मौजूद नहीं था, जिसके कारण कोई घटना नहीं हुई. अस्पताल भवन के जर्जर होने का यह कोई पहला प्रमाण नहीं है, बल्कि तीन वर्ष पूर्व सदर अस्पताल के मुख्य भवन का पोर्टिको धराशायी हो गया था. इसके बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा एक छोटे पोर्टिको का निर्माण कराया गया.
भवन की मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों होते हैं खर्च
जर्जर घोषित हो चुका है यक्ष्मा केंद्र : सदर अस्पताल में संचालित यक्ष्मा केंद्र भवन को पूर्व में ही भवन निर्माण विभाग द्वारा जर्जर घोषित किया जा चुका है .हालांकि जगह के अभाव में अब भी इसका उपयोग हो रहा है .कर्मी भय के बीच अपने कर्तव्य के निर्वहन में जुटे हैं. अस्पताल प्रशासन अब भी इस ओर कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है.
क्या कहते हैं उपाधीक्षक
सदर अस्पताल भवन कई जगह जर्जर हो चुका है. इस संबंध में विभाग से पत्राचार भी किया गया है.साथ ही वरीय पदाधिकारियों को भी सूचित किया गया है. हालांकि अब तक नये भवन के निर्माण के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है.
डाॅ वीके झा
कुछ िदन पूर्व िगरा था छज्जा, कई हुए थे जख्मी
कुछ ही दिनों के बाद अस्पताल की मुख्य गैलरी की पूरी छत का प्लास्टर तथा छज्जा टूट कर गिर पड़ा था, जिसमें कई मरीज व अस्पताल कर्मी घायल हो गये थे. वहीं अस्पताल में सीढ़ी का पोर्टिको भी धराशायी हो गया है.वहीं जांच घर तथा अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालन के इलाके में भवन इस कदर जर्जर है कि कभी धराशायी हो सकता है. हालांकि अस्पताल प्रशासन भवन के रिपेरिंग के नाम पर हर वर्ष मोटी रकम खर्च करता है तथा भवन की डेंटिंग-पेंटिंग करा उसे नया लुक देने का प्रयास किया जाता है.
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