महनार (वैशाली) से रवि कुमार सिंह की रिपोर्ट
महनार में बुधवार सुबह हुई हल्की बारिश ने जलनिकासी व्यवस्था की पूरी सच्चाई उजागर कर दी. महनार बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर पूरे शहर का नाले का गंदा पानी जमा हो गया. परिणामस्वरूप विद्यालय पहुंचने वाली सैकड़ों छात्राओं को घुटनों तक बदबूदार और दूषित पानी से होकर स्कूल में प्रवेश करना पड़ा.
विद्यालय में प्रवेश का कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण छात्राएं विवश होकर नाले के गंदे पानी में उतरती हैं. कई छात्राएं जूते-चप्पल हाथ में लेकर किसी तरह विद्यालय पहुंचती हैं. स्कूल में प्रवेश करते-करते उनके जूते-चप्पल, मोजे और घुटनों तक कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं. शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने के लिए उन्हें हर दिन इस अपमानजनक और अस्वास्थ्यकर स्थिति का सामना करना पड़ता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है. वर्षों से पूरे महनार शहर का नाले का पानी विद्यालय के सामने जमा होता है. जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण हल्की बारिश भी विद्यालय परिसर तक पहुंचने का रास्ता बंद कर देती है. इसके बावजूद नगर प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं किया गया है.
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस स्थान पर छात्राओं का भविष्य संवरना चाहिए, वहां उन्हें गंदे नाले के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है. दूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा संक्रमण, फंगल इंफेक्शन, जलजनित रोग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा लगातार बना रहता है. ऐसे में यह केवल जलजमाव की समस्या नहीं, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है.
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की सड़क, नाला और शहरी विकास योजनाओं के बावजूद यदि छात्राओं को स्कूल जाने के लिए सीवर और नाले के पानी में उतरना पड़ रहा है. नगर परिषद और NHAI के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा आम नागरिकों और छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे हैं.
