लॉकडाउन: घर में कैद किसान दाने-दाने को हो रहे मोहताज,किसानों के जख्मों पर गन्ना उद्योेग विभाग की चुप्पी

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 02 Apr 2020 1:53 AM

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लॉकडाउन: घर में कैद किसान दाने-दाने को हो रहे मोहताज,किसानों के जख्मों पर गन्ना उद्योेग विभाग की चुप्पी हेडिंग: सासामुसा चीनी मिल के तिजोरी में बंद है किसानों के गाढ़ी कमाई का 40 करोड़-गांवों में किसान अनाज बेच कर जिंदगी की गाड़ी को बढ़ा रहे आगे-लॉकडाउन में सरकार ने सबका ख्याल रखा, किसानों का संकट […]

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लॉकडाउन: घर में कैद किसान दाने-दाने को हो रहे मोहताज,किसानों के जख्मों पर गन्ना उद्योेग विभाग की चुप्पी हेडिंग: सासामुसा चीनी मिल के तिजोरी में बंद है किसानों के गाढ़ी कमाई का 40 करोड़-गांवों में किसान अनाज बेच कर जिंदगी की गाड़ी को बढ़ा रहे आगे-लॉकडाउन में सरकार ने सबका ख्याल रखा, किसानों का संकट बरकरार फोटो नं 33 सासामुसा चीनी मिल में पसरा सन्नाटा प्रभात एक्सक्लूसिव संजय कुमार अभय, गोपालगंज लॉकडाउन में सरकार ने हर वर्ग का ख्याल रखा. गरीबों के जनधन के खाते में राशि देने का काम हुआ. वहीं गन्ना किसानों के सामने संकट गंभीर होता जा रहा. आर्थिक संकट से जूझ रहे सासामुसा चीनी मिल क्षेत्र के किसानों के सामने रोटी की संकट होने लगी है. हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद उनकी कमाई चीनी मिल के तिजोरी में बंद है.

किसानों को उनके बकाये पर्चियों का भुगतान नहीं दिया जा रहा. नतीजा है कि घर में सालभर के लिए स्टाक कर रखे गये अनाज को बेचकर रोजमर्रा की समान खरीद रहे है. गांवों में स्थिति भयावह हो रही. अनाज खत्म होने पर बाजार पर ही निर्भर होना होगा. काला मटिहनिया के राकेश सिंह ने बताया कि सासामुसा चीनी मिल में वर्ष 2017 में गन्ना का बकाया था. चीनी मिल हादसे के बाद बंद हो गया. फैक्ट्री के मालिक महमूद अली के विश्वास पर जब चीनी मिल 2019 में चालू हुआ तो गन्ना फिर गिराये. उनके द्वारा 22 जनवरी को बंद कर दिया गया. 15 दिनों के मशक्कत के बाद फैक्ट्री को नये डायरेक्टर साजीद अली ने शुरू कराया. 10 दिनों के भीतर फैक्ट्री को बंद करना पड़ा. रामपुर दाउद के गन्ना किसान रामेश्वर मिश्र, श्यामपुर गांव के सुदर्शन चौबे, काला मटिहनिया के देवेन्द्र भगत, राजकिशोर यादव अपनी दर्द बताकर रो पड़े.सासामुसा चीनी मिल में किसानों के बकाया से 15 करोड़ कम की है चीनीफैक्टरी चलाने में किसानों की ओर से सहयोग काफी मिला.

हादसा के बाद से ही गन्ना विकास विभाग ने आदेश दिया कि चीनी बेचने के बाद उससे आनेवाली आय से 60 प्रतिशत राशि किसानों की बकाया पर्चियों का भुगतान की जाये. अब स्थिति यह है कि किसानों का जितना राशि चीनी मिल पर बकाया है उससे लगभग 15 करोड़ से अधिक कम का चीनी उनके गोदाम में है. विभाग को जब इसकी जानकारी हुई तो जिला ईख पदाधिकारी ने फैक्ट्री के नये मालिक साजीद अली को राशि का इंतजाम करने का आदेश दिया है. किसानों को भुगतान नहीं मिलने से हाहाकार की स्थिति है. हादसे के बाद से ही मिल चलाने से कतराते रहे मालिककिसान बताते है कि अंग्रेजों के शासन में गोपालगंज का नाम गन्नांचल के रूप में जाना जाता था. इसे देखते हुए 1932 में सासामुसा चीनी मिल का स्थापना हुआ था. जब तक फैक्टरी का संचालन मरहूम अमीर हसन साहब किये तबतक सासामुसा चीनी मिल बिहार का नंबर वन रहा.

1990 के दसक से फैक्टरी पर संकट के बादल मंडरा रहे थे. महमूद अली फैक्टरी का संचालन अपने हाथों में ले चुके थे. जबकि वर्ष 2015 से ही फैक्टरी पर आर्थिक संकट होने की बात मालिकानों की ओर से कह कर किसानों का बकाया रखा जाने लगा. इस बीच 20 दिसंबर 2017 को फैक्टरी के ब्वॉयलर का क्वायड फटा और नौ मजदूरों की मौत हुई. अाधा दर्जन जलकर घायल हो गये. उसके बाद से ही फैक्टरी को चलाने से मालिक कतराने लगे थे.एक नजर सासामुसा चीनी मिल के बकाये पर2014-15 का 33.34 लाख2015-16 का 85.26 लाख 2016-17 का 6.20 लाख2017-18 का 14.21 लाख 2018-19 का 30.96 करोड़नये सत्र की पेराई में बकाया 15 जनवरी तकगन्ना खरीद- 3.92 लाख क्विंटलकीमत- 1133.48 लाखभुगतान- 90.11 लाख बकाया- 10.43 करोड़ चीनी मिल मजदूरों के परिवार के सामने रोटी का संकटसासामुसा चीनी मिल के मजदूरों के पास रोटी का संकट है.

मजदूर रामाश्रय राय,शंभू पांडेय, अब्दुल वहीद,म हसन, अनीसुरहमान, हजरत हुसैन, गम्मा मियां, म मतीन, फारूक अली, रामनाथ ठाकुर आदि कर्मियों ने कहा कि आज रोटी की भी संकट हमारे परिवार के सामने है. पहले से ही इस कारण आज हमें ठोकरे खाने को मजबूर होना पड़ा है. चीनी मिल पर होगी कार्रवाई: विभागलॉकडाउन में सासामुसा चीनी मिल के तरफ से किसानों को भुगतान नहीं दिये जाने को विभाग ने गंभीरता से लिया है. जिला ईख पदाधिकारी जयप्रकाश नारायण सिंह ने बताया कि किसानों का बकाया का भुगतान तो उनको करना ही होगा. अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

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